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लखनऊ चिड़ियाघर
कब बना: 1912 में
क्षेत्रफल: 71.6 एकड़
जानवरों की संख्या: 852
प्रजातियों की संख्या: 9
सालाना पर्यटकों की संख्या: करीब 1 लाख
लखनऊ चिडिय़ाघर को द प्रिंस ऑफ वेल्स जूलॉजिकल गार्डेन के नाम से भी जाना जाता है। इसकी स्थापना 1921 में प्रिंस ऑफ वेल्स की रानी के आगमन पर हुई थी। लखनऊ में चिडिय़ाघर की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका सर हारकोर्ट बटलर ने निभाई थी।
इसके बाद राज्य के गर्वनर और अन्य समाज के उच्च पदस्थ लोगों की सहायता से जानवरों के संरक्षण के संरक्षण के लिए गुफाओं और बाड़ो का निर्माण कराया गया।
इसके उपरांत एक प्रबंधन कमेटी का गठन किया गया, जिसमें लखनऊ के कमिश्नर कर्नल फैंथओर्प को पहला अध्यक्ष जबकि शेख मकबूल हुसैन को आयोग का पहला सचिव बनाया गया। कमेटी का पंजीकरण सोसाइटी रजिस्ट्रेसन एक्ट के तहत 17 अगस्त 1926 को किया गया था।
ऐसे तो आपने बहुत से चिडिय़ाघर देखे होंगे लेकिन लखनऊ के दिल हजरतगंज में बसा चिडिय़ाघर की अपनी एक अलग शोभा है। इसका निर्माण इस तरह से किया गया है कि, आप बीच रास्ते पर चलते हुए दोनों तरफ जानवरों के बाड़े को देखते हुए आनंद ले सकते हैं।
लखनऊ के चिडिय़ाघर में एक रेलगाड़ी भी है, जिसमें बैठकर पूरे चिडिय़ाघर का मजा लिया जा सकता है। चिडिय़ाघर के भीतर ही उत्तर प्रदेश का राज्य संग्रहालय स्थित है जिसमें आकर्षण का केंद्र है मिस्त्र की मम्मी जो 3000 साल से अधिक पुरानी है।