{"_id":"687486bb960a2d99a40149a0","slug":"88-percent-of-goods-of-glass-industry-in-uttar-pradesh-are-consumed-by-liquor-companies-2025-07-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"UP News: शराब पर टिकी है पूरी 'कांच इंडस्ट्री', रिपोर्ट में चौंकाने वाली बात आई सामने; पढ़ें पूरी खबर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP News: शराब पर टिकी है पूरी 'कांच इंडस्ट्री', रिपोर्ट में चौंकाने वाली बात आई सामने; पढ़ें पूरी खबर
Mon, 14 Jul 2025 09:56 AM IST
भूपेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Mon, 14 Jul 2025 09:56 AM IST
सार
यूपी की 'कांच इंडस्ट्री' शराब पर टिकी है। इंटरनेशनल स्प्रिट्स एंड वाइन एसोसिएशन ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में चौंकाने वाली बात सामने आई है। करीब 88 फीसदी माल शराब कंपनियों में सप्लाई होता है।
विज्ञापन
कांच की बोतल (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : ani
-
- 1
-
Link Copied
विस्तार
आपको जानकर अचरज होगा कि ग्लास यानी कांच सेक्टर की रीढ़ शराब है। शराब की बिक्री घट जाए तो सबसे पहले कमर कांच उद्योग की टूटती है, क्योंकि कुल कांच उद्योग का करीब 88 फीसदी खपत शराब कंपनियों में होता है। कांच की बोतलों की अहमियत इसी से समझी जा सकती है कि महंगी शराब और बीयर की कीमत की 25 फीसदी तक लागत इन बोतलों की होती है।
फिरोजाबाद का लगभग पूरा कांच उद्योग ही इस पर टिका है। सिर्फ 12 फीसदी कांच से गिलास, झूमर व अन्य उत्पाद तैयार होते हैं। यह खुलासा इंटरनेशनल स्प्रिट्स एंड वाइन एसोसिएशन ऑफ इंडिया की यूपी पर जारी रिपोर्ट में हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक आज भी शराब बाजार में 65 फीसदी हिस्सेदारी देशी मदिरा की है। हालांकि, विदेशी शराब की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। मध्यम श्रेणी की शराब की सालाना ग्रोथ दर सात फीसदी है जबकि विदेशी श्रेणी की शराब की सालाना ग्रोथ दर 32 फीसदी है, जो देश में सर्वाधिक है। इस श्रेणी की शराब की बिक्री बढ़ने से कांच उद्योग की ग्रोथ पर भी सीधा असर हुआ है क्योंकि महंगी शराब में इस्तेमाल होने वाली बोतलें भी महंगी होती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
फिरोजाबाद का लगभग पूरा कांच उद्योग ही इस पर टिका है। सिर्फ 12 फीसदी कांच से गिलास, झूमर व अन्य उत्पाद तैयार होते हैं। यह खुलासा इंटरनेशनल स्प्रिट्स एंड वाइन एसोसिएशन ऑफ इंडिया की यूपी पर जारी रिपोर्ट में हुआ है।
विज्ञापन
रिपोर्ट के मुताबिक आज भी शराब बाजार में 65 फीसदी हिस्सेदारी देशी मदिरा की है। हालांकि, विदेशी शराब की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। मध्यम श्रेणी की शराब की सालाना ग्रोथ दर सात फीसदी है जबकि विदेशी श्रेणी की शराब की सालाना ग्रोथ दर 32 फीसदी है, जो देश में सर्वाधिक है। इस श्रेणी की शराब की बिक्री बढ़ने से कांच उद्योग की ग्रोथ पर भी सीधा असर हुआ है क्योंकि महंगी शराब में इस्तेमाल होने वाली बोतलें भी महंगी होती हैं।
विज्ञापन