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Lucknow News: चार महीने से 55 करोड़ का बजट पड़ा, एक भी रुपया नहीं हुआ खर्च

Wed, 16 Jul 2025 01:51 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 16 Jul 2025 01:51 AM IST
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A budget of Rs 55 crore was pending for four months, not even a single rupee was spent
खुले पड़े नाले।
लखनऊ। वार्डों में सड़क, नाला-नाली, टूटी पुलिया बनाने के लिए चार महीना पहले 55 करोड़ रुपये का बजट जारी हुआ था, मगर अब तक काम एक पैसे का नहीं हुआ। काम होता तो पेंटर सुरेश लोधी की जान बच सकती थी। जान जाने के बाद अब नगर निगम प्रशासन और पार्षद एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं।
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नौ मार्च को वार्डों में विकास कार्य कराने के लिए महापौर सुषमा खर्कवाल ने 110 करोड़ रुपये का बजट जारी करने का आदेश दिया था, जिसके बाद नगर आयुक्त की ओर से सभी वार्डों में पहले फेज में 50-50 लाख रुपये के कार्य कराने का आदेश दिया गया। ऐसे में 110 वार्डों के लिए 55 करोड़ रुपये का बजट जारी हुए चार महीने से अधिक हो गए, मगर वार्डों में जनसमस्याओं को दूर कराने पर अब तक एक भी रुपया खर्च नहीं हुआ।
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पार्षदों का आरोप
पार्षद सीबी सिंह, शैलेंद्र वर्मा, अनुराग मिश्रा, अमित चौधरी सहित 30 से अधिक पार्षद और पार्षद पतियों ने नगर आयुक्त गौरव कुमार पर आरोप लगाया है कि वह विकास कार्य ठप किए हुए हैं। कोई काम नहीं करा रहे हैं। कई पार्षदों ने कहा कि नगर निगम के इंजीनियर और अफसर तो अभी तक नाला सफाई और बैठकों में व्यस्त थे तो काम कौन कराएगा। 15वें वित्त और अवस्थापना निधि के काम भी नहीं कराए जा रहे हैं। जानबूझकर उनको अटकाया गया है।
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नगर आयुक्त बोले- काम कराएं, रोक कौन रहा
नगर आयुक्त गौरव कुमार ने कहा कि जब पार्षद प्रस्ताव ही काम कराने के लिए नहीं दे रहे हैं तो कैसे काम होंगे। सदन से पास प्रस्ताव के तहत पार्षद कोटे के काम पार्षदों के प्रस्ताव पर ही कराए जाने हैं। ऐसे में नगर निगम प्रशासन अपने हिसाब से काम नहीं करा सकता। कुछ पार्षदों ने प्रस्ताव दिए हैं, जिन पर अभियंत्रण विभाग काम कराने की तैयारी कर रहा है। प्रति वार्ड सालाना पार्षद कोटा 2.10 करोड़ रुपये है, जिसमें 10 लाख रुपये सिर्फ नाला, नाली की टूटी पुलिया और मरम्मत के लिए बजट दिया गया है, ताकि दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

चर्चाएं यह भी
पार्षदों के विरोध पर कई तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। लोग कह रहे हैं कि पार्षद उस समय विरोध करने क्यों नहीं आए थे, जब सुरेश लोधी की मौत खुले नाले में गिरने से हुई थी। जब उन पर मुकदमा हो गया तो वह सामने आए हैं। मुकदमा पुलिस ने दर्ज किया और वह प्रदर्शन नगर निगम में कर रहे हैं। यह सिर्फ दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है, ताकि विकास कार्यों में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए जो व्यवस्था बनाई गई है, वह ठप हो जाए। सूत्रों का कहना है कि नई व्यवस्था में फर्जीवाड़ा नहीं हो पाएगा, इसी कारण विकास के लिए प्रस्ताव भी नहीं आ रहे हैं।

खुले पड़े नाले।

खुले पड़े नाले।

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