32 शहरों ने किया खुले में शौच मुक्त का दावा, स्वच्छता के प्रयास में लखनऊ 13वें स्थान पर
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32 शहरों ने खुद को खुले में शौचमुक्त घोषित करने के लिए दावा किया है। अक्तूबर 2018 तक प्रदेश के सभी शहरों को खुले में शौचमुक्त घोषित किया जाना है। चार जनवरी से शुरू हुए स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 में राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के सभी जिलों की रैकिंग सुधारने के लिए सरकार ने कमर कसी है। नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने सचिवालय में शनिवार को पत्रकारों को यह जानकारी दी।
खन्ना ने पत्रकारों से कहा कि गत वर्ष 434 शहरों के बीच स्वच्छता सर्वेक्षण हुआ था जबकि इस वर्ष देश के 4041 शहरों के बीच स्वच्छता सर्वेक्षण चल रहा है। इसमें स्वच्छता के आधार पर शहरों की रैंकिंग की जाएगी। 4000 अंकों में से 1400 अंक सेवा स्तर की प्रगति, 1000 अंक प्रत्यक्ष सर्वेक्षण और 1600 अंक नागरिकों की प्रतिक्रिया के हैं।
उन्होंने कहा कि स्वच्छता सर्वेक्षण में आम जनता की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। सर्वे में लोगों की प्रतिक्रिया जानने के लिए 1400 अंक के नौ सवाल पूछे जाएंगे। जनता के जवाब के आधार पर अंक दिए जाएंगे। इसलिए इसमें जनता की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है।
सभी निकायों को आवश्यकता के अनुसार सफाई कर्मचारियों की भर्ती और आउटसोर्सिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। सुरेश खन्ना ने बताया कि अप्रैल से दिसम्बर 2017 तक स्वच्छता के प्रयास में लखनऊ 13वें स्थान पर रहा है जबकि कानपुर प्रदेश में पहले स्थान पर रहा है।
348 शेल्टर होम में 20412 ने आश्रय लिया
खन्ना ने कहा कि 18 दिसम्बर से 4 जनवरी तक प्रदेश में 169 स्थायी और 179 अस्थायी रैन बसेरों में गरीबों के रुकने की व्यवस्था है। इनमें 20412 शहरी गरीबों ने आश्रय लिया है। गरीबों को शेल्टर होम तक लाने का प्रयास सफल नहीं हो पा रहा है। वह मंदिरों, धर्मशालाओं या अन्य स्थान जहां उन्हें कंबल, अलाव, भोजन की सुविधा मिलती है ठहरते हैं। सरकार भी आश्रय स्थलों में किचन, अलमारी और अन्य सुविधाएं उपलब्ध करा रही है।
2.82 लाख प्रधानमंत्री आवासों को मंजूरी
नगर विकास मंत्री ने कहा कि प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत कुल 2,82,248 आवासों को मंजूरी दी गई है। व्यक्ति निर्माण (नवीन) योजना में 2,63,650 आवासों की 735 परियोजनाओं का निर्माण सूडा द्वारा स्वीकृत किया गया है। आवास विकास एवं विकास प्राधिकरणों द्वारा 20 परियोजनाओं में 18,598 आवासों की मंजूरी दी गई है।
राजधानी में व्यापारी खुद हटा लें अतिक्रमण
सुरेश खन्ना ने बताया कि लखनऊ में व्यापार मंडलों से बात कर उन्हें स्वयं ही अतिक्रमण हटाने के लिए कहा गया है। यदि व्यापारियों ने स्वयं अतिक्रमण नहीं हटाए तो सरकार हर हाल में अतिक्रमण हटाएगी। दो महीने बाद अतिक्रमण की शिकायत का मौका नहीं मिलेगा। इस बीच 3563 किलोमीटर लंबी शहरी गड्ढायुक्त सड़कों में से अभी तक 3229 किमी सड़कों को गड्ढामुक्त किया गया है।