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खजाना की एनओसी के लिए मांगे एक करोड़ रुपये

Tue, 23 Jul 2013 07:32 AM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क Updated Tue, 23 Jul 2013 07:32 AM IST
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registry of shops in aashiyana colony

आशियाना कॉलोनी की दुकानों की रजिस्ट्री में एक और पेंच आ गया है। मानचित्र के इतर बेसमेंट में निर्माण कराने की वजह से लखनऊ विकास प्राधिकरण ने सालों तक इस मार्केट की दुकानों की रजिस्ट्री नहीं की।

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अंसल हाउसिंग द्वारा शमन शुल्क (कंपाउंडिंग) जमा होने के बाद जब मानचित्र पास होने का मौका आया तो नगर निगम ने अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) देने से मना कर दिया।
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नगर निगम ने इन दुकानदारों से अब तक के व्यावसायिक कर (कामर्शियल टैक्स) के तौर पर एक करोड़ रुपये की डिमांड कर दी है। आखिरकार जिला प्रभारी मंत्री ने इस मामले में दखल दिया। उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिया कि दुकानों का निरीक्षण कर नए सिरे से कर निर्धारण किया जाए।
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इसके बाद स्थल पर कैंप लगाकर वसूली की जाए। वहीं नगर निगम को सशर्त एनओसी देने के निर्देश दिए हैं। आशियाना स्थित खजाना मार्केट में बेसमेंट की दुकानों को वैध करने के लिए अंसल हाउसिंग ने एलडीए में 1.06 करोड़ रुपये जमा कर दिए थे। इस शमन राशि के जमा होने के बाद खजाना मार्केट का कंपाउंडिंग मैप तकनीकी समिति से तो पास हो गया था मगर रिलीज नहीं किया गया था।

पिछले करीब 20 साल से खजाना मार्केट के बेसमेंट में बनी दुकानें अवैध के दायरे में हैं। पूर्व में पास मानचित्र के प्रतिकूल अंसल हाउसिंग ने यहां के बेसमेंट में करीब 150 दुकानें बना दी थी। इसी के चलते अभी तक इन दुकानों की रजिस्ट्री नहीं हो सकी थी।

जंतु उद्यान राज्य मंत्री और जिला प्रभारी एसपी यादव ने इस संबंध में प्राधिकरण अधिकारियों को आदेश दिया था कि, इन दुकानों की रजिस्ट्री के लिए तकनीकी सम्मत निर्णय लिया जाए ताकि यहां की दुकानों की रजिस्ट्री की जा सके। इसके बाद कोशिशें शुरू हुई।

आखिरकार अंसल हाउसिंग ने शमन मानचित्र के लिए तीन किस्तों में 1.06 करोड़ रुपये जमा कर दिए थे। इसके बाद खजाना मार्केट का शमन मानचित्र तकनीकी समिति से पास कर दिया गया था। मगर जब मानचित्र रिलीज करने से पहले नगर निगम की एनओसी की बात आई तो नगर निगम ने मना कर दिया।

पहले टैक्स दो फिर पास होगा नक्शा
नगर निगम ने प्राधिकरण को साफ कह दिया है कि पहले सारी दुकानों का पिछले करीब 20 साल का करीब एक करोड़ रुपये कॉमर्शियल टैक्स दिया जाए उसके बाद ही एनओसी मिलेगी।

इस विवाद के बाद में जिला प्रभारी मंत्री ने आदेश दिया कि एक दम से एक करोड़ रुपये का आंकलन किया जाना उचित नहीं है। सभी दुकानदारों पर यह काफी बड़ा बोझ हो जाएगा।


इसलिए नगर निगम के अधिकारी मौके पर आएं। भौतिक परीक्षण कर के नए सिरे से व्यावसायिक कर का आंकलन करें। कैंप लगाकर कर दुकानदारों से कर की वसूली करें। जबकि, नगर निगम के अधिकारियों को उन्होंने सशर्त अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश दिया है।

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