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भाजपा के मिशन-2017 को परवान चढ़ाएगी ABVP की 'युवा फौज'

Mon, 31 Oct 2016 04:41 PM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 31 Oct 2016 04:41 PM IST
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ABVP to help BJP for 2017 election.
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह - फोटो : amar ujala

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, पूर्व अध्यक्ष व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री नितिन गडकरी, केंद्र में राज्यमंत्री महेंद्र नाथ पांडेय और भाजपा के प्रदेश महामंत्री (संगठन) सुनील बंसल ...।

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इन नेताओं जैसे न जाने कितने ऐसे चेहरे हैं जो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से आकर भाजपा संगठन और सरकार में अहम रोल निभा रहे हैं। चुनावों में भाजपा के लिए विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं की भूमिका भी किसी से छिपी नहीं है।
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2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐतिहासिक नामांकन में जिस जनसमूह को अभी भी दिखाया जाता है, उसमें पर्दे के पीछे आरएसएस के इसी आनुषांगिक संगठन की सबसे अहम भूमिका मानी जाती है।
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अब 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले इस संगठन ने फिर कमर कस ली है। 23 नवंबर को लखनऊ के काल्विन ताल्लुकेदार्स कॉलेज ग्राउंड में ‘छात्र हुंकार रैली’ के जरिए परिषद मिशन-2017 का आगाज कर देगी। इसमें एक लाख से ज्यादा युवाओं को आमंत्रित किया गया है। नारा दिया गया है, ‘आप हमें समर्थन दें-हम आपको परिवर्तन देंगे।’

26 नवंबर के बाद कभी चुनाव की तारीखों का ऐलान

ABVP to help BJP for 2017 election.

जानकार बताते हैं कि छात्र हुंकार रैली के नाम पर यह कार्यक्रम बहुत सोच समझकर 23 नवंबर के लिए तय किया गया है। दरअसल, इसके तीन दिन बाद 26 नवंबर से अखिलेश सरकार के सिर्फ छह महीने ही बचेंगे। इस दिन के बाद केंद्रीय निर्वाचन आयोग जब चाहे, जिस तारीख में चाहे, सूबे में आम चुनाव का एलान कर सकता है।

विधानसभा चुनाव के ठीक पहले का यह कार्यक्रम वास्तव में युवाओं को सत्ता परिवर्तन के लिए तैयार करने की मुहिम का अहम हिस्सा है। परिषद ने युवाओं को जोड़ने के लिए उन मुद्दों को ही इस रैली में उठाने की योजना बनाई है, जिससे युवा कॉलेज-विश्वविद्यालय में रोज दो-चार होते हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि 2012 के विधानसभा चुनाव में युवा अखिलेश ने युवाओं को अपने साथ जोड़ने में बड़ी कामयाबी हासिल की थी और 2014 में मोदी युवाओं की ताकत बखानते-बखानते प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गए।

2017 के विधानसभा चुनाव में युवाओं की फिर सबसे अहम भूमिका रहने वाली है। दूसरे दल, इस ओर सोच पाएं, भाजपा ने उससे पहले ही युवाओं को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर ठोस काम शुरू कर दिया है। भाजपा ने विधानसभावार युवा कार्यकर्ताओं की भूमिका बढ़ाई है।

परिषद ने मुलायम शासनकाल में की थी ऐसी ही रैली

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मुलायम ‌सिंह यादव - फोटो : amar ujala

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने इसके पहले लखनऊ में इस तरह की रैली 1994 में की थी। उस समय सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। अब अखिलेश यादव की सरकार में परिषद ने रैली का एलान किया है।

एजेंडे में सपा के अधूरे वादे तो संघ का एजेंडा भी
राज्य लोक सेवा आयोग की चयन प्रक्रिया में धांधलियों का मामला हो या अन्य चयन आयोगों में अनियमितताओं की बात, विद्यार्थी परिषद ने कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में छात्रों की आवाज उठाकर तेजी से अपनी पकड़ बढ़ाई है।

रैली के एजेंडे में चयन आयोगों में धांधली की बात जरूर शामिल नहीं है, लेकिन इसे प्रमुखता से उठाए जाने की पूरी तैयारी है। इस रैली में महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों में समय से छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग भी होगी।

सपा अपने घोषणापत्र में एलान व शासनादेश जारी करने के बावजूद उच्च शिक्षण संस्थानों में नियमित छात्रसंघ चुनाव नहीं करा सकी है।

दूसरे दलों में युवाओं की भूमिका, बसपा संगठन में बढ़ा रही भागीदारी

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बसपा ने पहली बार अपने संगठन में युवाओं को 50 फीसदी भागीदारी देने की योजना बनाई है। बूथ से लेकर जिले तक इस पर अमल किया जा रहा है। बसपा नेतृत्व लगातार इसकी समीक्षा भी कर रहा है।

पर, पार्टी के पास युवाओं को अलग से प्रोत्साहित करने के लिए कोई युवा चेहरा आगे नहीं बढ़ाया गया है। संगठन की कमान अभी भी ज्यादातर पुराने कार्यकर्ताओं के हाथों में है।

सपा: अखिलेश की पूरी युवा टीम ही सपा से बाहर
समाजवादी पार्टी में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव युवाओं को आकर्षित करने में सफल रहे हैं। उन्होंने युवाओं को केंद्रित कर कई योजनाएं शुरू कीं। पर, अगले चुनाव के लिए उन्हें चुनावी चेहरा बनाने को लेकर सपा में घमासान मचा हुआ है।

सपा मुखिया तक कह चुके हैं कि सीएम कौन होगा, यह बहुमत मिलने के बाद तय होगा। इसके अलावा अखिलेश की पूरी युवा टीम ही समाजवादी पार्टी से बर्खास्त हो चुकी है। हालांकि अखिलेश अपनी युवा टीम को साथ लेकर अकेले ही आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं।

बेस वोट के चक्कर में युवाओं को भूली कांग्रेस

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राहुल गांधी - फोटो : demo pic

27 साल से सत्ता से दूर रहने वाली कांग्रेस की इस समय हालत यह है कि उसके पास कोई बेस वोटर नहीं हैं। बेस वोट के लिए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पहले किसान यात्रा निकाली। दलित सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। अतिपिछड़ों को रिझाने के लिए भी कई कार्यक्रम होने हैं। कांग्रेस पूरी कोशिश सूबे में बेस वोट बनाने पर लगी हुई है। इन सबके चक्कर में कांग्रेस युवाओं को भूल गई है।

कैंपसों में कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई की भी हालत पतली है। हालांकि प्रदेश कांग्रेस कम्युनिकेशन विभाग के वाइस चेयरमैन वीरेंद्र मदान कहते हैं कि कांग्रेस हमेशा से युवाओं को तरजीह देती आ रही है। राहुल की किसान यात्रा की अधिकतर जिम्मेदारियां युवाओं को सौंपी गई थीं। इस बार भी काफी संख्या में युवाओं को टिकट दिए जाएंगे।

एबीवीपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य घनश्याम शाही का कहना है,‘यह रैली किसी के खिलाफ नहीं है। विद्यार्थी परिषद ने छात्र समस्याओं को लेकर तब भी रैली की थी जब दिल्ली में प्रधानमंत्री अटल विहारी बाजपेई की सरकार थी। परिषद की इस रैली का मकसद साफ है कि राजनीतिक दल चुनाव मैदान में आएं तो छात्रों, युवाओं के मुददों को भी अपने घोषणापत्र में शामिल करें। इस रैली का जो एजेंडा तय किया गया है, उसे अपने एजेंडे में स्थान दें।’

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