मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखाड़ा परिषद के संतों से माघ मेला और कुम्भ के जरिए दुनिया को स्वच्छता का संदेश देने को कहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि संगम और धरोहर का संरक्षण संतों और समाज को करना होगा। यह काम संत नहीं करेंगे तो कौन करेगा? उन्होंने आश्वस्त किया कि माघ और कुम्भ मेले में साधु संतों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए माकूल इंतजाम किए जाएंगे।
कुंभ मेले पर मुख्यमंत्री योगी ने संतों संग की गहन चर्चा, कहा- दुनिया को स्वच्छता का संदेश दें
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संतों ने तट पर फूल प्रवाहित करने के लिए अलग से व्यवस्था करने और गंगा में प्रवाहित होने वाली पूजन सामग्री को बाहर निकालने की भी व्यवस्था करने का सुझाव दिया। संतों ने बिजली के लटके हुए तार व जर्जर विद्युत पोल हटवाने, तट और धर्मस्थलों पर अतिक्रमण हटवाने की भी मांग की। संतों ने कहा, अखाड़ा परिषद स्वच्छता अभियान में एक दिन हिस्सा लेगी और मुख्यमंत्री भी उसमें शामिल होंगे।
अखाड़ा परिषद ने प्रयाग अर्द्ध कुम्भ का नाम कुम्भ करने पर सरकार की सराहना की। संतों ने कहा, सनातन धर्म में सब कुछ पूर्ण होता है। कुंभ का मतलब कलश होता है, कलश कभी आधा नहीं हो सकता। साधुओं ने बताया कि पहले कुम्भ ही नाम था, 1974 में अधिकारियों ने इसमें अर्द्ध जोड़ दिया। मुख्यमंत्री ने कहा, यह ख्याल रखना होगा कि अखाड़े अलग- अलग हो सकते हैं लेकिन उनका मूल धर्म सनातन है। संत भी यह प्रयास करें कि दुनिया के सामने कुम्भ को अच्छी तरह प्रस्तुत किया जाए। योगी ने कहा, 3 जनवरी से शुरू होने वाला माघ मेला कुंभ मेले का रिहर्सल होगा। मुख्यमंत्री स्वयं माघ मेले में व्यवस्थाओं का जायजा लेने जाएंगे।
मेले के लिए बनेगी समिति
मुख्यमंत्री ने संतों को बताया कि कुंभ मेले की व्यवस्थाओं के लिए मेला प्राधिकरण, अखाड़ा परिषद, वरिष्ठ संतों और समाज के प्रमुख लोगों को लेकर समिति बनाई जाएगी। इस समिति से समन्वय करके ही प्राधिकरण मेले की व्यवस्थाओं को अंजाम देगा। समिति साधु संतों का प्रतिनिधित्व करेगी जबकि मेला प्राधिकरण सरकार के प्रतिनिधि के रूप में काम करेगा।
स्नान के लिए मिलेगा ज्यादा समय
सीएम ने कहा, कुम्भ में साधु संतों की अधिक संख्या को देखते हुए उन्हें संगम स्नान के लिए पहले से अधिक समय दिया जाएगा। अखाड़े से जुड़े महामंडलेश्वर को भी उनके आश्रम के आसपास ही रहने की व्यवस्था की जाएगी ताकि स्नान के लिए निकलते समय अफरातफरी नहीं हो।