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बाजारों में लापरवाही पड़ेगी भारी... लगातार दूसरे दिन 10 मौतें, 29 नए मरीज मिले, तीन दिन में सबसे ज्यादा रही संख्या
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लखनऊ। राजधानी में लगातार दूसरे दिन बुधवार को कोरोना से दस लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा 29 नए मरीज मिले, जो बीते तीन दिन में सबसे ज्यादा संख्या रही। हालांकि, इसके बावजूद लोग लापरवाही बरत रहे हैं। बाजारों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया जा रहा है। मास्क का भी सही तरीके से इस्तेमाल नहीं हो रहा है। उधर, दो दिन में 20 मौतों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। यह उन लोगों के लिए भी अलर्ट है जो अब तक कोरोना को खत्म मान रहे थे, जबकि राजधानी में वायरस कमजोर नहीं पड़ा है। संक्रमण के मामलों में उतार-चढ़ाव हो रहा है, लेकिन इससे होने वाली मौतों से हालात फिर चिंताजनक हो गए हैं।
41 मरीज ठीक हुए
राजधानी में बुधवार को 41 मरीजों ने वायरस को मात दी। इसके साथ सक्रिय केसों की संख्या घटकर 393 पर आ गई। अस्पतालों में 134 मरीज भर्ती हैं।
चार बातों पर निर्भर स्वस्थ और मौत होने का आंकड़ा
केजीएमयू में कोविड प्रभारी डॉ. सूर्यकांत के अनुसार मरीज की आयु, केस हिस्ट्री, अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि और ऑक्सीजन स्तर पर निर्भर करता है कि वह स्वस्थ होगा या उसकी मौत होगी। इस समय जिनकी मौत हो रही है, वे लंबे समय से अस्पताल में थे। भर्ती के समय उनका ऑक्सीजन स्तर भी कम था।
80 से नीचे ऑक्सीजन वाले मरीजों को खतरा
डॉ. सूर्यकांत के अनुसार अस्पताल में भर्ती होने के समय जिनका ऑक्सीजन स्तर 80 से कम था, उनके लिए खतरा ज्यादा है। ज्यादातर इन्हीं मरीजों की मौत हुई है। 80 से 90 ऑक्सीजन स्तर वाले 99 फीसदी तक मरीज स्वस्थ होकर घर लौटे हैं। इनमें से उन्हीं को समस्या हुई जिनको कोई दूसरी गंभीर बीमारी थी।
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41 मरीज ठीक हुए
राजधानी में बुधवार को 41 मरीजों ने वायरस को मात दी। इसके साथ सक्रिय केसों की संख्या घटकर 393 पर आ गई। अस्पतालों में 134 मरीज भर्ती हैं।
चार बातों पर निर्भर स्वस्थ और मौत होने का आंकड़ा
केजीएमयू में कोविड प्रभारी डॉ. सूर्यकांत के अनुसार मरीज की आयु, केस हिस्ट्री, अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि और ऑक्सीजन स्तर पर निर्भर करता है कि वह स्वस्थ होगा या उसकी मौत होगी। इस समय जिनकी मौत हो रही है, वे लंबे समय से अस्पताल में थे। भर्ती के समय उनका ऑक्सीजन स्तर भी कम था।
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80 से नीचे ऑक्सीजन वाले मरीजों को खतरा
डॉ. सूर्यकांत के अनुसार अस्पताल में भर्ती होने के समय जिनका ऑक्सीजन स्तर 80 से कम था, उनके लिए खतरा ज्यादा है। ज्यादातर इन्हीं मरीजों की मौत हुई है। 80 से 90 ऑक्सीजन स्तर वाले 99 फीसदी तक मरीज स्वस्थ होकर घर लौटे हैं। इनमें से उन्हीं को समस्या हुई जिनको कोई दूसरी गंभीर बीमारी थी।
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