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Lucknow News: फिल्मफेयर अवॉर्ड के बाद इंडस्ट्री ने पहचानी प्रतिभा

Mon, 07 Jul 2025 01:55 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 07 Jul 2025 01:55 AM IST
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After Filmfare Award, the industry recognized talent
लखनऊ। तुम्बाड जैसी फिल्म में कला निर्देशन के लिए प्रतिष्ठित फिल्मफेयर अवॉर्ड प्राप्त करने वाले भारतेंदु नाट्य अकादमी के पूर्व छात्र राकेश यादव मानते हैं कि अगर आपके पास प्रतिभा के साथ कठिन परिश्रम करने की क्षमता है तो एक न एक दिन यह दुनिया आपको जरूर पहचानेगी। उन्होंने कहा कि मुंबई में 2005 से काम कर रहा था लेकिन इंडस्ट्री में मुझे असली पहचान 2018 में मिली, जब फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए मेरा चयन हुआ।
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राकेश यादव रविवार को भारतेंदु नाट्य अकादमी पहुंचे। यहां उन्होंने अमर उजाला के साथ खास बातचीत में अपने संघर्ष से सफलता तक के सफर को विस्तार से साझा किया। राकेश ने कहा कि मेरा घर गोरखपुर में है और नाट्य कला में परास्नातक के लिए मैंने लखनऊ के बीएनए में प्रवेश लिया था। 2005 में यहां से पीजी करने के बाद मुंबई की राह पकड़ी। यहां पहली बार नागेश कुकुनूर के निर्देशन में बनी फिल्म डोर में उन्हें असिस्टेंट के रूप में कला निर्देशन का काम मिला।
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इसके बाद ओशीन ऑफ एन ओल्ड मैन, हरूद, हॉर्टलेस, इकोज और इरफान अभिनीत फिल्म द सॉन्ग ऑफ स्कॉर्पियंस जैसी फिल्मों में काम मिला। 2018 में आई तुम्बाड में राकेश यादव के कला निर्देशन को सराहना के साथ ही फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला। कंगना रनौत अभिनीत इमरजेंसी में भी उनके काम की तारीफ हुई। राकेश के मुताबिक, कंगना फिल्म की शूटिंग लंदन में करना चाहती थीं लेकिन मैंने उन्हें यहीं पर मनमुताबिक सेट तैयार कर लेने को कहा। फिर मैंने मुंबई, दिल्ली में ही बिहार और असम की लोकेशन वाले सेट तैयार किए।
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तुम्बाड के बाद कई ऑफर आए

राकेश ने बताया कि तुम्बाड के लिए मिले फिल्मफेयर के बाद मुझे इंडस्ट्री में पहचान के साथ ही काम भी मिलना शुरू हो गया। उन्होंने बताया कि निर्देशक सुधीर मिश्रा के साथ एक वेब सीरीज के लिए काम कर रहा हूं। इस फिल्म की कहानी भी इमरजेंसी के दौर की ही है। इसके अलावा मनोज वाजपेई अभिनीत एक वेब सीरीज में भी कला निर्देशन कर रहा हूं। इसके अलावा एक हॉरर प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहा हूं।


आज जो कुछ भी हूं उसमें बीएनए का अहम योगदान

राकेश यादव ने कहा कि आज मेरे काम को बेशक सराहना मिल रही है लेकिन इसमें सबसे बड़ा योगदान बीएनए का है। कहा, बीएनए ने मुझ जैसे पौधे की जड़ों को मजबूती दी जिससे मैं मुंबई के बड़े आकाश के नीचे पनप सका।
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