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राजधानी के तीन लाख लोगों पर फिर पानी का संकट
प्रवेंद्र/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 05 Feb 2014 09:56 AM IST
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सरकार चाहे कितने दावे कर ले लेकिन सरकारी विभागों में लालफीताशाही और लापरवाही कम होने का नाम नहीं ले रही है।ऐसा ही एक मामला जलकल विभाग और सिंचाई विभाग के अधिकारियों के बीच चल रहा है।
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शारदा नहर से जलापूर्ति बाधित होने पर अक्सर तीसरा जलकल बंद हो जाता है। इसके चलते इंदिरानगर व गोमतीनगर के करीब तीन लाख लोगों को पानी संकट का सामना करना पड़ता है।
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लेकिन इसके लिए अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। तीसरे जलकल को नियमित रूप से पानी उपलब्ध कराने के लिए जलकल विभाग और सिंचाई विभाग के बीच एग्रीमेंट होना है।
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हालांकि एग्रीमेंट साइन होने के लिए बीते तीन साल से अब तक ‘मुहूर्त’ नहीं निकल सका है। जिस समय तीसरे जलकल की योजना बनी थी, उस समय सिंचाई विभाग ने कहा था कि साल में दो बार नहर सफाई के लिए एक-एक महीने के लिए बंद की जाएगी।
एक बार अप्रैल से मई और दूसरी बार सितंबर से अक्तूबर के बीच। इस बीच तीसरे जलकल को कठौता झील से पानी दिया जाएगा। इसी मकसद से झील को विकसित किया गया था।
सिंचाई विभाग तीसरे जलकल को कितना पानी देगा। उसके एवज में कितना पैसा लेगा और नहर कब-कब कितने दिन के लिए बंद की जाएगी, इस सबके लिए एक अनुबंध होना है।
अनुबंध न होने से सिंचाई विभाग अपने हिसाब से नहर में पानी छोड़ता है। बीते साल अक्तूबर में सफाई के लिए नहर एक महीने के लिए बंद की गई थी, लेकिन तय समय में नहर में पानी नहीं छोड़ा गया।
इससे पेयजल संकट पैदा हो गया था। इस पर जब हल्ला मचा तो सिंचाई विभाग ने कहा कि किसानों ने पानी छोड़ने की मांग नहीं की है इसलिए शारदा नहर में पानी नहीं छोड़ा गया है।
जलकल विभाग के अधिशासी अभियंता महाराजदीन चौधरी ने बताया कि सिंचाई विभाग का कहना था कि किसानों को अभी पानी की जरूरत नहीं है इसलिए शारदा नहर बंद है।
उधर, नहर से पानी न आने की स्थिति में जलकल विभाग फिर से नलकूपों को चालू करेगा। जलकल विभाग के अधिशासी अभियंता ने बताया कि नहर से पानी न मिलने पर नलकूप से आपूर्ति की जाएगी।
तीसरा जलकल बनने से पहले भी नलकूप से ही गोमती नगर व इंदिरा नगर में पानी की आपूर्ति की जाती थी। दोनों कॉलोनियों में पांच दर्जन नलकूप हैं। विशेष परिस्थितियों में इनसे ही आपूर्ति की जाती है।