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राजा महमूदाबाद की 422 हेक्टेयर जमीन सीलिंग घोषित, एडीएम कोर्ट ने खारिज की दावेदारी
Sun, 27 Dec 2020 10:33 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 27 Dec 2020 10:33 AM IST
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फाइल फोटो
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राजा महमूदाबाद की सीतापुर, बाराबंकी व लखीमपुर खीरी में चिह्नित 422 हेक्टेयर जमीन पर दावेदारी खारिज करते हुए राजस्व कोर्ट ने इसे सीलिंग घोषित कर दिया दिया है। एडीएम कोर्ट प्रशासन के इस फैसले के बाद अब यह जमीन राज्य सरकार के स्वामित्व में आ जाएगी।
राजा मोहम्मद आमीर मोहम्मद खान बनाम सरकार केस में 13 साल बाद फैसला आया है। फैसले के मुताबिक सीतापुर में 388.30 हेक्टेयर, लखीमपुर खीरी में 10.6695 और बाराबंकी में 23.005 हेक्टेयर जमीन को सीलिंग में दर्ज किया जाएगा।
अपर जिलाधिकारी प्रशासन अमर पाल सिंह ने बताया कि घोषित की गई सीलिंग भूमि का बाजार मूल्य 421 करोड़ के करीब है। इसमें सीतापुर स्थित जमीन का मूल्य 388 करोड़, लखीमपुरी खीरी की जमीन का 11 करोड़ और बाराबंकी की जमीन का मूल्य करीब 23 करोड़ रुपये है।
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उन्होंने बताया कि सीलिंग एक्ट-1976 के तहत किसी भी खातेदार के पास एक निश्चित माप से अधिक भूमि पर सीलिंग की कार्रवाई करते हुए सरकार के नाम दर्ज किया जाता है। ग्रामीण इलाकों में माप से अधिक सिंचित भूमि पर पूर्व में सीलिंग की कार्रवाई की गई थी।
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राजा मोहम्मद आमीर मोहम्मद खान बनाम सरकार केस में 13 साल बाद फैसला आया है। फैसले के मुताबिक सीतापुर में 388.30 हेक्टेयर, लखीमपुर खीरी में 10.6695 और बाराबंकी में 23.005 हेक्टेयर जमीन को सीलिंग में दर्ज किया जाएगा।
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अपर जिलाधिकारी प्रशासन अमर पाल सिंह ने बताया कि घोषित की गई सीलिंग भूमि का बाजार मूल्य 421 करोड़ के करीब है। इसमें सीतापुर स्थित जमीन का मूल्य 388 करोड़, लखीमपुरी खीरी की जमीन का 11 करोड़ और बाराबंकी की जमीन का मूल्य करीब 23 करोड़ रुपये है।
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उन्होंने बताया कि सीलिंग एक्ट-1976 के तहत किसी भी खातेदार के पास एक निश्चित माप से अधिक भूमि पर सीलिंग की कार्रवाई करते हुए सरकार के नाम दर्ज किया जाता है। ग्रामीण इलाकों में माप से अधिक सिंचित भूमि पर पूर्व में सीलिंग की कार्रवाई की गई थी।
इस निर्णय के खिलाफ विपक्षी ने बड़ी अदालतों में अपील की थी। हाईकोर्ट ने इस मामले को कमिश्नर के पास भेज दिया। वर्ष 2007 में तत्कालीन कमिश्नर ने इस मुकदमे को अपर जिलाधिकारी प्रशासन कोर्ट में भेज दिया।
अपर आयुक्त न्यायिक लखनऊ मंडल के स्थानांतरण पत्र में पारित आदेश का पालन करते हुए 15 जनवरी 2007 को मूल पत्रावली एडीएम प्रशासन की कोर्ट में कलेक्ट्रेट भेज दिया गया। तब से इस मामले की सुनवाई कोर्ट में चल रही थी।
अब यह है विकल्प
फैसला होने के साथ ही अब चिह्नित जमीन को राज्य सरकार के पक्ष दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जानकार बताते हैं कि पक्षकार मोहम्मद आमीर इस निर्णय के खिलाफ कमिश्नर कोर्ट या राजस्व परिषद के समक्ष अपील कर सकते हैँ।
अपर आयुक्त न्यायिक लखनऊ मंडल के स्थानांतरण पत्र में पारित आदेश का पालन करते हुए 15 जनवरी 2007 को मूल पत्रावली एडीएम प्रशासन की कोर्ट में कलेक्ट्रेट भेज दिया गया। तब से इस मामले की सुनवाई कोर्ट में चल रही थी।
अब यह है विकल्प
फैसला होने के साथ ही अब चिह्नित जमीन को राज्य सरकार के पक्ष दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जानकार बताते हैं कि पक्षकार मोहम्मद आमीर इस निर्णय के खिलाफ कमिश्नर कोर्ट या राजस्व परिषद के समक्ष अपील कर सकते हैँ।