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Lucknow News: बच्चों की परवरिश के लिए सैनिक की विधवा को धोने पड़े जूठे बर्तन
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बच्चों के साथ निकिता राय।
लखनऊ। ड्यूटी के लिए तैयार होते समय पैर फिसलने पर सरकारी क्वार्टर की बालकनी से गिरकर जान गंवाने वाले गोरखा रायफल्स के सैनिक प्रसन्ना राय की पत्नी निकिता राय को मुआवजा पाने के लिए करीब छह साल अफसरों और कोर्ट के चक्कर काटने पड़े। तीन छोटे बच्चों की परवरिश के लिए उन्हें रेस्टोरेंट का संचालन करते हुए ग्राहकों के जूठे बर्तन तक धोने पड़े। आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल की लखनऊ बेंच के 25 लाख मुआवजा देने के फैसले से उन्हें राहत जरूर मिली है, लेकिन इसे पाने के लिए उन्होंने जो कष्ट झेले, उसे याद कर उनकी आंखें आंसू से बोझिल हो जाती हैं।
अपने अधिवक्ता विराट आनंद सिंह के कहने पर निकिता ने अमर उजाला से बात की। फोन पर उन्होंने बताया कि वर्तमान में वह दार्जिलिंग के कालीपोंग शहर स्थित ससुराल में दो बेटी एंजिल राय (18), आसना राय (16) और बेटे अनिक राय (14) के साथ रह रही हैं। उनके पति गोरखा राइफल्स में राइफलमैन थे और लखनऊ में तैनात थे। ड्यूटी पर जाते समय 2018 को उनकी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद वह ससुराल दार्जिलिंग चली गई थीं।
नियमानुसार उन्हें 25 लाख रुपये मुआवजा मिलना चाहिए था, लेकिन नहीं दिया गया। चार साल चक्कर काटने के बाद उन्हें मजबूरन आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल में मुकदमा दायर करना पड़ा। तीन बच्चों की पढ़ाई और परवरिश सिर्फ पेंशन से नहीं चल पा रही थी, लिहाजा दार्जिलिंग में उन्होंने रेस्टोरेंट खोला। इसके संचालन के लिए जूठे बर्तन भी धोएं। एक साल पहले छोटे बेटे को पीलिया हो गया। इलाज में काफी पैसे खर्च हुए। दो लाख का कर्ज भी लेना पड़ा। जिसकी हर महीने पांच हजार किस्त देनी पड़ रही है। दार्जिलिंग से लखनऊ पैरवी के लिए आने-जाने में चार दिन का समय लगता था। बच्चों को अकेला या फिर ननिहाल में छोड़कर आना पड़ता था। बड़ी बेटी के विवाह की भी चिंता सताती रहती है। वह निराश मन से कहती हैं कि कोर्ट का आदेश तो हो गया है, लेकिन अगर मुआवजा जल्दी मिल जाए तो दुख थोड़ा कम हो सकता है।
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ये है मामला
आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल की लखनऊ बेंच ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में दिवंगत सैनिक राइफलमैन प्रसन्ना राय की पत्नी निकिता राय को 25 लाख रुपये का एक्स ग्रेशिया मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह फैसला न्यायमूर्ति सुरेश कुमार गुप्ता (सदस्य न्यायिक) और मेजर जनरल संजय सिंह (सदस्य प्रशासनिक) की पीठ ने सुनाया है।
प्रसन्ना राय 23 दिसंबर 2003 को 11 गोरखा राइफल्स में राइफलमैन के पद पर भर्ती हुए थे। लखनऊ में तैनाती के दौरान 31 अगस्त 2018 को सरकारी आवास की बालकनी से रात की परेड के लिए जाते समय फिसलकर गिर गए थे। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उन्हें कमांड अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां एक सितंबर 2018 की सुबह उनकी मृत्यु हो गई थी। कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी ने इस दुर्घटना को सैन्य सेवा से संबंधित माना और मृत्यु को ड्यूटी के दौरान हुआ बताया। निकिता राय को विशेष पारिवारिक पेंशन (एसपीएफ) तो दी गई, लेकिन दो बार एक्स ग्रेशिया मुआवजे के लिए भेजा गया प्रस्ताव पीसीडीए (पेंशन) प्रयागराज ने अस्वीकार कर दिया।
निकिता के अधिवक्ता विराट आनंद सिंह ने बताया कि रक्षा मंत्रालय की गाइडलाइंस में स्पष्ट है कि ड्यूटी पर जाते समय हुए हादसों को भी सैन्य सेवा से जुड़ा माना जाएगा और मृतक के परिजनों को मुआवजा दिया जाएगा, लेकिन अफसरों ने निकिता की फरियाद नहीं सुनी तो उसे कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा कि यह मामला रक्षा मंत्रालय की नई नीति के अंतर्गत आता है और मुआवजा न देना उचित नहीं था। इसके आधार पर ट्रिब्यूनल ने 20 जनवरी 2023 को पारित पीसीडीए (पेंशन) का आदेश रद कर दिया और निर्देश दिया कि निकिता राय को चार महीने के भीतर मुआवजा दिया जाए। देरी होने पर आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करना होगा।
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अपने अधिवक्ता विराट आनंद सिंह के कहने पर निकिता ने अमर उजाला से बात की। फोन पर उन्होंने बताया कि वर्तमान में वह दार्जिलिंग के कालीपोंग शहर स्थित ससुराल में दो बेटी एंजिल राय (18), आसना राय (16) और बेटे अनिक राय (14) के साथ रह रही हैं। उनके पति गोरखा राइफल्स में राइफलमैन थे और लखनऊ में तैनात थे। ड्यूटी पर जाते समय 2018 को उनकी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद वह ससुराल दार्जिलिंग चली गई थीं।
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नियमानुसार उन्हें 25 लाख रुपये मुआवजा मिलना चाहिए था, लेकिन नहीं दिया गया। चार साल चक्कर काटने के बाद उन्हें मजबूरन आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल में मुकदमा दायर करना पड़ा। तीन बच्चों की पढ़ाई और परवरिश सिर्फ पेंशन से नहीं चल पा रही थी, लिहाजा दार्जिलिंग में उन्होंने रेस्टोरेंट खोला। इसके संचालन के लिए जूठे बर्तन भी धोएं। एक साल पहले छोटे बेटे को पीलिया हो गया। इलाज में काफी पैसे खर्च हुए। दो लाख का कर्ज भी लेना पड़ा। जिसकी हर महीने पांच हजार किस्त देनी पड़ रही है। दार्जिलिंग से लखनऊ पैरवी के लिए आने-जाने में चार दिन का समय लगता था। बच्चों को अकेला या फिर ननिहाल में छोड़कर आना पड़ता था। बड़ी बेटी के विवाह की भी चिंता सताती रहती है। वह निराश मन से कहती हैं कि कोर्ट का आदेश तो हो गया है, लेकिन अगर मुआवजा जल्दी मिल जाए तो दुख थोड़ा कम हो सकता है।
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ये है मामला
आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल की लखनऊ बेंच ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में दिवंगत सैनिक राइफलमैन प्रसन्ना राय की पत्नी निकिता राय को 25 लाख रुपये का एक्स ग्रेशिया मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह फैसला न्यायमूर्ति सुरेश कुमार गुप्ता (सदस्य न्यायिक) और मेजर जनरल संजय सिंह (सदस्य प्रशासनिक) की पीठ ने सुनाया है।
प्रसन्ना राय 23 दिसंबर 2003 को 11 गोरखा राइफल्स में राइफलमैन के पद पर भर्ती हुए थे। लखनऊ में तैनाती के दौरान 31 अगस्त 2018 को सरकारी आवास की बालकनी से रात की परेड के लिए जाते समय फिसलकर गिर गए थे। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उन्हें कमांड अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां एक सितंबर 2018 की सुबह उनकी मृत्यु हो गई थी। कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी ने इस दुर्घटना को सैन्य सेवा से संबंधित माना और मृत्यु को ड्यूटी के दौरान हुआ बताया। निकिता राय को विशेष पारिवारिक पेंशन (एसपीएफ) तो दी गई, लेकिन दो बार एक्स ग्रेशिया मुआवजे के लिए भेजा गया प्रस्ताव पीसीडीए (पेंशन) प्रयागराज ने अस्वीकार कर दिया।
निकिता के अधिवक्ता विराट आनंद सिंह ने बताया कि रक्षा मंत्रालय की गाइडलाइंस में स्पष्ट है कि ड्यूटी पर जाते समय हुए हादसों को भी सैन्य सेवा से जुड़ा माना जाएगा और मृतक के परिजनों को मुआवजा दिया जाएगा, लेकिन अफसरों ने निकिता की फरियाद नहीं सुनी तो उसे कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा कि यह मामला रक्षा मंत्रालय की नई नीति के अंतर्गत आता है और मुआवजा न देना उचित नहीं था। इसके आधार पर ट्रिब्यूनल ने 20 जनवरी 2023 को पारित पीसीडीए (पेंशन) का आदेश रद कर दिया और निर्देश दिया कि निकिता राय को चार महीने के भीतर मुआवजा दिया जाए। देरी होने पर आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करना होगा।