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शोध: जहरीली होती हवा बन रही दिल की दुश्मन, फेफड़ों में रोजाना भर रहा 12 सिगरेट का धुआं
Fri, 29 Nov 2024 09:55 AM IST
ishwar ashish
विनीत चतुर्वेदी, अमर उजाला, लखनऊ
विनीत चतुर्वेदी, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Fri, 29 Nov 2024 09:55 AM IST
सार
इन दिनों लखनऊ का औसत एक्यूआई 250 के करीब है। ऐसे में यहां की हवा में सांस लेने वाला व्यक्ति रोजाना 12 सिगरेट का धुआं अपने फेफड़ों में भर रहा है। पढ़ें - एक जरूरी रिपोर्ट
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- फोटो : amar ujala
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विस्तार
राजधानी लखनऊ की जिस जहरीली हवा में हम सांस ले रहे हैं, वह हमारे दिल को बीमार बना रही है। हवा में मौजूद पीएम-2.5 समेत अन्य रसायन सांसों के जरिये खून में मिलकर दिल को उतना ही नुकसान पहुंचा रहे हैं, जितना हाई कोलेस्ट्रॉल और अनियंत्रित डायबिटीज पहुंचाती है। ये चौंकाने वाली जानकारी आईआईटीआर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय विष विज्ञान सम्मेलन में आए अमेरिका के लुईविल विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संजय श्रीवास्तव ने अपने एक दशक तक चले शोध के नतीजों के हवाले से दी।
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अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि प्रदूषण हमारी धमनियों को भीतर से कमजोर और संकरा बना रहा है। इससे दिल पर जोर पड़ने से स्थायी व घातक समस्याएं पैदा हो रही हैं। वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा नुकसान बच्चों व बुजुर्गों को पहुंच रहा है। जहरीली हो चुकी हवा में सांस लेने से इनमें बीमारियों से लड़ने की क्षमता कमजोर हो रही है।
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इन दिनों लखनऊ का औसत एक्यूआई 250 के करीब है। ऐसे में यहां की हवा में सांस लेने वाला व्यक्ति रोजाना 12 सिगरेट का धुआं अपने फेफड़ों में भर रहा है। डॉ. संजय का शोध अमेरिका के सर्कुलेशन रिसर्च जर्नल, साइंस ऑफ टोटल एनवायरनमेंट जैसे प्रतिष्ठित जर्नल में छप चुका है।
ऐसे दिल की दुश्मन बनती है प्रदूषित हवा
सामान्य धमनी (बायें) व प्रदूषण के बाद उसका हाल।
- फोटो : amar ujala
डॉ. संजय श्रीवास्तव ने बताया कि हमारी धमनी नलिका की भीतरी परत एंडोथीलियम की बनी होती है, जो बहुत संवेदनशील होती है। प्रदूषण के कण एंडोथीलियम पर चिपककर कोलेस्ट्राल जैसी मोटी परत बना देते हैं, जिससे धमनियां संकरी हो जाती हैं। इसके चलते बड़ी संख्या में लोगों में हाई बीपी के साथ दिल के दौरे और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो रही हैं।
पर्यावरण निगरानी व्यवस्था विकसित करे भारत सरकार
सरकार से अनुरोध करते हुए डॉ. संजय श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदूषण के जहर से निपटने के लिए भारत में पर्यावरण निगरानी व्यवस्था विकसित करनी होगी। प्रदूषण पर अध्ययन के लिए पश्चिमी देशों पर निर्भर न रहकर स्थानीय शोध को बढ़ाना होगा।
पर्यावरण निगरानी व्यवस्था विकसित करे भारत सरकार
सरकार से अनुरोध करते हुए डॉ. संजय श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदूषण के जहर से निपटने के लिए भारत में पर्यावरण निगरानी व्यवस्था विकसित करनी होगी। प्रदूषण पर अध्ययन के लिए पश्चिमी देशों पर निर्भर न रहकर स्थानीय शोध को बढ़ाना होगा।