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मां बनी किशोरी के मामले में पुलिस की सुस्ती बरकरार
Updated Mon, 09 Jul 2018 12:34 AM IST
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बहराइच। शासन और प्रशासन बहरा, अधिकारों को कौन सुनेगा, टूटा है जब ताना बाना, दुख की गठरी कौन धुनेगा... कुछ ऐसा ही हाल बहराइच के पुलिस महकमे का है। दुष्कर्म के बाद मां बनी किशोरी पर दुखों का पहाड़ टूटा है।
वह अपने साथ बेटे की सुरक्षा को लेकर चिंतित है लेकिन जिले के सुरक्षा तंत्र के आला हाकिम को दुष्कर्म पीड़िता की शायद चिंता नहीं है।
पीड़िता के मामले में लापरवाही क्यों बरती जा रही, इस मामले में जब एसपी से बात करने की कोशिश की गई तो फोन पीआरओ ने रिसीव किया। बोले, इस मामले में साहब बात नहीं करेंगे। बयान के लिए एएसपी नगर प्रभारी बनाए गए हैं।
14 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता अपनों से तो छली ही गई अब सिस्टम से भी छली जा रही है। पीड़िता के साथ हुए दुष्कर्म का केस 2016 में दर्ज हुआ।
इसके बाद डीएनए परीक्षण की कवायद शुरू हुई। वर्ष 2017 के शुरुआती दौर में डीएनए परीक्षण के लिए सैंपल भेजा गया, लेकिन अब तक रिपोर्ट नहीं आ सकी है।
केस दर्ज होने के साथ ही पुलिस ने भी माना कि घटना सत्य है। फिर भी पीड़िता को मुआवजे की आधी राशि तक नहीं मिली।
लापरवाही कहां रही, कौन दोषी है, इस मामले में जब पुलिस अधीक्षक सभाराज से बात करने के लिए उनका नंबर डायल किया गया तो उनका सीयूजी मोबाइल पीआरओ धर्मेंद्र यादव ने रिसीव किया।
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बोले, साहब व्यस्त हैं। मामला पूछने के बाद पीआरओ बोले, कुछ सहायता पहले दी जा चुकी है। इस संबंध में साहब बात नहीं करेंगे। एएसपी नगर को बयान का प्रभारी बनाया है।
बख्से नहीं जाएंगे लापरवाह
नगर मजिस्ट्रेट प्रदीप कुमार यादव ने कहा कि वे दुष्कर्म पीड़िता के मामले में जांच कर रहे हैं। पुलिस महकमे की ओर से डीएनए रिपोर्ट मंगाने में इतनी देर क्यों हुई, इसकी जांच ज्वॉइंट मजिस्ट्रेट कर रहे हैं।
कुछ खामियां उजागर हुई हैं। जांच पूरी होते ही पूरी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपेंगे। इसके बाद लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई होगी।
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वह अपने साथ बेटे की सुरक्षा को लेकर चिंतित है लेकिन जिले के सुरक्षा तंत्र के आला हाकिम को दुष्कर्म पीड़िता की शायद चिंता नहीं है।
पीड़िता के मामले में लापरवाही क्यों बरती जा रही, इस मामले में जब एसपी से बात करने की कोशिश की गई तो फोन पीआरओ ने रिसीव किया। बोले, इस मामले में साहब बात नहीं करेंगे। बयान के लिए एएसपी नगर प्रभारी बनाए गए हैं।
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14 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता अपनों से तो छली ही गई अब सिस्टम से भी छली जा रही है। पीड़िता के साथ हुए दुष्कर्म का केस 2016 में दर्ज हुआ।
इसके बाद डीएनए परीक्षण की कवायद शुरू हुई। वर्ष 2017 के शुरुआती दौर में डीएनए परीक्षण के लिए सैंपल भेजा गया, लेकिन अब तक रिपोर्ट नहीं आ सकी है।
केस दर्ज होने के साथ ही पुलिस ने भी माना कि घटना सत्य है। फिर भी पीड़िता को मुआवजे की आधी राशि तक नहीं मिली।
लापरवाही कहां रही, कौन दोषी है, इस मामले में जब पुलिस अधीक्षक सभाराज से बात करने के लिए उनका नंबर डायल किया गया तो उनका सीयूजी मोबाइल पीआरओ धर्मेंद्र यादव ने रिसीव किया।
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बोले, साहब व्यस्त हैं। मामला पूछने के बाद पीआरओ बोले, कुछ सहायता पहले दी जा चुकी है। इस संबंध में साहब बात नहीं करेंगे। एएसपी नगर को बयान का प्रभारी बनाया है।
बख्से नहीं जाएंगे लापरवाह
नगर मजिस्ट्रेट प्रदीप कुमार यादव ने कहा कि वे दुष्कर्म पीड़िता के मामले में जांच कर रहे हैं। पुलिस महकमे की ओर से डीएनए रिपोर्ट मंगाने में इतनी देर क्यों हुई, इसकी जांच ज्वॉइंट मजिस्ट्रेट कर रहे हैं।
कुछ खामियां उजागर हुई हैं। जांच पूरी होते ही पूरी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपेंगे। इसके बाद लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई होगी।