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Lucknow News: लक्ष्मण घाट पर दिखा श्रद्धा और आस्था का संगम
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लक्ष्मण घाट पर मौजूद भक्त।
लखनऊ। चैती छठ महापर्व पर बृहस्पतिवार को लक्ष्मण घाट पर श्रद्धा और भक्ति का महासागर उमड़ पड़ा। अखिल भारतीय भोजपुरी समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभुनाथ राय के नेतृत्व में छठ घाट पर सैकड़ों व्रती महिलाएं और पुरुष एकत्र हुए। यहां सभी ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया।
घाट पर सजी रंग-बिरंगी चुनरियों, पारंपरिक परिधानों और गूंजते जयकारों ने माहौल को दिव्यता से भर दिया। किसी ने मन्नत पूरी होने पर छठ का उपवास रखा तो कोई पहली बार कामना लेकर आया। फलों से सजी लाल रंग की डलिया, छठ पूजा की भव्यता को और बढ़ा रही थी।
प्रभुनाथ राय के बताया कि शुक्रवार की भोर में उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा तब यह आध्यात्मिक पर्व पूरा होगा। चार अप्रैल को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही व्रती महिलाएं सिंदूर दानकर अखंड सौभाग्य की कामना करेंगी।
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राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामरतन यादव, राष्ट्रीय सचिव वेदप्रकाश, राष्ट्रीय महासचिव जीतेंद्र सोनकर, मनोज सिंह, मनीष पौद्दार, संजय सिंह, रामबिलास यादव, सुनील सिंह, हनुमान यादव, लोकगायक अवधेश, अंगदराम ओझा समेत अन्य पदाधिकारियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया।
मां की मन्नत हुई पूरी तो रखा व्रत
वन विभाग कॉलोनी की गुंजा सिंह पूरे परिवार के साथ दंडवत करते हुए लक्ष्मण घाट पहुंचीं। साथ में पति और बेटियां भी थीं। गुंजा के बेटे का कुछ समय पहले लिवर का ऑपरेशन हुआ था। डॉक्टरों से उम्मीदें टूटती दिखीं तो उन्होंने छठी मैया से मन्नत मांगी कि बेटा स्वस्थ हो गया तो मैं दंडवत करते हुए घाट तक जाऊंगी और सूर्यदेव को अर्घ्य दूंगी। मन्नत पूरी हुई, बेटा स्वस्थ हुआ तो श्रद्धा के साथ उन्होंने चैती छठ व्रत रखा।
छठी मैया की कृपा से हुई संतान
मुंशी पुलिया की रहने वाली अंजली राय के लिए चैती छठ पर्व बेहद खास है। उन्होंने बताया कि उनकी शादी को छह साल हो गए, लेकिन संतान नहीं हुई। छठी मैया के चरणों में प्रार्थना की थी कि अगर उन्हें संतान की प्राप्ति होगी तो छठ व्रत करेंगी। परिवार के साथ घाट पर आकर अर्घ्य देंगी। मां की कृपा से मन्नत पूरी हुई। वह बच्चे और परिवार के साथ लक्ष्मण घाट पहुंचीं। बताते हुए वह भावुक हो गईं कि छठी मैया ने उनकी सूनी गोद कर दी।
मन्नत पूरी होने पर दंडवत करते पहुंचे लक्ष्मण घाट
बिहार के राजकिशोर पत्नी खुशबू के साथ दंडवत करते हुए पहुंचे। यह उनका पहला छठ व्रत था, लेकिन इसके पीछे की कहानी ने आंखें नम कर दीं। राजकिशोर का कुछ समय पहले एक्सीडेंट हुआ था, जिसमें पैर में रॉड पड़ी थी। दर्द असहनीय था और चलना भी मुश्किल हो रहा था तब उन्होंने छठी मैया से मन्नत मांगी कि मैं फिर से पैरों पर खड़ा हो सका तो पहला छठ व्रत रखकर दंडवत करते हुए घाट तक जाऊंगा। छठी मैया ने प्रार्थना सुन ली। पत्नी खुशबू के साथ दंडवत करते हुए घाट तक पहुंचे और सूर्य को अर्घ्य दिया।
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घाट पर सजी रंग-बिरंगी चुनरियों, पारंपरिक परिधानों और गूंजते जयकारों ने माहौल को दिव्यता से भर दिया। किसी ने मन्नत पूरी होने पर छठ का उपवास रखा तो कोई पहली बार कामना लेकर आया। फलों से सजी लाल रंग की डलिया, छठ पूजा की भव्यता को और बढ़ा रही थी।
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प्रभुनाथ राय के बताया कि शुक्रवार की भोर में उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा तब यह आध्यात्मिक पर्व पूरा होगा। चार अप्रैल को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही व्रती महिलाएं सिंदूर दानकर अखंड सौभाग्य की कामना करेंगी।
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राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामरतन यादव, राष्ट्रीय सचिव वेदप्रकाश, राष्ट्रीय महासचिव जीतेंद्र सोनकर, मनोज सिंह, मनीष पौद्दार, संजय सिंह, रामबिलास यादव, सुनील सिंह, हनुमान यादव, लोकगायक अवधेश, अंगदराम ओझा समेत अन्य पदाधिकारियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया।
मां की मन्नत हुई पूरी तो रखा व्रत
वन विभाग कॉलोनी की गुंजा सिंह पूरे परिवार के साथ दंडवत करते हुए लक्ष्मण घाट पहुंचीं। साथ में पति और बेटियां भी थीं। गुंजा के बेटे का कुछ समय पहले लिवर का ऑपरेशन हुआ था। डॉक्टरों से उम्मीदें टूटती दिखीं तो उन्होंने छठी मैया से मन्नत मांगी कि बेटा स्वस्थ हो गया तो मैं दंडवत करते हुए घाट तक जाऊंगी और सूर्यदेव को अर्घ्य दूंगी। मन्नत पूरी हुई, बेटा स्वस्थ हुआ तो श्रद्धा के साथ उन्होंने चैती छठ व्रत रखा।
छठी मैया की कृपा से हुई संतान
मुंशी पुलिया की रहने वाली अंजली राय के लिए चैती छठ पर्व बेहद खास है। उन्होंने बताया कि उनकी शादी को छह साल हो गए, लेकिन संतान नहीं हुई। छठी मैया के चरणों में प्रार्थना की थी कि अगर उन्हें संतान की प्राप्ति होगी तो छठ व्रत करेंगी। परिवार के साथ घाट पर आकर अर्घ्य देंगी। मां की कृपा से मन्नत पूरी हुई। वह बच्चे और परिवार के साथ लक्ष्मण घाट पहुंचीं। बताते हुए वह भावुक हो गईं कि छठी मैया ने उनकी सूनी गोद कर दी।
मन्नत पूरी होने पर दंडवत करते पहुंचे लक्ष्मण घाट
बिहार के राजकिशोर पत्नी खुशबू के साथ दंडवत करते हुए पहुंचे। यह उनका पहला छठ व्रत था, लेकिन इसके पीछे की कहानी ने आंखें नम कर दीं। राजकिशोर का कुछ समय पहले एक्सीडेंट हुआ था, जिसमें पैर में रॉड पड़ी थी। दर्द असहनीय था और चलना भी मुश्किल हो रहा था तब उन्होंने छठी मैया से मन्नत मांगी कि मैं फिर से पैरों पर खड़ा हो सका तो पहला छठ व्रत रखकर दंडवत करते हुए घाट तक जाऊंगा। छठी मैया ने प्रार्थना सुन ली। पत्नी खुशबू के साथ दंडवत करते हुए घाट तक पहुंचे और सूर्य को अर्घ्य दिया।