केजीएमयू: गलत इंजेक्शन लगाने से टेढ़ा हुआ मरीज का मुंह, इन्टर्न निलंबित, जांच शुरू
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केजीएमयू के डेंटल संकाय में मरीज को गलत इंजेक्शन लगाने का मामला सामने आया है। इससे मरीज का मुंह टेढ़ा हो गया। मामले का खुलासा होने के बाद एक रेजीडेंट और इन्टर्न को निलंबित कर दिया गया है। मामले की जांच के लिए दंत संकाय के डीन को कमेटी गठित करने का निर्देश दिया गया है।
राजधानी निवासी 13 साल की किशोरी को दांत में दर्द था। वह गुरुवार को दंत संकाय आई। ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग में दिखाया। जहां डाक्टर ने खराब दांत निकलवाने की बात बताई। इसके बाद मरीज को दूसरे कमरे में भेज दिया। वहां मौजूद रेजीडेंट और इन्टर्न छात्रा ने उसे इंजेक्शन लगाया, जिससे उसका मुंह टेढ़ा हो गया। किशोरी के घर वालों मामले की शिकायत की हो हड़कंप मच गया।
जांच में पता चला कि किशोरी को डाइलोकेन के बजाय फार्मेलिन का इंजेक्शन लगा दिया गया है। यह इंजेक्शन लगने से मांसपेशियां ढीली होने लगती है और चेहरा टेढ़ा हो जाता है। इसमें इचिंग भी होती है।
सोमवार को मामला खुलने के बाद दंत संकाय के डीन ने आनन- फानन में संबंधित रेजीडेंट और इन्टर्र्न को 10 दिन केलिए निलंबित कर दिया है। मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की गई है।
डोज देने में हुई गड़बड़ी
सूत्रों की मानें तो किशोरी को डेंटल चेयर पर लेटाने के बाद रेजीडेंट ने इन्टर्न छात्रा से इंजेक्शन लगाने के लिए कह दिया। छात्रा ने मसूड़ा सुन्न करने में प्रयोग की जाने वाली डाइलोकेन की दवा सीरिंज में ली। रेजीडेंट ने देखा कि सीरिंज में ढाई एमएल के बजाय काफी कम मात्रा में दवा है। इस पर उसने डोज बढ़ाने के लिए कहा।
इन्टर्न ने दोबारा दवा भरते समय डाइकोलेन के बजाय वहां रखी फार्मेलिन भर लिया और उसे किशोरी को लगा दिया। यह इंजेक्शन लगते ही किशोरी का चेहरा टेढ़ा हो गया। जलन होने से वह चिल्लाने लगी। यह देख अन्य चिकित्सक कमरे में आए और इन्टर्न से पूछताछ की। इस दौरान पता चला कि गलत इंजेक्शन लग गया है, लेकिन पूरे मामले को दबाए रखा गया।
जांच कमेटी गठित करने के निर्देश
मामले पर केजीएमयू के मीडिया प्रभारी डॉ. सुधीर सिंह का कहना है कि गलत इंजेक्शन लगाने की बात सामने आई है। इसकी जांच कराई जा रही है। तब तक के लिए संबंधित रेजीडेंट और इन्टर्न को निलंबित कर दिया गया है। कुलपति ने दंत संकाय के डीन को जांच कमेटी गठित करने का निर्देश दिया है।