बेहद जहरीली हुई लखनऊ की हवा, एक्यूआई 400 के पार, नाक,कान व गले की शिकायत बढ़ी
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लखनऊ की हवा तेजी से बिगड़ने लगी है। यह सेहत के लिए खतरनाक हो चुकी है। दिन के समय हवा ने वायु गुणवत्ता सूचकांक को भले ही सुधारा हो, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि लालबाग की खराब हो रही हवा के साथ निशातगंज में भी सुबह के वक्त एक्यूआई अधिकतम 400 के ऊपर चला गया।
वैज्ञानिकों के मुताबिक ऐसा होना हवा के खतरनाक होने की पहचान है। मेट्रो के काम की वजह से सुबह के समय निशातगंज में एक्यूआई लगातार बढ़ रहा है। सोमवार सुबह करीब सात बजे यह 457 रिकॉर्ड किया गया, जो इस बार अधिकतम है। दोपहर 12 बजे के बाद यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में गिरावट आई।
यहां न्यूनतम एक्यूआई 59 दोपहर के वक्त रिकॉर्ड किया गया। निशातगंज में सोमवार को औसत एक्यूआई 293 रहा। वहीं, तीन दिनों की तुलना में लालबाग का औसत एक्यूआई भले ही कम रिकॉर्ड किया गया, लेकिन अधिकतम वायु गुणवत्ता सूचकांक में पिछले रिकॉर्ड टूट गए। यहां सुबह एक्यूआई 394 रिकॉर्ड हुआ।
अलीगंज में भी एक्यूआई अधिकतम 308 रिकॉर्ड किया गया। यहां औसत एक्यूआई 183 रहा। लालबाग और निशातगंज की तुलना में यहां अभी हवा बेहतर बनी हुई है। इसकी वजह कोई बड़ी निर्माण गतिविधि यहां न होना है।
मुख्यमंत्री की सख्ती पर कम हुआ था प्रदूषण
वायु प्रदूषण पर अंकुश को जहां पानी का छिड़काव शुरू हुआ तो निर्माण कार्यों की साइटों जैसे मेट्रो वर्क, रीयल एस्टेट में सख्ती कर दी गई। अब सवाल है कि क्या अधिकारी इस बार भी अभी से प्रभावी कार्रवाई नहीं कर सकते?
वायु गुणवत्ता सूचकांक का प्रभाव
एक्यूआई स्वास्थ्य पर असर
0-50 अच्छा, कोई खतरा नहीं।
51-100 बेहतर, सांस रोगियों के लिए दिक्कत भरा।
101-200 अच्छा नहीं, फेफड़ों के मरीज व बुजुर्गों के लिए ठीक नहीं।
201-300 खराब, फेफड़ों के मरीज पर बुरा असर।
301-400 बहुत खराब, लंबे समय संपर्क पर सांस या दूसरे गंभीर रोग संभव।
400-500 खतरनाक, पूरी आबादी को गंभीर बीमारी का खतरा।
प्रदूषण कम करने में जुटा निगमः मेयर
ऐसा हो तो सुधरे हालात
- डीजल के उपयोग पर नियंत्रण हो।
- निर्माण के कामों के समय धूल न उड़े।
- बिना पॉल्यूशन सर्टिफिकेट के वाहन या मशीनों का उपयोग बंद हो।
- 15 साल से अधिक पेट्रोल और 10 साल से अधिक डीजल के वाहनों को सीज किया जाए।
- जनरेटरों के चलने से रोकने के लिए 24 घंटे बिजली आपूर्ति हो।
- जहां निर्माण सामग्री रखी हो या मिट्टी की खुदाई हो, वहां पानी का छिड़काव अनिवार्य हो।
- बड़ी सड़कों की ट्रक माउंटेड मशीनों से सफाई हो।
- कूड़े को जलने से रोका जाए और डोर-टू- डोर कलेक्शन हो।
- सड़कों से अवैध कब्जे हटाए जाएं जिससे ट्रैफिक जाम न हो।
- ओवर लोडिंग रुके और लेन में गाड़ियां चलें, ऐसा सुनिश्चित हो।
(यूपीपीसीबी की तरफ से वायु प्रदूषण के नियंत्रण को तय दिशा-निर्देश और वैज्ञानिकों के सुझावों के मुताबिक।)
मरीजों की बढ़ रही है संख्या
रेस्पेरेटरी मेडिसिन के प्रोफेसर आरएएस कुशवाहा ने कहा कि अभी तक रेस्पेरेटरी मेडिसिन की ओपीडी में दो से ढाई सौ तक मरीज आ रहे हैं। इस मौसम में ओपीडी का आंकड़ा यही रहता है। प्रदूषण बढ़ा है तो दमा के मरीजों पर इसका असर तीन दिन बाद दिखेगा।
नाक, कान व गले के मरीज बढ़े
केजीएमयू ईएनटी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वीरेंद्र वर्मा ने कहा कि नाक, कान और गले मेें शिकायत के मरीजों की संख्या बढ़ी है। यह मौसम की वजह से भी हो सकता है और प्रदूषण से भी। आमतौर पर दो सौ के आसपास मरीज आते हैं। दो दिन से यह संख्या ढाई सौ तक पहुंच रही है।
बुखार, सर्दी जुकाम के मरीज बढ़े
केजीएमयू मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर डा. डी हिमांशु ने कहा कि दिन का तापमान अधिक है और रात का काफी कम। अचानक सर्दी लगने से वायरल और सर्दी, जुकाम के मरीज बढ़ रहे हैं। जब भी मौसम बदलता है, इन मरीजों की संख्या बढ़ती है। इन दिनों करीब तीन से साढ़े तीन सौ मरीज आ रहे हैं। हालांकि इसका प्रदूषण से संबंध नहीं है।