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Lucknow News: एसएमए के महंगे इलाज में सस्ती दवा बनी सहारा

Fri, 28 Aug 2026 02:38 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 28 Aug 2026 02:38 AM IST
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Affordable medicine proves to be a lifeline amidst the high cost of SMA treatment
लखनऊ। गंभीर आनुवंशिक बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) के इलाज में मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है। पीजीआई में नेशनल पॉलिसी ऑफ रेयर डिजीज (एनपीआरडी) के तहत पहली बार भारत में निर्मित ओरल आरएनए स्प्लिसिंग मॉडिफायर रिसडिप्लाम का इस्तेमाल शुरू किया गया है।
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नैटको फार्मा की इस दवा की पहली खेप में 15 बच्चों को मुफ्त दवा दी गई। संस्थान के मेडिकल जेनेटिक्स विभाग में 100 से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं, जबकि 50 से ज्यादा बच्चे दवा मिलने का इंतजार कर रहे हैं। संस्थान के निदेशक पद्मश्री डॉ. आरके धीमान ने बताया कि भारतीय दवा की लागत बेहद कम है। एसएमए की विदेशी जीन थेरेपी का खर्च करीब 18 करोड़ रुपये तक पहुंचता है।
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इंट्राथेकल इंजेक्शन की लागत करीब छह करोड़ रुपये सालाना है। वहीं, विदेशी कंपनी की ओरल आरएनए स्प्लिसिंग मॉडिफायर दवा 20 किलो वजन वाले बच्चे के लिए करीब एक से दो करोड़ रुपये सालाना पड़ती थी। इसके मुकाबले भारत में बनी रिसडिप्लाम की कीमत करीब 3.5 लाख रुपये सालाना तक है।
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विभागाध्यक्ष डॉ. कौशिक मंडल और उनकी टीम के प्रयासों से भारतीय दवा पीजीआई तक पहुंची। उम्मीद है कि इसकी नियमित उपलब्धता से प्रतीक्षा सूची में शामिल बच्चों समेत अधिक एसएमए मरीजों को इलाज मिल सकेगा। इससे महंगे इलाज की बड़ी बाधा कम होगी।
मांसपेशियां कमजोर करती है बीमारी
एसएमए में रीढ़ की हड्डी की मोटर न्यूरॉन कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं। इससे बच्चों की मांसपेशियां कमजोर होती हैं, शरीर में ढीलापन और मोटर विकास में देरी होती है। बीमारी बढ़ने पर रीढ़ टेढ़ी होने के साथ सांस लेने और बोलने में परेशानी हो सकती है। हालांकि, इन बच्चों की बुद्धि और समझ सामान्य रहती है। दुनिया में करीब हर 10 हजार जीवित जन्म में एक बच्चे में एसएमए होने का अनुमान है। करीब दो फीसदी लोग इसके कैरियर माने जाते हैं। दोनों माता-पिता कैरियर होने पर बच्चे के प्रभावित होने का जोखिम रहता है।

भारत की दवा से महंगे इलाज की बाधा होगी कम
दवा वितरण के दौरान निदेशक ने मेडिकल जेनेटिक्स विभाग की टीम को बधाई दी और बच्चों व उनके परिवारों का हौसला बढ़ाया। इस दौरान बच्चों ने निदेशक को राखी बांधी और मिठाई खिलाई। विभागाध्यक्ष डॉ. कौशिक मंडल के नेतृत्व में मेडिकल जेनेटिक्स टीम ने भारत में बनी दवा उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किए। टीम में डॉ. दीप्ति सक्सेना, डॉ. अमिता एम, डॉ. हसीना ए सैत, डॉ. अंशिका श्रीवास्तव, डॉ. प्रज्ञा काफ्ले, डॉ. पूजा मोटवानी और डॉ. आदर्श समेत रेजिडेंट डॉक्टर और स्टाफ शामिल थे। दवा की खरीद में संयुक्त निदेशक सामग्री प्रबंधन प्रकाश सिंह और गंगा विष्णु की भूमिका रही।
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