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पैर की हड्डी से बनाया जबड़े का हिस्सा, सर्जरी में लगे सात घंटे

Fri, 23 Sep 2016 12:54 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Fri, 23 Sep 2016 12:54 PM IST
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achievement of plastic surgery department doctors in kgmu
आॅपरेशन से पहले ‌‌ल‌िया गया जबड़े का एक्स-रे - फोटो : amar ujala

केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग की टीम ने पैर की हड्डी से एक युवक का जबड़ा बनाकर, उसके चेहरे को विकृत होने से बचा लिया। ट्यूमर के कारण उसके जबड़े का निचला हिस्सा खराब हो गया था।

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सर्जरी में लगभग सात घंटे लगे। कानपुर देहात निवासी 30 साल के संजय के जबड़े में दाहिनी तरफ नीचे के हिस्से (मेंडिबल) में गांठ बन रही थी। वह केजीएमयू पहुंचे तो पता चला कि जबड़े में ट्यूमर (ओडोंटोजेनिक मिक्सोफाइब्रोमा) है। 
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प्लास्टिक सर्जन प्रो. विजय कुमार ने बताया कि सात घंटे तक चले ऑपरेशन के दौरान पहले उसके ट्यूमर को काटकर बाहर निकाला गया। इसके बाद जबड़े को सही आकार देने के लिए पैर की फिबुला हड्डी से एक टुकड़ा लेकर जबड़े में लगाया गया। 
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इस हड्डी को ऐसे फिक्स किया गया कि जबड़े को सही आकार मिल जाए और चेहरे में विकृति का पता न लगे। इस सर्जरी में केजीएमयू में पहली बार डबल बैरल तकनीक का इस्तेमाल किया गया। जिससे आकार सही आए और बाद में उसमें दांत भी लगाए जा सकें। 

पहली बार किया डबल बैरल तकनीक का इस्तेमाल

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प्रो. विजय कुमार - फोटो : amar ujala

प्रो. विजय कुमार ने बताया कि पैर की हड्डी के साथ ही वहां की मांसपेशियों और त्वचा को भी निकाला गया था। जिसे चिकित्सीय भाषा में ऑस्टियोफेसियोक्यूटेनियस कहा जाता है। इससे जबड़े को सही आकार मिलने में आसानी हो सकेगी। 

इसके अलावा हड्डी को जीवित रखने के लिए उसे गले की खून ले जाने वाली आर्टरी और वेन से जोड़ा गया। इससे हड्डी आसानी से अपनी जगह पर जुड़ जाएगी।

पहले फिबुला से लिए गये एक ही टुकड़े को जबड़े (मेंडिबल) में जोड़ा जाता था। जिससे वहां गैप बना रह जाता था और चेहरा विकृत नजर आता था। यही नहीं हड्डी की चौड़ाई कम होने से उसमें दांत भी नहीं लगाए जा सकते थे। डबल बैरल तकनीक में हड्डी को काटकर दोहरा आकार दिया गया। 

सर्जरी करने वाली टीम
प्रो. विजय कुमार, प्लास्टिक सर्जन
डॉ. यूएस पाल, मैक्सिलोफेशियल सर्जन
डॉ. गीता सिंह, मैक्सिलोफेशियल सर्जन
डॉ. गुरु, प्लास्टिक सर्जन
डॉ. गौरव, प्लास्टिक सर्जन
डॉ. शेफाली, एनेस्थेटिस्ट

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