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तटबंध टूटा तो गोंडा तक मचेगी तबाही
Updated Tue, 15 May 2018 10:48 PM IST
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बहराइच। मानसून आहट दे रहा है लेकिन अब तक बेलहा-बेहरौली व आदमपुर रेवली तटबंध की सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। पचदेवरी व पिपरा गांव के निकट नदी और तटबंध की दूरी महज 200 मीटर के आसपास है। आदमपुर-रेवली और बेलहा-बेहरौली तटबंध भी जर्जर है।
रेनकट और रेटहोल मुसीबत बन सकते हैं। अगर तटबंध पर नदी ने थपेड़े लिया तो उसके कटने पर गोंडा तक तबाही मच सकती है। घाघरा नदी की लहरें प्रति वर्ष महसी, कैसरगंज और नानपारा आंशिक क्षेत्र में तबाही मचाती हैं। लगभग पौने तीन लाख की आबादी बाढ़ की चपेट में आती है।
सैकड़ों लोगों को अपने घर व खेत से हाथ धोना पड़ता है। बाढ़ खंड के अभियंताओं की रिपोर्ट पर नजर डालें तो प्रति वर्ष औसतन घाघरा नदी 300 मीटर की दूरी में कटान करती है। इसके कारण नदी इस समय महसी तहसील के पचदेवरी व पिपरा गांव के निकट 200 मीटर के फासले पर बह रही है।
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15 जून के आसपास तराई में झमाझम बरसात शुरू होती है। मानसून आने में महज एक माह शेष है। लेकिन अब तक कोई बचाव के कार्य नहीं शुरू किए गए हैं। जबकि नदी का जलस्तर भी धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। कभी भी कटान शुरू हो सकती है। 15 जुलाई से 15 अगस्त के मध्य जिले में बाढ़ की स्थिति रहती है।
घाघरा की लहरें आदमपुर रेवली और बेलहा-बेहरौली तटबंध पर थपेड़े लेती हैं। लेकिन जर्जर तटबंधों की सुरक्षा के कोई उपाय नहीं किये गये हैं। ऐसे में अगर यह तटबंध टूटा तो बहराइच के पूर्वी, दक्षिणी और उत्तरी हिस्से में तो तबाही मचेगी। गोंडा के 2.17 लाख व श्रावस्ती की लगभग एक लाख 9 हजार की आबादी चपेट में आ सकती है।
तटबंध की सुरक्षा के लिए सरयू ड्रेनेज खड प्रथम की ओर से बीते वर्ष प्रस्ताव तैयार किया गया था। लेकिन महज खानापूर्ति हुई। मालूम हो कि बीते वर्ष घूरदेवी से बिसवां के मध्य बाढ़ की विभीषका के कारण तीन स्थानों पर तटबंध धंसा था। बड़ी मुश्किल से स्थिति नियंत्रण में आई थी।
बेलहा-बेहरौली तटबंध कटने से मिट चुके 12 गांवों के निशान
वर्ष 1984 में ग्राम संगवा के निकट मरम्मत की अनदेखी के कारण बेलहा-बेहरौली तटबंध कटा था। रातों रात 12 राजस्व गांव नक्से से मिट गए थे। 385 परिवार लापता हुए थे। बड़े पैमाने पर घाघरा के पानी ने तबाही मचायी थी।
21 करोड़ का भेजा है प्रस्ताव
बेलहा-बेहरौली तटबंध के रेनकट और रेटहोल बाढ़ के समय समस्या बन सकते हैं। इस मामले में बीते सप्ताह बैठक हुई है। तटबंध के जर्जर स्थलों को चिन्हित करने के लिए सिंचाई विभाग के अभियंताओं को दिशा निर्देश दिए गए हैं।
तीन स्थानों पर स्टड निर्माण को मंजूरी के लिए 21 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया है। जिलाधिकारी ने भी क्षेत्र का मुआयना कर स्थिति देखी है। सिंचाई विभाग को निरोधात्मक कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। शीघ्र ही तटबंध की मरम्मत भी करवाई जाएगी। पुन: निरीक्षण करेंगे, जहां कमी होगी, उसे दुरुस्त किया जाएगा।
-गुलाम सरवर, उप जिलाधिकारी महसी
प्रशासन की उदासीनता का झेल रहे खामियाजा
बाढ़ व कटान प्रभावित मुरौवा, मुंसारी, अटोडर व नौबस्ता के निवासी काफी आहत हैं। मुरौवा गांव निवासी प्रमोद व मुरली प्रसाद का कहना है कि बाढ़ के पूर्व सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। बाढ़ आने पर प्रशासन सक्रियता दिखाता है। दो वर्ष पूर्व मकान कटा था, आज तक मुआवजा नहीं मिला है।
पांडेयपुरवा निवासी मुन्नी देवी का कहना है कि तीन वर्ष पूर्व मकान कटा था, तब से झोपड़ी बनाकर रह रही हैं। आज तक जमीन नहीं मिली है। अधिकारी सुनते नहीं। बाढ़ आने पर बजट का वारा-न्यारा शुरू हो जाता है।
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रेनकट और रेटहोल मुसीबत बन सकते हैं। अगर तटबंध पर नदी ने थपेड़े लिया तो उसके कटने पर गोंडा तक तबाही मच सकती है। घाघरा नदी की लहरें प्रति वर्ष महसी, कैसरगंज और नानपारा आंशिक क्षेत्र में तबाही मचाती हैं। लगभग पौने तीन लाख की आबादी बाढ़ की चपेट में आती है।
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सैकड़ों लोगों को अपने घर व खेत से हाथ धोना पड़ता है। बाढ़ खंड के अभियंताओं की रिपोर्ट पर नजर डालें तो प्रति वर्ष औसतन घाघरा नदी 300 मीटर की दूरी में कटान करती है। इसके कारण नदी इस समय महसी तहसील के पचदेवरी व पिपरा गांव के निकट 200 मीटर के फासले पर बह रही है।
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15 जून के आसपास तराई में झमाझम बरसात शुरू होती है। मानसून आने में महज एक माह शेष है। लेकिन अब तक कोई बचाव के कार्य नहीं शुरू किए गए हैं। जबकि नदी का जलस्तर भी धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। कभी भी कटान शुरू हो सकती है। 15 जुलाई से 15 अगस्त के मध्य जिले में बाढ़ की स्थिति रहती है।
घाघरा की लहरें आदमपुर रेवली और बेलहा-बेहरौली तटबंध पर थपेड़े लेती हैं। लेकिन जर्जर तटबंधों की सुरक्षा के कोई उपाय नहीं किये गये हैं। ऐसे में अगर यह तटबंध टूटा तो बहराइच के पूर्वी, दक्षिणी और उत्तरी हिस्से में तो तबाही मचेगी। गोंडा के 2.17 लाख व श्रावस्ती की लगभग एक लाख 9 हजार की आबादी चपेट में आ सकती है।
तटबंध की सुरक्षा के लिए सरयू ड्रेनेज खड प्रथम की ओर से बीते वर्ष प्रस्ताव तैयार किया गया था। लेकिन महज खानापूर्ति हुई। मालूम हो कि बीते वर्ष घूरदेवी से बिसवां के मध्य बाढ़ की विभीषका के कारण तीन स्थानों पर तटबंध धंसा था। बड़ी मुश्किल से स्थिति नियंत्रण में आई थी।
बेलहा-बेहरौली तटबंध कटने से मिट चुके 12 गांवों के निशान
वर्ष 1984 में ग्राम संगवा के निकट मरम्मत की अनदेखी के कारण बेलहा-बेहरौली तटबंध कटा था। रातों रात 12 राजस्व गांव नक्से से मिट गए थे। 385 परिवार लापता हुए थे। बड़े पैमाने पर घाघरा के पानी ने तबाही मचायी थी।
21 करोड़ का भेजा है प्रस्ताव
बेलहा-बेहरौली तटबंध के रेनकट और रेटहोल बाढ़ के समय समस्या बन सकते हैं। इस मामले में बीते सप्ताह बैठक हुई है। तटबंध के जर्जर स्थलों को चिन्हित करने के लिए सिंचाई विभाग के अभियंताओं को दिशा निर्देश दिए गए हैं।
तीन स्थानों पर स्टड निर्माण को मंजूरी के लिए 21 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया है। जिलाधिकारी ने भी क्षेत्र का मुआयना कर स्थिति देखी है। सिंचाई विभाग को निरोधात्मक कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। शीघ्र ही तटबंध की मरम्मत भी करवाई जाएगी। पुन: निरीक्षण करेंगे, जहां कमी होगी, उसे दुरुस्त किया जाएगा।
-गुलाम सरवर, उप जिलाधिकारी महसी
प्रशासन की उदासीनता का झेल रहे खामियाजा
बाढ़ व कटान प्रभावित मुरौवा, मुंसारी, अटोडर व नौबस्ता के निवासी काफी आहत हैं। मुरौवा गांव निवासी प्रमोद व मुरली प्रसाद का कहना है कि बाढ़ के पूर्व सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। बाढ़ आने पर प्रशासन सक्रियता दिखाता है। दो वर्ष पूर्व मकान कटा था, आज तक मुआवजा नहीं मिला है।
पांडेयपुरवा निवासी मुन्नी देवी का कहना है कि तीन वर्ष पूर्व मकान कटा था, तब से झोपड़ी बनाकर रह रही हैं। आज तक जमीन नहीं मिली है। अधिकारी सुनते नहीं। बाढ़ आने पर बजट का वारा-न्यारा शुरू हो जाता है।