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राज्यपाल बोले - प्रयागराज संग्रहालय में बनेगी ‘आजाद वीथिका’, नागरिकों से मांगा सहयोग
Fri, 01 Mar 2019 12:46 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Fri, 01 Mar 2019 12:46 PM IST
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राज्यपाल रामनाईक
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अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि पर राज्यपाल राम नाईक ने प्रयागराज स्थित संग्रहालय में क्रांतिकारी चंद्रशेखर की स्मृति में ‘आजाद वीथिका’ के निर्माण की घोषणा की है। यह वीथिका 1857 से 1947 तक के स्वाधीनता संग्राम में भाग लेने वाले क्रांतिकारियों को समर्पित होगी। राज्यपाल बुधवार को महानगर स्थित चंद्रशेखर आजाद स्मृति पार्क में आजाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण व श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वीथिका के लिए केंद्रीय संस्कृति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. महेश शर्मा ने दूरभाष पर अपनी सैद्धांतिक सहमति देते हुए प्रथम चरण में 10 करोड़ रुपये देने की बात कही है। राज्यपाल प्रयागराज संग्रहालय के पदेन अध्यक्ष भी हैं।
राज्यपाल ने लोगों से आह्वान किया कि जिनके पास शस्त्र क्रांति करने वाले सेनानियों से जुड़े हुए वारंट, सबूत या दस्तावेज हों, वे उन्हें संग्रहालय को दान करें, जिससे संग्रहालय को प्रमाणिकता एवं भव्यता दी जा सके। नाईक ने कहा कि आजाद में बचपन से ही मातृभूमि को स्वाधीन कराने की धुन थी। इसीलिए जब उन्हें 15 वर्ष की आयु में गिरफ्तार कर न्यायाधीश के सामने पेश किया गया तो उन्होंने माफी मांगने से इन्कार कर दिया। वे मानते थे कि देश की आजादी के लिये सशस्त्र संघर्ष जरूरी है। इसीलिए उन्होंने काकोरी में रेलगाड़ी से सरकारी खजाना लूटा। आजाद ने प्रण किया था कि अंग्रेजों के हाथों नहीं मरना है। उन्होंने प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) में अंग्रेजों से संघर्ष किया पर जब एक ही गोली बची तो उन्होंने उसे अपनी कनपटी पर मार लिया।
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राज्यपाल ने लोगों से आह्वान किया कि जिनके पास शस्त्र क्रांति करने वाले सेनानियों से जुड़े हुए वारंट, सबूत या दस्तावेज हों, वे उन्हें संग्रहालय को दान करें, जिससे संग्रहालय को प्रमाणिकता एवं भव्यता दी जा सके। नाईक ने कहा कि आजाद में बचपन से ही मातृभूमि को स्वाधीन कराने की धुन थी। इसीलिए जब उन्हें 15 वर्ष की आयु में गिरफ्तार कर न्यायाधीश के सामने पेश किया गया तो उन्होंने माफी मांगने से इन्कार कर दिया। वे मानते थे कि देश की आजादी के लिये सशस्त्र संघर्ष जरूरी है। इसीलिए उन्होंने काकोरी में रेलगाड़ी से सरकारी खजाना लूटा। आजाद ने प्रण किया था कि अंग्रेजों के हाथों नहीं मरना है। उन्होंने प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) में अंग्रेजों से संघर्ष किया पर जब एक ही गोली बची तो उन्होंने उसे अपनी कनपटी पर मार लिया।
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