तेंदुए पर लात-घूंसे से हमला कर मां ने बेटी को जबड़े से छुड़ाया, फिर जलती लकड़ी को बनाया हथियार
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बहराइच जिले के मोतीपुर रेंज के नैनिहा गांव में मंगलवार रात खाना खाने से पूर्व हाथ धोने के लिए हैंडपंप पर गई नौ वर्षीय संजनी पर तेंदुए ने हमला कर दिया। चीख सुनकर मां सुनैना दौड़ी तो बेटी का सिर तेंदुए के जबड़े में कसा देखा। पल भर के लिए तो वह सहम गई। फिर तेंदुए पर लात-घूसों से हमला कर उसके जबड़े से बेटी को छुड़ा लिया।
इसके बाद तेंदुआ मां-बेटी दोनों पर हमलावर हो गया। इस पर सुनैना शोर मचाते हुए चूल्हे में जलती लकड़ी के साथ तेंदुए से भिड़ गई। मां-बेटी की चीख-पुकार सुनकर गांव वाले एकत्र हुए और हाका लगाते हुए मशाल जलाया।
इसे देख तेंदुआ को जंगल की ओर भाग गया और मां-बेटी की जान बच सकी। हमले में घायल बच्ची को मोतीपुर सीएचसी ले जाया गया जहां उसकी नाजुक हालत को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
इस तरह हुई घटना
बताते हैं कि रात नौ बजे के आसपास सुनैना खाना बना रही थी। उसने अपनी नौ वर्षीय बेटी संजनी को खाना खाने के लिए बुलाया। संजनी घर के मुख्य द्वार पर स्थित हैंडपंप पर हाथ धोने के लिए गई। इसी दौरान घर के सामने छिपे बैठे तेंदुए ने हमला कर संजनी के सिर को दबोच लिया।
बेटी की चीख सुनकर मां बाहर निकली और नजारा देखकर तेंदुए पर लात-घूसों की बौछार करते हुए जबड़े से बेटी को खींच लिया। इस दौरान तेंदुआ फिर हमलावर हो गया। इसे देख दिख वह दौड़कर चूल्हे की जलती हुई लकड़ी निकालकर लाई और तेंदुए का सामना करते हुए शोर मचाया। 20 मिनट तक चले इस संघर्ष के बाद गांव के लोग एकत्र हो गए। लोगों ने हांका लगाते हुए मशाल जलाया। तब तेंदुआ जंगल की ओर गया।
रात में ही बालिका के जख्मी होने की सूचना रेंज कार्यालय पर दी गई, लेकिन कोई भी वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। परिवारीजनों ने ग्रामीणों की मदद से मासूम को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, मोतीपुर पहुंचाकर भर्ती कराया। वहां पर प्राथमिक उपचार के दौरान मासूम की हालत गंभीर देखकर डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया।