मजबूत होते डॉलर ने लगाई हवाई किराए पर नजर
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एक माह पहले यदि आपने दिल्ली की फ्लाइट का टिकट बुक कराया था तो उसका बेसिक किराया 400 से 500 रुपये के बीच था जो कि टैक्स मिलाकर 2200 रुपये होता है।
वहीं इस महीने उसी विमान का दिल्ली का किराया 5500 से अधिक चल रहा है। पिछले दिनों डॉलर के मुकाबले कमजोर हुए रुपये और ईंधन की बढ़ी कीमतों की भरपाई के लिए कंपनियों ने जो फंडा निकाला, उसने हवाई किराए को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
विमानन कंपनियों ने जुलाई व अगस्त के लिए लीन सीजन के कम किराए की सुविधा समाप्त कर दी जिससे किराया सत्तर फीसदी तक बढ़ गया। दिल्ली की ही बात करें तो किराया चालू माह के पहले सप्ताह तक 2200 से 2300 रुपये था, वह 5500 रुपये से अधिक पहुंच गया है।
लो फेयर विमानों में भी 4000 रुपये से अधिक दाम के टिकट मिल रहे हैं। जानकारों के मुताबिक पिछले छह साल में सामान्य तौर पर हवाई टिकट का यह अधिकतम किराया है।
इसी तरह मुंबई का किराया 4000 रुपये से बढ़कर 6000 रुपये, कोलकाता का 3200 की जगह 5600 रुपये और बंगलूरू का न्यूनतम किराया 4000 से 6200 रुपये कर दिया गया है। पूरे सितंबर में न्यूनतम किराया इसी दर पर लिया जाएगा।
यूं निकाली कमाई बढ़ाने की तरकीब
निजी विमानन कंपनियों ने डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये और ईंधन के बढ़ते दाम के बीच कमाई बढ़ाने का नया फॉर्मूला निकाल लिया है। कंपनियां इकोनॉमी क्लास की सीटों को सात से आठ हिस्सों में बांटकर टिकट बेच रही हैं। दस प्रतिशत सीटें न्यूनतम किराए में बेचकर बाकी सीटों को मांग के अनुसार अधिक दाम पर बेचा जा रहा है।
डीजीसीए के आदेश हुए बेमानी
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के सख्त आदेशों के बावजूद कम किराए वाली विमान कंपनियों ने अब तक अपना अधिकतम किराया निर्धारित नहीं किया है।
लीन सीजन या एक माह पहले बुक कराने पर दिल्ली के लिए 2200 से 2300 रुपये में मिलने वाला विमान का टिकट भीड़भाड़ के समय 13 हजार रुपये तक पहुंच जाता है। वहीं ईंधन के दाम बढ़ने के नाम पर भी कंपनियां दाम बढ़ाकर यात्रियों से खूब वसूली कर रही हैं।
क्या कहता है नियम
नियमों के अनुसार ईंधन के दाम बढ़ने पर प्रति यात्री 100 से 200 रुपये तक किराया बढ़ना चाहिए लेकिन कंपनियां पहले से तय टैक्स को जोड़कर ईंधन चार्ज के नाम पर छह से सात सौ रुपये अधिक वसूल रही हैं। टूरिस्ट कंपनी से जुड़े गगन गुरनानी के मुताबिक लो फेयर वाली विमान कंपनियां सीटों के हिसाब से किराया तय कर रही हैं।
जैसी सुविधा, वैसा दाम
सस्ता टिकट बेचने के नाम पर प्लेन में खाने की सुविधा विमान कंपनियों ने पहले ही हटा रखी है। वहीं एक बार बुक होने के बाद ये टिकट रद्द भी नहीं हो सकते।
ऐसे में यदि किसी कारणवश कोई यात्री कम किराए वाले टिकट पर यात्रा नहीं कर पा रहा है तो उसकी सीट अधिक किराया लेकर दूसरे यात्री को बेच दी जाती है। विंडो सीट के लिए 400 से 500 रुपये और किनारे वाली सीट के लिए 200 से 300 रुपये अलग से लिए जा रहे हैं।
ऐसे तय होता है किराया
एक ही फ्लाइट में यात्रियों से सात से आठ तरह का किराया वसूला जा रहा है। पहले आओ पहले पाओ के आधार पर दस से 15 प्रतिशत सीटें ही कम किराये पर बेची जाती हैं। लखनऊ से दिल्ली जाने वाली कम किराए वाली एक फ्लाइट में कुछ इस तरह से होता है टिकटों की कीमतों का बंटवारा।
• 10 से 12 सीटें 2200 से 2300 रुपये में
• 15 से 20 सीटें 4000 रुपये में
• 15 से 20 सीटें 4500 रुपये में
• 15 से 20 सीटें 5200 रुपये में
• 10 से 15 सीटें 5800 रुपये में
• 10 से 15 सीटें 6500 रुपये में
• शेष 10 से 15 सीटें मांग के अनुसार अधिकतम मूल्य पर