{"_id":"5f91e6dd8ebc3e9be55bb771","slug":"acp-is-not-familiar-with-law-court-lucknow-news-lko546647662","type":"story","status":"publish","title_hn":"एसीपी को नहीं कानून की जानकारी ः कोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एसीपी को नहीं कानून की जानकारी ः कोर्ट
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नाबालिग से छेड़छाड़ और पॉक्सो एक्ट जैसे मामले में आशियाना पुलिस ने कानून को दरकिनार करते हुए समझौते के आधार पर समाप्त करते हुए फाइनल रिपोर्ट बनाकर कोर्ट को भेज दी। इस संबंध में सख्त नाराजगी जताते हुए पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश अरविंद मिश्र ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि या तो मामले के विवेचक और कैंट के तत्कालीन सहायक पुलिस आयुक्त को कानून का ज्ञान नहीं है या फिर उनके मन में कानून प्रति उचित सम्मान नहीं है। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करके कोर्ट को अवगत कराने का निर्देश पुलिस कमिश्नर को दिया है।
कोर्ट ने विवेचक और एसीपी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कमिश्नर को पत्र लिखकर कहा है कि विवेचक ने नाबालिग से छेड़छाड़, मारपीट और पॉक्सो एक्ट के मामले में पीड़िता का कलमबंद बयान दर्ज कराए बिना ही मात्र सुलह समझौते की फाइनल रिपोर्ट लगा दी। तत्कालीन एसीपी कैंट ने भी इस बात पर ध्यान दिए बिना और गलतियों को सुधारें बिना फाइनल रिपोर्ट को कोर्ट में भेज दिया। कोर्ट ने पत्र में कहा है कि विवेचना के साथ ही पर्यवेक्षण का कार्य भी बहुत महत्वपूर्ण होता है और पर्यवेक्षकीय अधिकारी का दायित्व होता है कि विवेचक द्वारा की गई गलतियों को सुधारने के बाद ही रिपोर्ट को कोर्ट में भेजे।
कोर्ट ने आगे आदेश में कहा कि ऐसे मामले में कोर्ट को भी सुलह समझौते के आधार मुकदमा खत्म करने का अधिकार नहीं है। वहीं पुलिस भी ऐसे मामलों में सुलह के आधार पर विवेचना खत्म नहीं कर सकती। जबकि ऐसी स्थिति में पीड़िता का बिना कलमबंद बयान दर्ज कराए सुलह के आधार पर फाइनल रिपोर्ट कोर्ट को भेजना यह साबित करता है कि विवेचक और एसीपी को या तो कानून की जानकारी नहीं है या उनके मन में कानून के लिए सम्मान नहीं है ।
विज्ञापन
पत्रावली के अनुसार, वादी ने आशियाना थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 15 मार्च 2019 को उसकी 10 वर्षीय पुत्री दुकान से सामान ले गई थी जहां रास्ते मे गुरुप्रसाद के लेबर ने पुत्री को छेड़ा। नाबालिग किसी तरह भागकर घर आई और सारी बात बताई। इस पर जब वादी मौके पर गया तो गुरुप्रसाद ने मारना शुरू कर दिया। इस मामले में विवेचक ने पीड़िता के कलमबंद बयान दर्ज नहीं कराए बल्कि मामले में सुलह के आधार पर फाइनल रिपोर्ट लगाकर कोर्ट को भेज दी।
विज्ञापन
कोर्ट ने विवेचक और एसीपी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कमिश्नर को पत्र लिखकर कहा है कि विवेचक ने नाबालिग से छेड़छाड़, मारपीट और पॉक्सो एक्ट के मामले में पीड़िता का कलमबंद बयान दर्ज कराए बिना ही मात्र सुलह समझौते की फाइनल रिपोर्ट लगा दी। तत्कालीन एसीपी कैंट ने भी इस बात पर ध्यान दिए बिना और गलतियों को सुधारें बिना फाइनल रिपोर्ट को कोर्ट में भेज दिया। कोर्ट ने पत्र में कहा है कि विवेचना के साथ ही पर्यवेक्षण का कार्य भी बहुत महत्वपूर्ण होता है और पर्यवेक्षकीय अधिकारी का दायित्व होता है कि विवेचक द्वारा की गई गलतियों को सुधारने के बाद ही रिपोर्ट को कोर्ट में भेजे।
विज्ञापन
कोर्ट ने आगे आदेश में कहा कि ऐसे मामले में कोर्ट को भी सुलह समझौते के आधार मुकदमा खत्म करने का अधिकार नहीं है। वहीं पुलिस भी ऐसे मामलों में सुलह के आधार पर विवेचना खत्म नहीं कर सकती। जबकि ऐसी स्थिति में पीड़िता का बिना कलमबंद बयान दर्ज कराए सुलह के आधार पर फाइनल रिपोर्ट कोर्ट को भेजना यह साबित करता है कि विवेचक और एसीपी को या तो कानून की जानकारी नहीं है या उनके मन में कानून के लिए सम्मान नहीं है ।
विज्ञापन
पत्रावली के अनुसार, वादी ने आशियाना थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 15 मार्च 2019 को उसकी 10 वर्षीय पुत्री दुकान से सामान ले गई थी जहां रास्ते मे गुरुप्रसाद के लेबर ने पुत्री को छेड़ा। नाबालिग किसी तरह भागकर घर आई और सारी बात बताई। इस पर जब वादी मौके पर गया तो गुरुप्रसाद ने मारना शुरू कर दिया। इस मामले में विवेचक ने पीड़िता के कलमबंद बयान दर्ज नहीं कराए बल्कि मामले में सुलह के आधार पर फाइनल रिपोर्ट लगाकर कोर्ट को भेज दी।