'ड्यूटी के बाद जवान का शराब पीना गलत नहीं'
सशस्त्र सैन्य बल अधिकरण (आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल) की लखनऊ क्षेत्रीय बेंच ने एक अहम नजीर वाले फैसले में कहा है कि सैन्यकर्मी का ड्यूटी के बाद शराब पीना कोई कदाचरण नहीं होगा।
ड्यूटी के दौरान शराब पीने की इजाजत नहीं है और यह गंभीर कदाचरण होगा, लेकिन ड्यूटी के बाद जब तक कोई उपद्रव या बवाल न किया जाए, तब शराब पीने की इजाजत है और आम तौर पर इसमें दखल नहीं दिया जाना चाहिए।
अधिकरण के न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह और प्रशासनिक सदस्य एयर मार्शल अनिल चोपड़ा की खंडपीठ ने इस विधि व्यवस्था के साथ एक बर्खास्त गनर (वाशरमैन) की अर्जी को मंजूर कर लिया।
गाजीपुर निवासी गनर को ड्यूटी के बाद शाम के वक्त यूनिट में शराब पीने के आरोपों में चार प्रतिकूल प्रविष्टियां दी गई थीं और सेना की सेवा से डिस्चार्ज कर दिया गया था। उसने अधिकरण में अर्जी पेश कर इस फैसले को चुनौती दी थी।
अधिकरण ने अपने फैसले में कहा कि अगर अर्जीदाता की रिटायरमेंट की उम्र न पूरी हुई हो तो उसे पुन: सेवा में लिया जाए और तीन माह में सभी परिणामी लाभ दिए जाएं। उधर, प्रतिपक्षियों केंद्र सरकार और सैन्य प्रशासन की तरफ से अर्जी का विरोध किया गया।
सेना मुख्यालय का आदेश मनमाना
अधिकरण ने फैसले में कहा कि सेना मुख्यालय के 28 दिसंबर 1988 के आदेश में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसमें मनमानेपन की झलक है।
ऐसे में सैन्यकर्मी को दंडित किया जाना ‘कानून के शासन’ के खिलाफ होगा। अदालत ने अधिकरण के रजिस्ट्रार को इस फैसले की कॉपी ‘चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ’ को भेजने के निर्देश दिए हैं, जिससे इसके आधार पर समुचित आदेश जारी किए जा सकें।
...तो कैंटीन से शराब में क्यों देते हैं कोटा
अधिकरण ने फैसले में कहा कि अगर यूनिट में शराब पीना अपराध है तो फिर मिलिट्री कैंटीन से मिलने वाली शराब में सैन्यकर्मियों को कोटा देने का कोई तर्कसंगत कारण नहीं है।