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एक तिहाई डॉक्टरों की चाहत, हिंदी में हो डॉक्टरी की पढ़ाई
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लखनऊ। करीब 31.4 प्रतिशत डॉक्टर चाहते हैं कि मेडिकल एजुकेशन हिंदी में हो, ताकि अंग्रेजी में कमजोर छात्र भी इसे आसानी से पढ़ सके। चिकित्सक मानते हैं कि हिंदी में मेडिकल एजुकेशन अंग्रेजी की अपेक्षा अधिक प्रभावशाली है। चिकित्सा शिक्षा पद्धति में हिंदी के उपयोग पर देश में किए सर्वे में यह बात सामने आई है। यह सर्वे एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. पंकज अग्रवाल ने किया। वह बुधवार को केजीएमयू के फिजियोलॉजी विभाग के 110वें स्थापना दिवस समारोह में थे।
डॉ. पंकज ने बताया कि मेडिकल एजुकेशन में हिंदी का प्रयोग पर 2350 डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों पर सर्वे किया। इसमें 31.4 प्रतिशत ने कहा कि हिंदी में मेडिकल एजुकेशन प्रभावी है। वहीं, 12.5 प्रतिशत ने कहा कि हिंदी में समझना आसान है। 10 फीसदी ने कहा कि यह सुविधाजनक है और 46.9 प्रतिशत ने कहा कि ये सभी प्वाइंट जरूरी हैं, यानी हिंदी में पढ़ाई करना हमारे लिए आसान है। 67 प्रतिशत लोगों ने कहा कि हिंदी में समझाने में कोई परेशानी नहीं है, इसलिए चिकित्सा में यह होनी चाहिए। समारोह में कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. बिपिन पुरी, फिजियोलॉजी विभाग की अध्यक्ष प्रो. सुनीता तिवारी व प्रो. नरसिंह वर्मा समेत कई डॉक्टर थे।
केस बेस्ड लर्निंग पर जोर
डॉ. पंकज ने कहा कि पढ़ाई में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होना चाहिए। ऑडियो-वीडियो से बच्चों को अधिक समझ में आ सकता है। उन्होंने केस बेस्ड लर्निंग पर भी जोर दिया। कहा कि यदि मरीज की परेशानी और उसके केस के बारे में छात्रों को पता चलेगा तो वे बेहतर डॉक्टर बनेंगे। उन्होंने प्रजेंटेशन को छात्रों से जोड़कर सवाल-जवाब से चर्चा की। समारोह में 2021 में पीजी की परीक्षा में सर्वाधिक अंक पाने वाली डॉ. शिबू अवस्थी को प्रो. एसके सिंह सर्वश्रेष्ठ पीजी छात्र का पुरस्कार दिया गया।
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डॉ. पंकज ने बताया कि मेडिकल एजुकेशन में हिंदी का प्रयोग पर 2350 डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों पर सर्वे किया। इसमें 31.4 प्रतिशत ने कहा कि हिंदी में मेडिकल एजुकेशन प्रभावी है। वहीं, 12.5 प्रतिशत ने कहा कि हिंदी में समझना आसान है। 10 फीसदी ने कहा कि यह सुविधाजनक है और 46.9 प्रतिशत ने कहा कि ये सभी प्वाइंट जरूरी हैं, यानी हिंदी में पढ़ाई करना हमारे लिए आसान है। 67 प्रतिशत लोगों ने कहा कि हिंदी में समझाने में कोई परेशानी नहीं है, इसलिए चिकित्सा में यह होनी चाहिए। समारोह में कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. बिपिन पुरी, फिजियोलॉजी विभाग की अध्यक्ष प्रो. सुनीता तिवारी व प्रो. नरसिंह वर्मा समेत कई डॉक्टर थे।
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केस बेस्ड लर्निंग पर जोर
डॉ. पंकज ने कहा कि पढ़ाई में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होना चाहिए। ऑडियो-वीडियो से बच्चों को अधिक समझ में आ सकता है। उन्होंने केस बेस्ड लर्निंग पर भी जोर दिया। कहा कि यदि मरीज की परेशानी और उसके केस के बारे में छात्रों को पता चलेगा तो वे बेहतर डॉक्टर बनेंगे। उन्होंने प्रजेंटेशन को छात्रों से जोड़कर सवाल-जवाब से चर्चा की। समारोह में 2021 में पीजी की परीक्षा में सर्वाधिक अंक पाने वाली डॉ. शिबू अवस्थी को प्रो. एसके सिंह सर्वश्रेष्ठ पीजी छात्र का पुरस्कार दिया गया।
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