पॉश इलाकों में लंबे समय से क्यों खाली पड़े हैं 500 फ्लैट
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अपराधी एलडीए के अपार्टमेंट्स को शरणस्थली बना रहे हैं। इसकी वजह यह है कि लोग मोटे मुनाफे के लिए फ्लैट ले तो लेते हैं लेकिन बिना जांच के अपराधियों को किराए पर दे देते हैं।
सबसे बुरा हाल प्राधिकरण की सबसे बड़ी ग्रुप हाउसिंग कॉलोनी रिवर व्यू एन्क्लेव का है। यहां दो फेज में बनाए गए करीब 1700 फ्लैटों में से कम से कम 35 फीसदी केवल निवेश के लिए खरीदे गए हैं।
जिनमें कोई रहता नहीं है। करीब 300 फ्लैट आवंटी डिफाल्टर घोषित किये जा चुके हैं, उनको निरस्तीकरण का नोटिस भी दिया जा चुका है। इसके अलावा रजिस्ट्री होने के बावजूद सैकड़ों की संख्या में आवंटी फ्लैट में रह नहीं रहे हैं।
इस वजह से ये अपराधियों के मुफीद ठिकाने बन गए हैं। अधिकांश खाली फ्लैटों की किस्तें भी पूरी नहीं हैं। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ने अब नये सिरे से डिफाल्टर और रजिस्ट्री के बावजूद कब्जा न लेने वाले आवंटियों को नोटिस जारी करने के लिए आदेश दिए हैं।
साथ ही सभी अपार्टमेंट्स में सुरक्षा रिव्यू करने का भी फैसला किया है। सभी जगह क्लोज सर्किट कैमरे नये सिर से जांचे जाएंगे और सिक्योरिटी सिस्टम को मजबूत किया जाएगा।
पांच साल में तीन गुनी हुई कीमत
साल 2009 में पहली बार अपार्टमेंट्स स्कीम लांच की गई थी तब मुकेश कुमार मेश्राम के एलडीए के वीसी थे। उस समय गोमती नगर विस्तार में प्राधिकरण के पास बहुत काफी जमीन थी।
यहां सबसे पहले रिवर व्यू एन्क्लेव फेज-1 और 2 का पंजीकरण किया गया। 1700 फ्लैट बनाए गए। इसके साथ ही वनस्थली, ग्रीनवुड, कल्पतरु, सहज और सुलभ आवासीय योजनाओं के फ्लैटों का भी निर्माण शुरू हुआ।
लगभग 5000 फ्लैट बनाए गए। जिनमें सबसे हाईप्रोफाइल रिवर व्यू अपार्टमेंट है। 2010 में जो फ्लैट 20 लाख रुपये का एलडीए ने आवंटित किया था।
उसकी कीमत अब करीब 60 लाख रुपये पहुंच गई है। इसी के चलते यहां लोगों ने निवेश को बेहतर विकल्प माना। बड़े बड़े धन्ना सेठों ने यहां बुकिंग करवाई थी।
जिनके पास आवास की समस्या नहीं है। ऐसे में रिवर व्यू एन्क्लेव के फ्लैट को किराये पर देकर या खाली छोड़ कर वे आराम से दाम बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं। और यहां अपराधी शरण ले रहे हैं।