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Lucknow News: एनसीएलएटी के आदेश के बाद अब एलडीए एनसीएलटी में रखेगा अपना पक्ष
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लखनऊ। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के शुक्रवार को आए आदेश के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) अब राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में अपना पक्ष रखेगा। इस दौरान वह एनसीएलटी के समक्ष सुशांत गोल्फ सिटी हाईटेक टाउनशिप को विकसित करने के लिए प्रोजेक्ट का हस्तांतरण लेने का प्रस्ताव भी रखेगा।
बीते 24 फरवरी को एनसीएलटी ने अंसल पर दिवालिया घोषित करने का आदेश जारी किया था। उस आदेश में एलडीए या आवास विभाग को न तो पक्षकार बनाया गया था और न ही उनकी बात सुनी गई थी। इसे एलडीए ने एकतरफा कार्रवाई बताते हुए एनसीएलएटी में अपील की थी।
अपील पर सुनवाई 17 अप्रैल को पूरी हुई थी और 25 अप्रैल को एनसीएलएटी ने आदेश जारी करते हुए एनसीएलटी के पूर्व आदेश पर रोक लगा दी है। साथ ही एलडीए को एनसीएलटी में जाकर पक्ष रखने का अवसर दिया गया। इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। मामले की अंतिम सुनवाई एनसीएलएटी में 20 मई को होगी। इससे पहले एनसीएलटी में अंसल को दिवालिया घोषित करने के आदेश पर दोबारा सुनवाई की जाएगी।
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हैंडओवर की करेगा मांग
एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि अंसल पर एलडीए की कुल देनदारी चार हजार करोड़ रुपये से अधिक है। इसमें 413 एकड़ बेची गई बंधक जमीन, मानचित्र शुल्क और सरकारी भूमि का भुगतान शामिल है। प्रथमेश कुमार ने कहा कि एक फाइनेंस कंपनी के केवल 83 करोड़ रुपये बकाया होने के आधार पर अंसल को दिवालिया घोषित करना उचित नहीं था। यदि एलडीए को पक्षकार बनाया गया होता तो वह यह दलील देता कि यदि अंसल कंपनी कार्य करने में असमर्थ है, तो सुशांत गोल्फ सिटी टाउनशिप का प्रभार एलडीए को सौंप दिया जाए, ताकि वहां विकास कार्य कराए जा सकें। इसी उद्देश्य से एलडीए ने एनसीएलटी में 24 फरवरी के आदेश में संशोधन के लिए याचिका दाखिल की थी।
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बीते 24 फरवरी को एनसीएलटी ने अंसल पर दिवालिया घोषित करने का आदेश जारी किया था। उस आदेश में एलडीए या आवास विभाग को न तो पक्षकार बनाया गया था और न ही उनकी बात सुनी गई थी। इसे एलडीए ने एकतरफा कार्रवाई बताते हुए एनसीएलएटी में अपील की थी।
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अपील पर सुनवाई 17 अप्रैल को पूरी हुई थी और 25 अप्रैल को एनसीएलएटी ने आदेश जारी करते हुए एनसीएलटी के पूर्व आदेश पर रोक लगा दी है। साथ ही एलडीए को एनसीएलटी में जाकर पक्ष रखने का अवसर दिया गया। इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। मामले की अंतिम सुनवाई एनसीएलएटी में 20 मई को होगी। इससे पहले एनसीएलटी में अंसल को दिवालिया घोषित करने के आदेश पर दोबारा सुनवाई की जाएगी।
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हैंडओवर की करेगा मांग
एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि अंसल पर एलडीए की कुल देनदारी चार हजार करोड़ रुपये से अधिक है। इसमें 413 एकड़ बेची गई बंधक जमीन, मानचित्र शुल्क और सरकारी भूमि का भुगतान शामिल है। प्रथमेश कुमार ने कहा कि एक फाइनेंस कंपनी के केवल 83 करोड़ रुपये बकाया होने के आधार पर अंसल को दिवालिया घोषित करना उचित नहीं था। यदि एलडीए को पक्षकार बनाया गया होता तो वह यह दलील देता कि यदि अंसल कंपनी कार्य करने में असमर्थ है, तो सुशांत गोल्फ सिटी टाउनशिप का प्रभार एलडीए को सौंप दिया जाए, ताकि वहां विकास कार्य कराए जा सकें। इसी उद्देश्य से एलडीए ने एनसीएलटी में 24 फरवरी के आदेश में संशोधन के लिए याचिका दाखिल की थी।