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Lucknow News: डेढ़ वर्ष पहले मिला था नशीले कफ सिरप के सौदागरों का सुराग

Sat, 29 Nov 2025 02:39 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Updated Sat, 29 Nov 2025 02:39 AM IST
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A year and a half ago, a clue was found about the dealers of narcotic cough syrup
अमित सिंह टाटा।
लखनऊ। मुनाफे के लिए बच्चों की जान से खेल रहे नशीले कफ सिरफ के सौदागरों के बारे में डेढ़ वर्ष पहले एसटीएफ को सुराग मिला था। एसटीएफ ने अप्रैल 2024 में छापा मारकर 52 पैकेट अवैध कोडिनयुक्त फेन्सेडिल कफ सिरप बरामद किया था। इस मामले में सुशांत गोल्फ सिटी थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। एसटीएफ की छानबीन में अमित सिंह टाटा का नाम सामने आया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
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एसटीएफ को सबसे पहले फेन्सेडिल कफ सिरप को नशे के रूप में इस्तेमाल करने के लिए अवैध भंडारण की सूचना मिली थी। छानबीन में पता चला था कि बिहार, झारखंड, असम, पश्चिम बंगाल व बांग्लादेश तक सिरप की तस्करी की जा रही है। फरवरी 2024 में एसटीएफ और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की संयुक्त जांच समिति का गठन किया गया था। इसी बीच एसटीएफ को तस्करी की सूचना मिली थी, जिसके बाद एक ट्रक चालक को बड़ी मात्रा में सिरप के साथ पकड़ा गया था। पूछताछ में आरोपी चालक धर्मेंद्र कुमार ने चौंकाने वाला खुलासा किया था।
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आरोपी ने बताया था कि वह कफ सिरप लेकर कूचबिहार पश्चिम बंगाल जा रहा था। इसके लिए उसे 30 हजार रुपये मिलने थे। जांच में सामने आया था कि फेन्सेडिल कफ सिरप का निर्माण हिमाचल प्रदेश के बद्दी स्थित एबॉट हेल्थकेयर प्रा.लि. कंपनी ने किया है।
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ट्रांसपोर्ट नगर में लोड करते थे सिरप

छानबीन में पता चला था कि ट्रांसपोर्टनगर में सिरप लोड किया जाता था। कई बार वहां से सिरप पश्चिम बंगाल भेजा गया था। लखनऊ में गिरोह का संचालन आगरा निवासी रॉबिन करता था। रॉबिन के कहने पर ही धर्मेंद्र ट्रांसपोर्टनगर से सिरप अलग-अलग राज्यों में ले जाता था। गिरोह वाट्सएप कॉल पर ही आपस में बात करता था। सीडीआर और अलग-अलग फर्म की पड़ताल में एसटीएफ को पूर्वांचल कनेक्शन का पता चला। इसके बाद अमित सिंह टाटा की संलिप्तता सामने आई। अमित के कई करीबी एसटीएफ की रडार पर हैं। माना जा रहा है कि अभी कुछ और लोगों को एसटीएफ गिरफ्तार करेगी।

बर्खास्त सिपाही के घर पर छिपा था अमित
पूर्व सांसद बाहुबली धनंजय सिंह का करीबी अमित एक बर्खास्त सिपाही के घर पर छिपा था। बर्खास्त सिपाही भी धनंजय सिंह का करीबी है। सूत्रों का कहना है कि एसटीएफ ने जब दबिश दी तो बर्खास्त सिपाही ने इसका विरोध किया। यही नहीं, अधिकारियों से उसकी बहस भी हुई। एसटीएफ नशीले कफ सिरप की तस्करी में बर्खास्त सिपाही की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
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