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डॉक्टरों ने रॉड व स्क्रू से सीधी की रीढ़ की हड्डी, फ्री हुआ इलाज, प्राइवेट में आता लाखों खर्च
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 04 Oct 2018 04:52 PM IST
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एक्सरे रिपोर्ट, सर्जरी के बाद खड़ी होने लगी किशोरी
- फोटो : amar ujala
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डॉ. राममनोहर लोहिया संस्थान के न्यूरो सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने स्क्रू और रॉड से किशोरी की रीढ़ की हड्डी को ठीक किया है। अब वह सीधी होकर चल सकेगी। इस ऑपरेशन में 16 स्क्रू लगाए गए हैं। लोहिया संस्थान में इस तरह की यह दूसरी सर्जरी है।
किशोरी का आपरेशन मुख्यमंत्री राहत कोष से किया गया है। न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. राकेश कुमार सिंह ने बताया कि बाराबंकी निवासी शुभी सिंह (13) की रीढ़ की हड्डी लचक गई थी। वह करीब दो साल से टेढ़ी होकर चल रही थी।
जांच के दौरान पता चला कि इसकी रीढ़ में दिक्कत है। इसे ठीक करने की योजना बनाई गई। रीढ़ की हड्डी के लिए करीब तीन लाख का स्टीमेट बनाया गया। शुभी के परिवार के लिए इतना खर्च उठाना संभव नहीं था। ऐसे में मुख्यमंत्री राहत कोष से मदद मांगी गई।
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हालांकि प्राइवेट में इस सर्जरी के लिए 25 लाख रुपये तक चुकाने पड़ते हैं। मदद मिलने के बाद 14 सितंबर को करीब छह घंटे की सर्जरी की गई। इसमें 16 पेडिकल स्क्रू और रॉड लगाए गए। 26 सितंबर को मरीज की स्थिति ठीक होने पर उसे घर भेज दिया गया है।
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किशोरी का आपरेशन मुख्यमंत्री राहत कोष से किया गया है। न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. राकेश कुमार सिंह ने बताया कि बाराबंकी निवासी शुभी सिंह (13) की रीढ़ की हड्डी लचक गई थी। वह करीब दो साल से टेढ़ी होकर चल रही थी।
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जांच के दौरान पता चला कि इसकी रीढ़ में दिक्कत है। इसे ठीक करने की योजना बनाई गई। रीढ़ की हड्डी के लिए करीब तीन लाख का स्टीमेट बनाया गया। शुभी के परिवार के लिए इतना खर्च उठाना संभव नहीं था। ऐसे में मुख्यमंत्री राहत कोष से मदद मांगी गई।
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हालांकि प्राइवेट में इस सर्जरी के लिए 25 लाख रुपये तक चुकाने पड़ते हैं। मदद मिलने के बाद 14 सितंबर को करीब छह घंटे की सर्जरी की गई। इसमें 16 पेडिकल स्क्रू और रॉड लगाए गए। 26 सितंबर को मरीज की स्थिति ठीक होने पर उसे घर भेज दिया गया है।
ये डॉक्टर थे टीम में
सर्जरी करने वाले डॉ राकेश के साथ डॉ दीपक
- फोटो : amar ujala
अब फॉलोअप के लिए बुलाया जाएगा। ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. राकेश कुमार के साथ डॉ. दीपक सिंह, डॉ. सुरेंद्र गुप्ता, एनेस्थीसिया से निदेशक डॉ. दीपक मालवीय, डॉ. मनोज गिरी, डॉ. सूरज, सिस्टर नरेंद्र और वंदना शामिल रहीं।
प्राइवेट में 25 लाख रुपये आता खर्च लोहिया संस्थान में फ्री हुआ इलाज
- 06 घंटे चली सर्जरी
- 12 दिन बाद मरीज डिस्चार्ज
- 03 लाख रुपये था इलाज का एस्टीमेट, मुख्यमंत्री राहत कोष से निःशुल्क हुई सर्जरी
- 25 लाख रूपये आता प्राइवेट में खर्च
प्राइवेट में 25 लाख रुपये आता खर्च लोहिया संस्थान में फ्री हुआ इलाज
- 06 घंटे चली सर्जरी
- 12 दिन बाद मरीज डिस्चार्ज
- 03 लाख रुपये था इलाज का एस्टीमेट, मुख्यमंत्री राहत कोष से निःशुल्क हुई सर्जरी
- 25 लाख रूपये आता प्राइवेट में खर्च