Lucknow News : टेक्सटाइल यूनिट लगाने पर 75 फीसदी अनुदान, यूपी वस्त्र एवं गारमेंटिंग पॉलिसी का शासनादेश जारी
हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग और एमएसएमई मंत्री राकेश सचान ने सोमवार को कहा कि यूपी वस्त्र एवं गारमेंटिंग पॉलिसी-2022 के तहत प्रदेश या प्रदेश के बाहर 50 आउटलेट खोलने पर सरकार 2 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देगी।
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यूपी में टेक्सटाइल की यूनिट लगाने पर लागत का 75 फीसदी तक अनुदान दिया जाएगा। हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग और एमएसएमई मंत्री राकेश सचान ने कहा कि यूपी वस्त्र एवं गारमेंटिंग पॉलिसी-2022 का उद्देश्य प्रदेश में टेक्सटाइल के क्षेत्र में निवेश बढ़ाना है। लोकभवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि नई नीति से 10 हजार करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य है। इससे रोजगार के पांच लाख नए अवसर सृजित होंगे। नई पॉलिसी का शासनादेश सोमवार को जारी हो गया।
टेक्सटाइल आउटलेट खोलने पर भारी भरकम वित्तीय सहायता
हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग और एमएसएमई मंत्री राकेश सचान ने सोमवार को कहा कि यूपी वस्त्र एवं गारमेंटिंग पॉलिसी-2022 के तहत प्रदेश या प्रदेश के बाहर 50 आउटलेट खोलने पर सरकार 2 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देगी। बशर्ते तीन वर्ष तक सभी आउटलेट से 4 करोड़ रुपये प्रति वर्ष बिक्री की गई हो।
उन्होंने बताया कि 100 आउटलेट खोलने पर 4 करोड़ की वित्तीय सहायता दी जाएगी, लेकिन तीन वर्ष तक सभी आउटलेट से प्रति वर्ष 8 करोड़ की बिक्री जरूरी होगी। 200 आउटलेट खोलने पर 8 करोड़ दिए जाएंगे, इसके लिए भी तीन वर्ष तक सभी आउटलेट पर प्रति वर्ष 16 करोड़ रुपये की बिक्री अनिवार्य होगी। 500 आउटलेट खोलने पर 10 करोड़ दिए जाएंगे, लेकिन तीन वर्ष तक सभी आउटलेट पर प्रति वर्ष 20 करोड़ की बिक्री जरूरी होगी। 80 प्रतिशत आउटलेट प्रदेश के बाहर स्थापित करने, देश के बाहर 25 आउटलेट खोलने और कम से कम 2 करोड़ रुपये की प्रति वर्ष बिक्री करने वाले उद्यमी को 2 करोड़ रुपये अतिरिक्त अनुदान देय होगा। सचान ने कहा कि युवाओं को स्वरोजगार के प्रति आकर्षित कर हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग के क्षेत्र में उत्पादन, डिजाइन, विपणन और निर्यात में नया रोजगार शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। बुनकर के बच्चों को अपना रोजगार शुरू करने के लिए वरीयता दी जाएगी। इसके लिए उन्हें यूपीसीडा, गीडा, नोएडा, ग्रेटर नोएडा या अन्य प्राधिकरणों से भूमि खरीद में वरीयता मिलेगी।
वर्ष 2017 की पॉलिसी में एक इकाई को भुगतान
सचान ने एक सवाल के जवाब में बताया कि वर्ष 2017 में लाई गई टेक्सटाइल पॉलिसी के तहत अब तक एक इकाई के लिए देय राशि का भुगतान किया गया है। यह राशि 25 लाख रुपये है। वहीं, 31 इकाइयों के मामलों में यह प्रक्रियाधीन है। कुल 128 परियोजनाएं स्थापित हो रही हैं।
किसे कितना अनुदान
- इंडियन इंस्टीट्यूट आफ हैंडलूम टेकभनोलॉजी (आईआईएचटी) से तीन वर्षीय डिप्लोमा करने वाले एक शेड में 5 से 20 हथकरघा इकाई लगाते हैं तो उन्हें लागत का 75 फीसदी या अधिकतम 20 लाख रुपये प्रति व्यक्ति या प्रति समूह अनुदान मिलेगा। अगर 5 से 10 पॉवरलूम की स्थापना करते हैं तो अधिकतम 60 लाख रुपये प्रति व्यक्ति या प्रति समूह अनुदान मिलेगा।
- फ्लैटेड फैक्टरी के किराए पर 5 वर्ष तक 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। इस क्षेत्र में प्लांट स्थापित करने पर एवं मशीनरी व अवस्थापना लागत का 75 फीसदी या अधिकतम 25 लाख रुपये प्रति उद्यमी अनुदान मिलेगा।
- टेक्सटाइल डिजाइन, फैशन डिजाइन या फैशन ब्रांडिंग व मार्केटिंग में स्नातक को डिजाइन स्टूडियो स्थापित करने पर अधिकतम अधिकतम 30 लाख रुपये प्रति उद्यमी दिया जाएगा। मार्केटिंग कंपनी का पंजीकरण कराने और उसे स्थापित करने के लिए आवश्यक अवस्थापना सुविधाओं के लिए अधिकतम 50 लाख प्रति कंपनी देय होगा।
- औद्योगिक प्राधिकरणों और सरकारी विभागों की ओर से विकसित औद्योगिक क्षेत्रों में वस्त्र एवं गारमेंटिंग इकाइयों के लिए भूमि लागत का 25 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। राज्य या केंद्र सरकार या उनके उपक्रमों से भूमि खरीद पर स्टांप ड्यूटी में 100 प्रतिशत और गौतमबुद्धनगर में 75 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।
ये लाभ भी मिलेंगे
- प्लांट एवं मशीनरी के खरीद पर 25 प्रतिशत कैपिटल सब्सिडी। बुंदेलखंड में 10 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी।
- अवस्थापना सुविधाओं के लिए 3 करोड़ तक का अनुदान। एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) और डीजी सेटों की स्थापना के लिए 5 करोड़ तक का अनुदान।
- वार्षिक ब्याज की कुल राशि का 60 प्रतिशत ब्याज उपादान।
- नई इकाइयों को इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी में 100 प्रतिशत छूट 10 वर्षों तक।
- मेगा एवं सुपर मेगा गारमेंटिंग इकाइयाें को 3200 रुपये प्रति श्रमिक प्रति माह रोजगार सृजन अनुदान और माल भाड़े में छूट 5 वर्षों तक।
- रेशम रीलिंग इकाई को 20 प्रतिशत कैपिटल सब्सिडी।
- पीएम मित्र पार्क में स्थापित वस्त्र इकाइयाें के लिए बिजली टैरिफ में 2 प्रतिशत प्रति यूनिट की छूट 5 वर्ष तक। इस अनुदान की सीमा प्रति इकाई प्रति वर्ष 60 लाख रुपये होगी।
- नए एक्सपोर्ट हाउस या कंपनी शुरू करने पर पंजीकरण शुल्क की 75 प्रतिशत प्रतिपूर्ति। अवस्थापना सुविधाओं के लिए परियोजना लागत का 75 फीसदी अनुदान।
- 20 लाख रुपये प्रति बायर-सेलर मीट व्यय किया जाएगा। निर्यात से संबंधित संस्था अगर अपने स्तर से यह आयोजन कराती है तो अधिकतम 10 लाख की प्रतिपूर्ति।
- प्रदेश के दो बड़े महानगरों में फैशन शो होगा। अधिकतम 20 लाख रुपये प्रति शो खर्च किया जाएगा।
- प्रति वर्ष 14 दिवसीय यूपी हैंडलूम, सिल्क एवं खादी एक्सपो पर 70 लाख रुपये व्यय।