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यूपी: स्कूटर बनाने वाले कर रहे हाईटेक रोडवेज बसों की मरम्मत, मैकेनिकों के 78 फीसदी पद खाली

Sun, 29 Oct 2023 04:53 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 29 Oct 2023 04:53 PM IST
सार

यूपी में रोडवेज के सभी डिपो में कुल 11619 पद हैं जिनमें से 9149 पद खाली हैं। हाइटेक बसों की मरम्मत स्कूटर बनाने वाले मैकेनिक कर रहे हैं। बीएस-4 और बीएस- 6 मॉडल के इंजन बनाने वाले मैकेनिक ही नहीं हैं।

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78 percent posts of mechanics of UP roadways are vacant.
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

स्टीयरिंग फेल होना, ब्रेक का काम नहीं करना, इंजन से धुंआ उठना, एसी कूलिंग ठप होने जैसी शिकायतें रोडवेज बसों में आम बात हैं। ऐसी शिकायतों पर विराम लगे भी तो कैसे, जब मरम्मत के लिए पर्याप्त मैकेनिक ही नहीं हैं। रोडवेज में मैकेनिक के करीब 78 फीसदी पद खाली हैं। यह हाल प्रदेश के सभी 115 बस डिपो का है। हाईटेक बसों की मरम्मत के लिए तो विशेषज्ञ मैकेनिक ही नहीं हैं। सभी डिपो हाईटेक बसों की मरम्मत करने वाले कर्मियों की कमी से जूझ रहे हैं।

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मरम्मत न होने से बड़ी संख्या में बसें डिपो से ही नहीं निकल नहीं पाती हैं। इससे रोडवेज को राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। सभी डिपो में ढाई हजार बीएस-4 व बीएस-6 मॉडल की बसों के इंजन बनाने वाले मैकेनिक ही नहीं हैं। मैकेनिकों के कुल 11619 पदों में सिर्फ 2470 पदों पर तैनाती है। 9149 पद खाली हैं। अफसर बताते हैं कि वर्तमान में तैनात मैकेनिकों में तमाम की उम्र पचास पार हो चुकी है, जिससे काम प्रभावित हो रहा है। आउटसोर्स से जिन कर्मचारियों को भर्ती किया गया है, वे काबिल नहीं हैं। यही वजह है कि रोडवेज प्रशासन डिपो में बसों की मरम्मत निजी हाथों में देने की तैयारी कर रहा है।
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हाईटेक बसों की मरम्मत के लिए टेक्नोलॉजी से भी अनजान
वर्कशॉप में बसों की मरम्मत ऐसे मैकेनिक भी कर रहे हैं, जो पहले स्कूटर बनाते थे। इनकी भर्ती निजी एजेंसी के जरिये की गई है। ये पढ़े-लिखे भी नहीं हैं और हाईटेक बसों की मरम्मत के लिए टेक्नोलॉजी से भी अनजान हैं। आईटीआई पास जो मैकेनिक मिल भी रहे हैं, उनकी ट्रेनिंग पुराने ढर्रे पर हुई है, जिससे रोडवेज को उन्हें प्रशिक्षित करना पड़ता है।

आईटीआई में दी जाती है सिर्फ बेसिक ट्रेनिंग
आईटीआई के एक अधिकारी ने कहा कि पढ़ाई के दौरान विद्यार्थियों को सिलेबस आधारित बेसिक जानकारी व ट्रेनिंग दी जाती है। अगर किसी विभाग को विशेषज्ञ युवाओं की जरूरत है तो उन्हें अपने यहां अप्रेंटिस कराकर जरूरत के अनुसार तैयार कर सकते हैं। एक-दो साल के कोर्स में युवाओं को पूरी तरह से ट्रेंड नहीं किया जा सकता क्योंकि वे पूरी तरह से अपरिपक्व होते हैं।

रोडवेज के मुख्य प्रधान प्रबंधक (प्राविधिक) आरएन वर्मा का कहना है कि वर्कशॉप में विशेषज्ञ मैकेनिकों की बहुत कमी है। जो मैकेनिक तैनात हैं, वे या तो उम्रदराज हैं या उनकी क्षमता कम है। जल्द ही तीन विभिन्न पदों पर मैकेनिकों की भर्ती कर मेंटीनेंस कर बसों को रोड पर उतारा जाएगा।

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