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केंद्रीय मंत्रिमंडल के गठन के बाद प्रदेश में फेरबदल, दोनों कैबिनेट से साधेंगे सामाजिक समीकरण
Sun, 26 May 2019 04:44 AM IST
देव कश्यप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 26 May 2019 04:44 AM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : फाइल फोटो
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश मंत्रिमंडल में जल्द ही फेरबदल का संकेत देकर सियासी गलियारों में सरगर्मियां बढ़ा दी हैं। मंत्री पद के दावेदार भी सक्रिय हो गए हैं। मिल रहे संकेतों के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल के गठन के बाद प्रदेश मंत्रिमंडल में फेरबदल किया जाएगा। इसके साथ ही भाजपा संगठन में भी फेरबदल होना सुनिश्चित है। चुनाव में अच्छा काम करने वालों को तरक्की देकर या राष्ट्रीय संगठन में समायोजित करके पुरस्कृत किया जा सकता है। वहीं कुछ नए चेहरों को प्रदेश में जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
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प्रदेश सरकार के तीन मंत्री सांसद चुन लिए गए हैं। एक मंत्री ओमप्रकाश राजभर को मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जा चुका है। यही नहीं, प्रदेश मंत्रिमंडल में पहले से ही 13 स्थान खाली पड़े हैं। इसलिए प्रदेश मंत्रिमंडल में फेरबदल या पुनर्गठन निश्चित है। मुख्यमंत्री ने इसके संकेत भी दे दिए हैं।पार्टी के रणनीतिकार चाहते हैं कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में यूपी से शामिल होने वाले चेहरों के मद्देनजर प्रदेश कैबिनेट का पुनर्गठन कर क्षेत्रीय और जातीय प्रतिनिधित्व का संतुलन साधा जाए। जिन क्षेत्रों व जातियों को केंद्रीय मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी न मिल पाए, उन्हें प्रदेश में महत्वपूर्ण भागीदारी दी जाए।
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भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय भी फिर सांसद चुन लिए गए हैं। उन्हें मंत्री बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा प्रदेश के कुछ पदाधिकारियों को राष्ट्रीय संगठन में लिया जा सकता है। प्रदेश सरकार के कुछ मंत्रियों को भी संगठन में भेजने की तैयारी है। सूत्रों की मानें तो कुछ लोगों को इस बारे में संकेत भी दे दिए गए हैं।
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केंद्र में यूपी से हो सकते हैं सबसे ज्यादा मंत्री
पिछली बार केंद्र में सबसे ज्यादा मंत्री उत्तर प्रदेश से ही थे। इस बार भी उम्मीद की जा रही है कि प्रदेश से आठ से दस चेहरों को केंद्रीय मंत्रिमंडल में भागीदारी दी जा सकती है। यह संख्या बाद में होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में बढ़ाई भी जा सकती है। कारण, प्रदेश में सपा और बसपा के गठबंधन के बावजूद भाजपा ने यूपी में अपना दल के दो सांसदों सहित 64 सीटें जीती हैं। इसलिए भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व मंत्रिमंडल के जरिये भी संदेश देने की कोशिश करेगा कि वह यूपी के महत्व को पूरी तरह स्वीकार करता है।