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केजीएमयू के चिकित्सा विशेषज्ञों की उपलब्धि : रेबीज पीड़ित की जान बचाने में मिली कामयाबी, आईसीएमआर को दी गई जानकारी

Thu, 25 Nov 2021 04:24 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 25 Nov 2021 04:24 AM IST
सार

केजीएमयू में प्रदेश में हर माह रेबीज के तीन से पांच मरीज आते हैं। यह पहला मामला है जब किसी मरीज की जान बचाई जा सकी। इस उपलब्धि से रेबीज के मरीजों के इलाज की उम्मीद जगी है।

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Achievement of medical experts of KGMU: Success in saving life of rabies victim, information given to ICMR
kgmu

विस्तार

केजीएमयू के चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम ने जानलेवा रेबीज से पीड़ित युवती की जान बचाने में कामयाबी हासिल की है। यह केजीएमयू में प्रदेश में हर माह रेबीज के तीन से पांच मरीज आते हैं। यह पहला मामला है जब किसी मरीज की जान बचाई जा सकी। इस उपलब्धि से रेबीज के मरीजों के इलाज की उम्मीद जगी है। इलाज से स्वस्थ हुई युवती को दी गई दवाइयों और बरती गई सावधानियों पर टीम ने रिपोर्ट तैयार की है। इससे रेबीज के मरीजों के इलाज के लिए नए सिरे से प्रोटोकॉल तैयार किया जाएगा। इस संबंध में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च को भी सूचना दी गई है।

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कुत्ता के काटने के बाद 25 वर्षीय युवती को वैक्सीन लगवाई गई थी। फिर भी उसमें रेबीज की चपेट में आ गई। कई अस्पतालों में इलाज के बाद भी कोई आराम नहीं मिला तो दो माह पहले उसे केजीएमयू में भर्ती कराया गया। यहां उसे आईसीयू में वेंटिलेटर पर भर्ती किया गया। उसे बेहोशी की दवाएं दी र्गइं। एमआरआई जांच में मस्तिष्क को सूचनाएं आदान-प्रदान करने वाले न्यूरॉन्स आपस में सिमटते नजर आए। ऐसे में टीम गठित कर मरीज को न्यूरोलॉजिकल डिस्आर्डर से जुड़ी दवाएं शुरू की गईं। इन दवाइयों में भी कई प्रयोग किए गए। केजीएमयू के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डी हिमांशु बताते हैं कि मरीज के लक्षणों के आधार पर विभिन्न दवाइयों का चुनाव किया गया।
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बेहोशी की दवाइयां धीरे-धीरे कम की गईं
वेंटिलेंटर पर पहुंची मरीज की धीरे-धीरे बेहोशी की दवाएं कम की गईं और दूसरी दवाइयों की डोज बढ़ाई गई। हर सप्ताह एमआरआई कराकर मरीज के मस्तिष्क में क्या बदलाव हो रहे हैं इसको जांचा गया। करीब 20 दिन बाद मरीज की हालत सुधरने लगी। अब मरीज पूरी तरह से ठीक है। डिस्चार्ज होने के बाद फॉलोअप में भी आ चुकी है। इलाज करने वाली टीम में डॉ. डी हिमांशु के साथ न्यूरोलॉजी विभाग के डॉ. नीरज कुमार, डॉ. अंबुज, डॉ. अमिता और डॉ. नवीन शामिल थे।
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क्या हैं प्रमुख लक्षण
बुखार, मितली, सिरदर्द, झटके आना, पक्षाघात होना, सांस में रुकावट, रीढ़ की हड्डी में संक्रमण होना आदि प्रमुख लक्षण है।

क्या बरतें सावधानी
घाव को गुनगुने पानी से धोएं, उसे पट्टी से ढंके नहीं, वैक्सीन लगवाएं और जानवर की 10 दिन तक निगरानी रखें।

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