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एक वो भी दौर, एक ये भी दौर है
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Mon, 09 Sep 2013 10:45 AM IST
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एक आईएएस अफसर हैं। पिछली सरकार में अहम ओहदे पर थे। इस सरकार में कोई अहम काम तो नहीं मिला लेकिन एक प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़े होने के नाते उनके दरबार में आने-जाने वाले हमेशा बने रहते हैं।
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मुखिया ने भले ही उन्हें गैर महत्व वाले विभाग की जिम्मेदारी दी लेकिन उनके ही भरोसेमंद एक वरिष्ठ मंत्री के वे बेहद खास हो चले हैं। साहब आजकल अपने दफ्तर में आने वाले लोगों के जरिए एक खास स्टडी कर रहे हैं।
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दिलचस्प सवाल पूछ रहे हैं कि मायावतीजी की सरकार के अंतिम डेढ़ साल और युवा होनहार सीएम के इन डेढ़ सालों में क्या बेसिक अंतर पाते हैं? बिल्कुल निष्पक्ष भाव से वे यह अंतर नोट करते हैं, प्वाइंटवार..नाम-पता..तर्कसहित..।
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हर मंडल के अलग-अलग क्षेत्र, जाति, धर्म से ताल्लुक रखने वाले करीब 200 लोग उनकी डायरी का हिस्सा बन चुके हैं।
अब लोग यह कयास लगा रहे हैं कि उनके इस डाटा कलेक्शन की वजह क्या है। वे यह जानना चाहते हैं कि इस स्टडी के पीछे उनका खुद का दिमाग है या पुरानी सरकार अथवा इस सरकार के भरोसेमंद मंत्रीजी का।