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ठगी की शिकार लड़की ने थाने में फर्जी कर्नल को धरा थप्पड़, शक न हो इसलिए करता था ये काम

Tue, 14 May 2019 02:59 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 14 May 2019 02:59 PM IST
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a lady slapped a fake colonel in police station in lucknow
फर्जी कर्नल हर्षवर्धन सिंह - फोटो : अमर उजाला

फर्जी कर्नल हर्षवर्धन सिंह की गिरफ्तारी के बाद सेना में नौकरी व सेना के मेडिकल कॉलेज में दाखिले के नाम पर ठगे गए कई बेरोजगार सोमवार को लखनऊ के विभूतिखंड थाने पहुंचे और शिकायत की। ठगी की शिकार एक युवती भी थाने पहुंची।

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पुलिस हर्षवर्धन को कोर्ट में पेश करने के लिए ले जा रही थी तभी ठगी की शिकार एक युवती ने उसे जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। पुलिस किसी तरह से फर्जी कर्नल को लेकर निकली। प्रभारी निरीक्षक राजीव द्विवेदी के मुताबिक, अब तक शुभांगी सिंह, जसप्रीत सिंह, हरप्रीत सिंह, सर्वजीत सिंह, राजविंदर कौर, नंद किशोर वर्मा, ऋषभ वर्मा और ज्योति ने शिकायत की है।
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शिकायत करने वालों नये गिरोह की ओर से जारी किए गए कई फर्जी पत्र भी सौंपे। शिकायती पत्रों व दस्तावेजों की जांच की जा रही है। प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक हर्षवर्धन ने बताया कि सेना में भर्ती के नाम पर खुद ठगे जाने के बाद वह विभूतिखंड थानाक्षेत्र के एक निजी कैब कंपनी के कार्यालय में काम करता था।

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हर्षवर्धन सेना की वर्दी में रहता

यहीं पर उसकी मुलाकात विवेक राठौर से हुई। इस दौरान दोनों के बीच काफी गहरी दोस्ती हो गई। बातचीत के दौरान सेना में भर्ती के नाम पर लाखों रुपये कमाने की साजिश रच ली। इसके लिए दिल्ली में बैठे जालसाज से संपर्क किया जोकि गिरोह का मास्टर माइंड है।

उसकी मदद से फर्जी दस्तावेज तैयार कर ठगी का धंधा शुरू कर दिया। विवेक व उसका दोस्त सिद्धार्थ बेरोजगारों को सेना में भर्ती कराने के नाम पर फंसाते थे। उनसे रकम वसूल कर हर्षवर्धन के सामने पेश करते थे। हर्षवर्धन उनसे बातचीत करता था।

इस दौरान हर्षवर्धन सेना की वर्दी में रहता था। ताकि किसी को संदेह न हो। बेरोजगारों से रकम ऐंठने के बाद उसको फर्जी नियुक्ति पत्र पकड़ा देते थे। साथ ही उसे मेडिकल जांच के लिए भेज देते।

ट्रेनिंग में जाने के लिए देते थे ट्रेन व हवाई जहाज का टिकट

पुलिस के मुताबिक, झांसे में फंसे बेरोजगारों को शक न हो इसलिए गिरोह सेना के फर्जी लेटरपैड पर ट्रेनिंग स्थल जाने के लिए ट्रेन और हवाई जहाज के टिकट के बंदोबस्त की जानकारी देता था। बाद में पता चलता कि जो पीएनआर या नंबर दिया गया है वह फर्जी है।

 

बेरोजगार युवकों को ट्रेनिंग में क्या करना है, कितना सामान लेकर जाना है, किस तरह का व्यवहार करना है, इन सब की एक सूची भी उपलब्ध कराई जाती थी। यह सूची वैसे ही होती जैसा सेना में भर्ती होने के बाद हर रंगरूट को दी जाती है। साथ ही एक एग्रीमेंट पेपर पर दस्तखत कराया जाता, जिसमें सेना में भर्ती के दौरान मिलने वाली सारी शर्तें होती थी।

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