कुत्तों के झुंड ने बच्चे पर हमला कर नोंच डाला, केजीएमयू में आठ घंटे भटकने पर भी नहीं मिला इलाज
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एक पिता कुत्ते के हमले में बुरी तरह घायल अपने चार साल के बेटे अयान को लेकर शहर के दो बड़े अस्पताल और चार विभागों में आठ घंटे तक भटकता रहा, लेकिन इलाज नहीं मिला। आखिरकार उसने पड़ोसियों की मदद से पैसा जुटाया और एंटी रेबीज का इंजेक्शन खरीद कर लगवाया। यह विडंबना ही है कि राजधानी के दो बड़े अस्पतालों में इलाज तो दूर कुत्ता काटने पर लगाई जाने वाली वैक्सीन ही नहीं है।
रामतीरथ हजरतगंज वार्ड के रहने वाले सफाई कर्मचारी वासु का बेटा अयान (4) रात करीब 8 बजे घर के बाहर खेल रहा था। तभी अचानक आठ दस कुत्तों के झुंड ने उसपर हमला बोल दिया। कुत्तों ने अयान का होंठों से लेकर आखों तक पूरी चेहरा बुरी तरह नोच डाला। करीब 8:30 बजे मोहोल्ले वालों की मदद से पिता वासु उसे लेकर सिविल अस्पताल पहुंचे। जहां से उन्हें एंटी रेबीज न होने की बात कह कर ट्रॅामा सेंटर के लिए रेफर कर दिया गया।
ट्रॉमा सेंटर से लेकर नेत्र रोग विभाग तक की दौड़ लगाई, रात ढाई बजे बताया गया इंजेक्शन नहीं
वासु की मुसीबत ट्रॉमा सेंटर पहुंच कर और बढ़ गई। पड़ोसी किशोर ने बताया कि यहां से पीडियाट्रिक विभाग ले जाने को कहा गया। वासु जब वहां पहुंचे तो वहां से एंटी रेबीज विभाग भेज दिया गया। वहां पहुंचने पर पता चला कि एंटी रेबीज इंजेक्शन ही नहीं है। फिर चेहरे को जख्मों के इलाज के लिए प्लास्टिक सर्जरी विभाग भेज दिया गया। बच्चे के जख्मों से खून रिसता रहा।
प्लास्टिक सर्जरी विभाग ...और यहां डॉक्टर नदारद, सो रहा था स्टाफ
घरवाले जब बच्चे को लेकर प्लास्टिक सर्जरी विभाग पहुंचे तो वहां कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं था। नर्स भी सो रही थी। गार्ड की मदद से जब नर्स को जगाया गया तो उसने डॉक्टर मौजूद न होने की बात कह कर आंख की चोट देख नेत्र विभाग ले जाने की सलाह दे दी।
नेत्र विभाग : डॉक्टर ने कहा-टांका लगाना नहीं आता
रात एक बजे अयान को लेकर वे लोग नेत्र रोग विभाग पहुंचे। वहां फोन से जूनियर रेजीडेंट को बुलाया गया, जिसने कहा कि उसे टांका लगाना नहीं आता। फिर प्लास्टिक सर्जरी विभाग ले जाने की बात कही गई, वहां कोई नहीं मिला। फिर गार्ड ने ट्रॉमा सेंटर ले जाने की बात कही।
रात 2.30 बजे सिर्फ मरहम पट्टी, फिर खरीद कर लगवाया इंजेक्शन
अयान को घरवाले 2.30 बजे लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। यहां जख्मों पर टांके लगाकर मरहम पट्टी की गई। और आंखों के आसपास जख्मों के लिए नेत्र विभाग भेजा गया। रात तीन बजे वहां से बिना इलाज लौट आए। थकहार कर एंटी रेबीज इंजेक्शन खरीद कर लगवाया। वासु सफाई कर्मचारी हैं। इंजेक्शन का पैसा उन्होंने पड़ोसियों की मदद से जुटाया।
केजीएमयू के सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार का कहना है कि बच्चे को ट्रॉमा सेंटर लाया गया था। उसको पूरा उपचार देकर ड्रेसिंग कराकर भेजा गया है। 24 घंटे का समय होता है, वैक्सीन खत्म हो गई थी, इसलिए अगले दिन आने को कहा गया।