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Lucknow News: थियेटर के अस्तित्व की पड़ताल करती एक्टिंग एंड बियोंड
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पुस्तक का विमोचन करते लोग।
लखनऊ। तकनीक और डिजिटल मनोरंजन के इस दौर में थियेटर कहां खड़ा है। क्या अभिनय सिर्फ प्रदर्शन रह गया है या आज भी आत्म-अभिव्यक्ति का माध्यम है। इन्हीं सवालों के इर्द-गिर्द घूमती है प्रख्यात रंगकर्मी और नाट्य निर्देशक प्रसन्ना की नई अंग्रेजी पुस्तक एक्टिंग एंड बियोंड जिसका विमोचन सोमवार को इप्टा की ओर से यूपी प्रेस क्लब में किया गया।
पुस्तक का विमोचन इप्टा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष राकेश वेदा, किरण राज बिसारिया, स्वयं लेखक प्रसन्ना, वरिष्ठ रंगकर्मी व इप्टा के प्रांतीय महासचिव शहजाद रिजवी, और वरिष्ठ आलोचक वीरेंद्र यादव ने किया। पुस्तक पर चर्चा करते हुए प्रसन्ना ने कहा, रंगमंच संवाद और मानवीय अभिव्यक्ति का माध्यम है, जबकि डिजिटल मनोरंजन तेजी से इसे एक उत्पाद में बदल रहा है।
हम कलाकारों को एक तरह का बंधुआ मजदूर बना दिया गया है। भले ही, हमें अच्छा वेतन मिले। वरिष्ठ रंग निर्देशक सूर्य मोहन कुलश्रेष्ठ ने कहा, वर्तमान समय में थिएटर को पुनर्जीवित करने और इसकी मूल आत्मा को बचाने के लिए इस पुस्तक जैसी गहन पड़ताल आवश्यक है। कार्यक्रम का संचालन दीपक कबीर ने किया। इस दौरान वरिष्ठ कवि एवं आलोचक कौशल किशोर, मशहूर कथाकार शैलेंद्र सागर, डा. आवंतिका समेत अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
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पुस्तक का विमोचन इप्टा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष राकेश वेदा, किरण राज बिसारिया, स्वयं लेखक प्रसन्ना, वरिष्ठ रंगकर्मी व इप्टा के प्रांतीय महासचिव शहजाद रिजवी, और वरिष्ठ आलोचक वीरेंद्र यादव ने किया। पुस्तक पर चर्चा करते हुए प्रसन्ना ने कहा, रंगमंच संवाद और मानवीय अभिव्यक्ति का माध्यम है, जबकि डिजिटल मनोरंजन तेजी से इसे एक उत्पाद में बदल रहा है।
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हम कलाकारों को एक तरह का बंधुआ मजदूर बना दिया गया है। भले ही, हमें अच्छा वेतन मिले। वरिष्ठ रंग निर्देशक सूर्य मोहन कुलश्रेष्ठ ने कहा, वर्तमान समय में थिएटर को पुनर्जीवित करने और इसकी मूल आत्मा को बचाने के लिए इस पुस्तक जैसी गहन पड़ताल आवश्यक है। कार्यक्रम का संचालन दीपक कबीर ने किया। इस दौरान वरिष्ठ कवि एवं आलोचक कौशल किशोर, मशहूर कथाकार शैलेंद्र सागर, डा. आवंतिका समेत अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
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