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महिला सहयोगी के यौन उत्पीड़न के आरोपी से छीना अधिष्ठान का काम
Sat, 18 Jul 2020 04:28 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sat, 18 Jul 2020 04:28 PM IST
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महिला सहयोगी का यौन उत्पीड़न करने के आरोपी डीपीओ मोहम्मद जफर खान से सीडीपीओ व मुख्य सेविकाओं के अधिष्ठान का काम छीन लिया गया है। डीपीओ कमलेश गुप्ता अब यह जिम्मेदारी संभालेंगी। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार (आईसीडीएस) निदेशक डॉ. सारिका मोहन पिछले 15-20 वर्षों से निदेशालय में जमे बाबुओं के काकस को तोड़ने के प्रयास में जुटी हैं।
उन्होंने मुख्यालय से संबद्ध डेढ़ दर्जन से अधिक ऐसे डीपीओ व लिपिकों का संबद्धीकरण समाप्त कर उनके मूल तैनाती वाले जिलों में भेज दिया है। मलाईदार पटल पर वर्षों से तैनात बाबुओं और अधिकारियों के कार्य आवंटन में भी भारी फेरबदल किया है। निदेशक ने गत 10 जुलाई को तमाम पटल पर नए अधिकारियों व लिपिकों को नए सिरे से जिम्मेदारी दी थी।
इस दौरान कुछ लोगों ने निदेशक को गलत तथ्य बताकर दागदार अधिकारियों को महत्वपूर्ण पटल दिला दिया था। इनमें डीपीओ मोहम्मद जफर खान को सीडीपीओ व मुख्य सेविकाओं के अधिष्ठान के अलावा निर्माण एवं संरचना पटल का भी प्रभारी बना दिया गया, जबकि जफर कानपुर की एक महिला सीडीपीओ के साथ दुर्व्यवहार व शारीरिक शोषण के आरोपी हैं।
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उन्होंने मुख्यालय से संबद्ध डेढ़ दर्जन से अधिक ऐसे डीपीओ व लिपिकों का संबद्धीकरण समाप्त कर उनके मूल तैनाती वाले जिलों में भेज दिया है। मलाईदार पटल पर वर्षों से तैनात बाबुओं और अधिकारियों के कार्य आवंटन में भी भारी फेरबदल किया है। निदेशक ने गत 10 जुलाई को तमाम पटल पर नए अधिकारियों व लिपिकों को नए सिरे से जिम्मेदारी दी थी।
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इस दौरान कुछ लोगों ने निदेशक को गलत तथ्य बताकर दागदार अधिकारियों को महत्वपूर्ण पटल दिला दिया था। इनमें डीपीओ मोहम्मद जफर खान को सीडीपीओ व मुख्य सेविकाओं के अधिष्ठान के अलावा निर्माण एवं संरचना पटल का भी प्रभारी बना दिया गया, जबकि जफर कानपुर की एक महिला सीडीपीओ के साथ दुर्व्यवहार व शारीरिक शोषण के आरोपी हैं।
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निदेशक कई और ऐसे अधिकारियों के कार्य बंटवारे में कर सकती है बदलाव
इसकी जांच जिला स्तर पर डीएम की निगरानी में विशाखा समिति और शासन के निर्देश पर निदेशालय स्तर पर गठित तीन सदस्यीय समिति कर रही है। इसके बाद ही जफर को कानपुर से हटाकर मुख्यालय से संबद्ध किया गया था। इसी तरह ओएसडी लालमणि को डीपीओ के अधिष्ठान का काम सौंपा गया था, जबकि नियमानुसार कोई अधिकारी अपने से अधिक वेतनमान पाने वाले के अधिष्ठान का काम नहीं देख सकता है।
‘अमर उजाला’ ने 13 जुलाई को ‘महिला कर्मियों के उत्पीड़न का आरोपी डीपीओ ही देखेगा उनका अधिष्ठान’ शीर्षक से कार्य बंटवारे में हुई खामियों का खुलासा किया था। इसका संज्ञान लेते हुए निदेशक ने 15 जुलाई को जफर खान से सीडीपीओ व मुख्य सेविकाओं के अधिष्ठान का काम वापस ले लिया। वहीं, ओएसडी लालमणि को भी डीपीओ के अधिष्ठान पटल से हटा लिया गया। सूत्रों के मुताबिक निदेशक अभी कई और ऐसे अधिकारियों व लिपिकों के कार्य बंटवारे में बदलाव कर कर सकती हैं, जिनके मामले में शिकायतें हैं।
‘अमर उजाला’ ने 13 जुलाई को ‘महिला कर्मियों के उत्पीड़न का आरोपी डीपीओ ही देखेगा उनका अधिष्ठान’ शीर्षक से कार्य बंटवारे में हुई खामियों का खुलासा किया था। इसका संज्ञान लेते हुए निदेशक ने 15 जुलाई को जफर खान से सीडीपीओ व मुख्य सेविकाओं के अधिष्ठान का काम वापस ले लिया। वहीं, ओएसडी लालमणि को भी डीपीओ के अधिष्ठान पटल से हटा लिया गया। सूत्रों के मुताबिक निदेशक अभी कई और ऐसे अधिकारियों व लिपिकों के कार्य बंटवारे में बदलाव कर कर सकती हैं, जिनके मामले में शिकायतें हैं।