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Gorakhpur News: गोरखपुर जेल में अब और मजबूत होगी वीडियो कांफ्रेंसिंग से पेशी
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गोरखपुर। जिला कारागार में रोजाना औसतन 70 से 80 बंदियों की वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये पेशी होती है। इनमें अधिकांश नए बंदियों का रिमांड वीडियो कांफ्रेंसिंग से कराया जाता है, जबकि ट्रायल वाले बंदियों को सामान्य तौर पर अदालत में पेश किया जाता है। अब इस पूरी प्रक्रिया को और व्यवस्थित व आधुनिक बनाने की तैयारी है। शासन ने गोरखपुर समेत प्रदेश की 74 कारागारों में वीडियो कांफ्रेंसिंग व्यवस्था मजबूत करने के लिए 109 कंप्यूटर समेत जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने की मंजूरी दी है। इसके लिए 2.72 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
वित्तीय वर्ष 2026-27 की इस योजना के तहत गोरखपुर जिला कारागार में वीडियो कांफ्रेंसिंग के लिए कंप्यूटर-यूपीएस, प्रिंटर, स्कैनर, वेबकैम, स्पीकर और हेडफोन विद माइक उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के लिए क्यूबिकल भी बनाया जाएगा। इससे अदालत और जेल के बीच वीडियो व ऑडियो संपर्क को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।
1,506 बंदियों में 85 महिलाएं
वर्तमान में गोरखपुर जिला कारागार में कुल 1,506 बंदी निरुद्ध हैं। इनमें 85 महिलाएं हैं। बंदियों की इतनी संख्या के बीच रोजाना बड़ी संख्या में वीडियो कांफ्रेंसिंग से होने वाली पेशी को देखते हुए तकनीकी संसाधनों को बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही थी। नई व्यवस्था से जेल की न्यायिक कार्यप्रणाली को अधिक सुचारू बनाने में मदद मिलेगी।
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कम होगी जेल से अदालत तक आवाजाही
वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये रिमांड और अन्य न्यायिक कार्यवाही होने से बंदियों को हर बार पुलिस सुरक्षा में अदालत ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती। जेल परिसर से ही अदालत के समक्ष उनकी पेशी कराई जा सकती है। इससे बंदियों की आवाजाही के साथ सुरक्षा में लगने वाले संसाधनों और समय की भी बचत होती है। खासतौर पर रोजाना बड़ी संख्या में होने वाली रिमांड की कार्रवाई में इसका सीधा लाभ मिलेगा।
एक क्यूबिकल में मिलेंगी सभी सुविधाएं
नई व्यवस्था में वीडियो कांफ्रेंसिंग के लिए निर्धारित क्यूबिकल में कंप्यूटर के साथ यूपीएस, वेबकैम, स्पीकर और हेडफोन विद माइक उपलब्ध होंगे। प्रिंटर और स्कैनर की सुविधा भी रहेगी। इससे न्यायिक कार्यवाही के दौरान जरूरी दस्तावेजों को प्रिंट और स्कैन करने का काम भी जेल परिसर में ही किया जा सकेगा। तकनीकी संसाधन बढ़ने से जेल प्रशासन के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये होने वाली पेशी का संचालन अधिक व्यवस्थित ढंग से करना आसान होगा।
बोले अधिकारी
हाल ही में किसी विशेष उपकरण की मांग नहीं की गई थी। जरूरत और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार समय-समय पर मांग की जाती रही है। शासन से फंड जारी होने और नई सुविधाएं मिलने से वीडियो कांफ्रेंसिंग व्यवस्था मजबूत होगी और कारागार की कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
- डीके पांडेय, जेल अधीक्षक गोरखपुर
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वित्तीय वर्ष 2026-27 की इस योजना के तहत गोरखपुर जिला कारागार में वीडियो कांफ्रेंसिंग के लिए कंप्यूटर-यूपीएस, प्रिंटर, स्कैनर, वेबकैम, स्पीकर और हेडफोन विद माइक उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के लिए क्यूबिकल भी बनाया जाएगा। इससे अदालत और जेल के बीच वीडियो व ऑडियो संपर्क को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।
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1,506 बंदियों में 85 महिलाएं
वर्तमान में गोरखपुर जिला कारागार में कुल 1,506 बंदी निरुद्ध हैं। इनमें 85 महिलाएं हैं। बंदियों की इतनी संख्या के बीच रोजाना बड़ी संख्या में वीडियो कांफ्रेंसिंग से होने वाली पेशी को देखते हुए तकनीकी संसाधनों को बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही थी। नई व्यवस्था से जेल की न्यायिक कार्यप्रणाली को अधिक सुचारू बनाने में मदद मिलेगी।
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कम होगी जेल से अदालत तक आवाजाही
वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये रिमांड और अन्य न्यायिक कार्यवाही होने से बंदियों को हर बार पुलिस सुरक्षा में अदालत ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती। जेल परिसर से ही अदालत के समक्ष उनकी पेशी कराई जा सकती है। इससे बंदियों की आवाजाही के साथ सुरक्षा में लगने वाले संसाधनों और समय की भी बचत होती है। खासतौर पर रोजाना बड़ी संख्या में होने वाली रिमांड की कार्रवाई में इसका सीधा लाभ मिलेगा।
एक क्यूबिकल में मिलेंगी सभी सुविधाएं
नई व्यवस्था में वीडियो कांफ्रेंसिंग के लिए निर्धारित क्यूबिकल में कंप्यूटर के साथ यूपीएस, वेबकैम, स्पीकर और हेडफोन विद माइक उपलब्ध होंगे। प्रिंटर और स्कैनर की सुविधा भी रहेगी। इससे न्यायिक कार्यवाही के दौरान जरूरी दस्तावेजों को प्रिंट और स्कैन करने का काम भी जेल परिसर में ही किया जा सकेगा। तकनीकी संसाधन बढ़ने से जेल प्रशासन के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये होने वाली पेशी का संचालन अधिक व्यवस्थित ढंग से करना आसान होगा।
बोले अधिकारी
हाल ही में किसी विशेष उपकरण की मांग नहीं की गई थी। जरूरत और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार समय-समय पर मांग की जाती रही है। शासन से फंड जारी होने और नई सुविधाएं मिलने से वीडियो कांफ्रेंसिंग व्यवस्था मजबूत होगी और कारागार की कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
- डीके पांडेय, जेल अधीक्षक गोरखपुर