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होम आइसोलेशन में 98 साल की पार्वती देवी ने कोरोना को दी मात
Thu, 24 Sep 2020 09:15 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Thu, 24 Sep 2020 09:15 PM IST
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covid 19 test
- फोटो : iStock
होम आइसोलेशन में रहकर भी कोरोना का मात दी जा सकती है। इसकी मिशाल पेश की है 98 साल की पार्वती देवी ने। चार सितंबर को बुजुर्ग पार्वती की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इसके बाद से ही वह आरसीएच आईसीयू कंसलटेंट प्रो. देवेंद्र गुप्ता की निगरानी में घर पर ही थीं और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उनका इलाज किया गया। 21 तारीख को उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ गई। डॉक्टरों के अनुसार यह पहला मामला है जब 98 साल को कोई मरीज होम आइसोलेशन में ही संक्रमण मुक्त हुआ है।
संजय गांधी पीजीआई के एनेस्थीसिया विभाग में कार्यरत महेंद्र वर्मा ने बताया कि उनकी मां पार्वती देवी को कोरोना हुआ तो परिवार काफी घबरा गया था। सीएमओ कार्यालय से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने के निर्देश मिले तो उन्होंने होम आइसोलेशन में रखने की मांग की। महेंद्र का कहना था कि मां की सुनने व समझने की शक्ति समाप्त हो चुकी है। इसी कारण उन्हें अस्पताल नहीं भेज सकते थे। घरवालों ने घर पर डॉक्टरों की निगरानी में इलाज की मांग की। मरीज की अधिक उम्र के कारण डॉक्टरों के लिए यह केस गंभीर था। आखिरकार आरसीएच आईसीयू कंसलटेंट प्रो. देवेंद्र गुप्ता को मरीज का जिम्मा सौंपा गया।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा उन्होंने मरीज को डीएनएस की छह बोतल चढ़ाने तथा आंतों में दस इंजेक्शन लगाने का सुझाव दिया। महेंद्र ने मां को पूरा इलाज दिया और 16 दिनों के बाद पार्वती की रिपोर्ट निगेटिव आ गई। महेंद्र ने बताया कि कोरोना की जांच कराने पर उनकी व सात वर्षीय बेटे की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आ गई थी। उनका इलाज अभी चल रहा है।
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संजय गांधी पीजीआई के एनेस्थीसिया विभाग में कार्यरत महेंद्र वर्मा ने बताया कि उनकी मां पार्वती देवी को कोरोना हुआ तो परिवार काफी घबरा गया था। सीएमओ कार्यालय से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने के निर्देश मिले तो उन्होंने होम आइसोलेशन में रखने की मांग की। महेंद्र का कहना था कि मां की सुनने व समझने की शक्ति समाप्त हो चुकी है। इसी कारण उन्हें अस्पताल नहीं भेज सकते थे। घरवालों ने घर पर डॉक्टरों की निगरानी में इलाज की मांग की। मरीज की अधिक उम्र के कारण डॉक्टरों के लिए यह केस गंभीर था। आखिरकार आरसीएच आईसीयू कंसलटेंट प्रो. देवेंद्र गुप्ता को मरीज का जिम्मा सौंपा गया।
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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा उन्होंने मरीज को डीएनएस की छह बोतल चढ़ाने तथा आंतों में दस इंजेक्शन लगाने का सुझाव दिया। महेंद्र ने मां को पूरा इलाज दिया और 16 दिनों के बाद पार्वती की रिपोर्ट निगेटिव आ गई। महेंद्र ने बताया कि कोरोना की जांच कराने पर उनकी व सात वर्षीय बेटे की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आ गई थी। उनका इलाज अभी चल रहा है।
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