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मरीज के पेट से निकली जानवरों जैसा 'सींग', डॉक्टर भी रह गए हैरान

Sun, 28 Aug 2016 05:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 28 Aug 2016 05:02 PM IST
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A rare case in balrampur hospital.
मरीज मोहम्मद बैश - फोटो : amar ujala

बलरामपुर अस्पताल के डॉक्टरों ने एक बुजुर्ग को अजीबोगरीब बीमारी से निजात दिला दी है। 20 साल पहले बुरी तरह झुलसे मरीज की नाभि और सीने की हड्डी के बीच काले रंग की सींग जैसी आकृति निकल आई थी।

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मरीज अस्पताल पहुंचा तो इसे देख डॉक्टर भी हैरान रह गये। डेढ़ घंटे चली सर्जरी के बाद तीन इंच की आकृति को बाहर निकाल दिया गया। अब इसे बायोप्सी के लिए लोहिया संस्थान भेजा गया है।
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बाराबंकी, बाबागंज के मो. बैश (62) करीब बीस साल पहले आग की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गये थे। कई महीने से पेट और सीने की हड्डी के बीच में काले रंग की एक नुकीली सींग जैसी आकृति डवलप होने लगी।

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मोटाई थी करीब ढाई इंच

A rare case in balrampur hospital.

परिवारीजन मो. बैश को लेकर बलरामपुर अस्पताल पहुंचे। जहां सीएमएस और सर्जन डॉ. राजीव लोचन ने बताया कि मरीज के पेट और सीने की हड्डी र्स्टनम के बीच सींग जैसा कुछ निकला हुआ था। एक्स-रे और सीटी स्कैन से पता चला कि यह अंदर तक है।

शनिवार को करीब पांच इंच का चीरा लगाकर तीन इंच लम्बी नुकीली सींग को निकाल दिया गया इसकी मोटाई करीब ढाई इंच थी। डॉ. राजीव लोचन ने बताया कि सींग निकलने के दो कारण हो सकते हैं।

पहला स्टेम सेल कारसीनोमा और दूसरा सेबेस्टियस हॉर्न, जो बर्न के मरीजों में कभी कभार मिलता है।

तीन घंटे में हुई सर्जरी

A rare case in balrampur hospital.
डॉ. राजीव लोचन व डॉ. ऋषि सक्सेना - फोटो : amar ujala

मरीज के पेट से करीब तीन इंच की फॉरेन बॉडी निकालने में डेढ़ घंटे लगे अब वह पूरी तरह ठीक है। सर्जरी टीम में डॉ. राजीव लोचन के साथ डॉ. राजीव, डॉ. अतुल, डॉ. कौशल और डॉ. पीयूष समेत नर्सिंग स्टाफ मंजू मौजूद रहे।

जांघ की खाल से की प्लास्टिक सर्जरी
डॉ. राजीव लोचन ने बताया कि फॉरेन बॉडी ‘सींग’ निकालने के लिए उस हिस्से में कट लगाया गया। उस हिस्से को रिपेयर करने के लिए जांघ की खाल लगाई गई।

डॉ. राजीव लोचन ने बताया कि जख्म की प्लास्टिक सर्जरी करने के बाद अब ये नहीं पता लगेगा की कोई फॉरेन बॉडी उस हिस्से में थी। निजी संस्थान में इस ऑपरेशन के लिए मरीज को 50 हजार रुपये से ज्यादा खर्च करना पड़ता। अस्पताल में एक रुपये के पर्चे पर पूरा इलाज हुआ।

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