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आंगन में बैठे बच्चे को बाघ ने बनाया निवाला
Updated Wed, 25 Oct 2017 12:02 AM IST
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परिवारीजन और ग्रामीण दौड़े, फिर भी नहीं बच सकी जान
उर्रा (बहराइच)। अमृतपुर पुरैना गांव में मंगलवार देर रात आंगन में चारपाई पर बैठे एक बच्चे को बाघ ने अपना निवाला बना लिया। परिवार के लोग व ग्रामीण दौड़े, लेकिन जान नहीं बच सकी। घर में कोहराम मच गया है। वहीं गांव के लोग दहशत में हैं। डीएफओ व वार्डेन घटनास्थल के लिए रवाना हो गए हैं।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र से सटे गांवों में बाघ और तेंदुओं के हमले अचानक बढ़ गए हैं। मंगलवार रात करीब 8 बजे मुर्तिहा रेंज में स्थित अमृतपुर पुरैना खल्ला गांव निवासी निक्कू का 10 वर्षीय पुत्र रामसागर आंगन में चारपाई पर खेल रहा था। दरवाजा खुला हुआ था।
इसी दौरान घर में पहुंचा बाघ दहाड़ते हुए झपट्टा मारकर रामसागर को खींच ले गया। परिवारीजन व गांव के लोगों ने हांका लगाना शुरू किया। लेकिन बाघ रामसागर को लेकर गन्ने के खेत में घुस गया। गांव के लोगों ने मशाल जलाकर चाराें तरफ से खेत को घेरा।
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एक घंटे बाद बाघ खेत से खिसका। मौके पर रामसागर का क्षतविक्षत शव मिला है। घर में चीखपुकार मच गई है। परिवारीजन पछाड़े खा-खाकर गिर रहे हैं। घटना की सूचना पाकर कतर्नियाघाट सेंक्चुरी के प्रभागीय वनाधिकारी जीपी सिंह दुधवा नेशनल पार्क के वार्डेन सीताराम अहिरवार के साथ गांव रवाना हो गए थे।
डीएफओ ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि मौके पर पहुंचकर कुछ बता पाएंगे। फिलहाल वनकर्मियों की टीम भी गांव रवाना कर दी गई है। ग्रामीणों को सजग रहने के निर्देश दिए गए हैं।
दो दिन में हुआ तीन हमला
अमृतपुर पुरैना गांव बाघ और तेंदुओं के निशाने पर है। दो दिन में तीन हमले हो चुके हैं। दो हमले तेंदुओं ने किए। दो दिन पूर्व तेंदुआ ने भी एक मासूम को निवाला बना लिया था। वहीं एक युवक हमले में जख्मी हुआ। अब बाघ के हमले के बाद गांव के लोग पूरी तरह असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
‘अमर उजाला’ ने पहले ही चेताया था
बाघ और तेंदुओं के हमले के मामले में ‘अमर उजाला’ ने पहले ही वन क्षेत्र में निवास करने वालों को चेताया था। विशेषज्ञों द्वारा बताया गया था कि मौसम परिवर्तन के साथ गन्ने और धान की फसल के चलते हमलों में इजाफा हो सकता है। इसके बावजूद वन क्षेत्र से जुड़े ग्रामीणों की सुरक्षा के कोई बेहतर उपाय नहीं हो सके हैं। लिहाजा ताबड़तोड़ हमले हो रहे हैं।
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उर्रा (बहराइच)। अमृतपुर पुरैना गांव में मंगलवार देर रात आंगन में चारपाई पर बैठे एक बच्चे को बाघ ने अपना निवाला बना लिया। परिवार के लोग व ग्रामीण दौड़े, लेकिन जान नहीं बच सकी। घर में कोहराम मच गया है। वहीं गांव के लोग दहशत में हैं। डीएफओ व वार्डेन घटनास्थल के लिए रवाना हो गए हैं।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र से सटे गांवों में बाघ और तेंदुओं के हमले अचानक बढ़ गए हैं। मंगलवार रात करीब 8 बजे मुर्तिहा रेंज में स्थित अमृतपुर पुरैना खल्ला गांव निवासी निक्कू का 10 वर्षीय पुत्र रामसागर आंगन में चारपाई पर खेल रहा था। दरवाजा खुला हुआ था।
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इसी दौरान घर में पहुंचा बाघ दहाड़ते हुए झपट्टा मारकर रामसागर को खींच ले गया। परिवारीजन व गांव के लोगों ने हांका लगाना शुरू किया। लेकिन बाघ रामसागर को लेकर गन्ने के खेत में घुस गया। गांव के लोगों ने मशाल जलाकर चाराें तरफ से खेत को घेरा।
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एक घंटे बाद बाघ खेत से खिसका। मौके पर रामसागर का क्षतविक्षत शव मिला है। घर में चीखपुकार मच गई है। परिवारीजन पछाड़े खा-खाकर गिर रहे हैं। घटना की सूचना पाकर कतर्नियाघाट सेंक्चुरी के प्रभागीय वनाधिकारी जीपी सिंह दुधवा नेशनल पार्क के वार्डेन सीताराम अहिरवार के साथ गांव रवाना हो गए थे।
डीएफओ ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि मौके पर पहुंचकर कुछ बता पाएंगे। फिलहाल वनकर्मियों की टीम भी गांव रवाना कर दी गई है। ग्रामीणों को सजग रहने के निर्देश दिए गए हैं।
दो दिन में हुआ तीन हमला
अमृतपुर पुरैना गांव बाघ और तेंदुओं के निशाने पर है। दो दिन में तीन हमले हो चुके हैं। दो हमले तेंदुओं ने किए। दो दिन पूर्व तेंदुआ ने भी एक मासूम को निवाला बना लिया था। वहीं एक युवक हमले में जख्मी हुआ। अब बाघ के हमले के बाद गांव के लोग पूरी तरह असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
‘अमर उजाला’ ने पहले ही चेताया था
बाघ और तेंदुओं के हमले के मामले में ‘अमर उजाला’ ने पहले ही वन क्षेत्र में निवास करने वालों को चेताया था। विशेषज्ञों द्वारा बताया गया था कि मौसम परिवर्तन के साथ गन्ने और धान की फसल के चलते हमलों में इजाफा हो सकता है। इसके बावजूद वन क्षेत्र से जुड़े ग्रामीणों की सुरक्षा के कोई बेहतर उपाय नहीं हो सके हैं। लिहाजा ताबड़तोड़ हमले हो रहे हैं।