टैंपो से छात्रा को फेंकने के मामले में दो पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज
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चलते टैंपो में दुष्कर्म की कोशिश में नाकाम दरिंदों के छात्रा को सड़क पर फेंककर जान लेने के मामले में मड़ियांव थाने के दीवान गंभीर सिंह व सिपाही धर्मपाल को निलंबित किया गया है।
हालांकि यह कार्रवाई केस दर्ज कराने पहुंचे छात्रा के मामा को टरकाने के मामले के बजाय मामले की जानकारी थाना प्रभारी को देने में लापरवाही के चलते की गई है।
एसएसपी दीपक कुमार का कहना है कि परिवारीजनों को थाने से टरकाने की जांच में पाया गया कि मड़ियांव थाने में एसआई राजेश कुमार यादव की शुक्रवार को रात्रि ड्यूटी थी। थाना कार्यालय में कांस्टेबल मो खालिद व हरिकिशोर ड्यूटी पर थे।
उनका दावा है कि टरकाने का आरोप लगाने वाले युवती के मामा ने तीनों को पहचानने से इन्कार किया। इस पर थाने के सीसीटीवी फुटेज चेक किए गए। पता चला कि शनिवार सुबह 6:10 बजे युवती का मामा दो अन्य व्यक्तियों के साथ स्कूटी से मड़ियांव थाने पहुंचे थे।
उन्होंने थाना परिसर में बैठे हेडकांस्टेबल गंभीर सिंह व कांस्टेबल धर्मपाल से सात-आठ मिनट बात की और लौट गए। हेडकांस्टेबल गंभीर सिंह व कांस्टेबल धर्मपाल ने इसकी जानकारी थाना प्रभारी को नहीं दी।
छात्रा के परिवार का बयान बदलवाने पहुंची पुलिस
पुलिस का एक और असंवेदनशील चेहरा सामने आया है। आरोप है कि रविवार रात काकोरी व मड़ियांव पुलिस छात्रा के घर पहुंची और परिवार को पैसों का लालच देने के साथ केस दर्ज करने में टालमटोल का बयान बदलने का दबाव बनाया।
छात्रा की बहन ने अमर उजाला को कॉल करके बताया कि इंस्पेक्टर व एसओ ने आर्थिक मदद की बात कहने के साथ उसके मामा पर बयान बदलने का दबाव बनाया। इन्कार पर पुलिसकर्मियों ने जेल भेजने की धमकी दी।
परिवारीजनों को थाने ले जाने की कोशिश करने लगे। चीखपुकार पर आसपास के लोग एकत्र हो गए। इलाके में रहने वाले मीडियाकर्मियों के पहुंचने पर पुलिसकर्मी फरार आरोपियों की सरगर्मी से तलाश की बात कहकर चलते बने।