{"_id":"5a2040b84f1c1b95188b73fe","slug":"21512063160-lucknow-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुराचारी को 20 साल की सजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दुराचारी को 20 साल की सजा
Updated Thu, 30 Nov 2017 11:18 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बलरामपुर। त्वरित सत्र न्यायाधीश प्रथम ने एक व्यक्ति को दुराचार का दोषी मानते हुए 20 साल की सजा सुनाई है। साथ ही न्यायाधीश ने आरोपी को 15 हजार रुपये अर्थदंड भी अदा करने का आदेश दिया है।
गौरा चौराहा थाना क्षेत्र की निवासी एक महिला 16 अगस्त 2013 को बाजार से घर जा रही थी। महिला ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया था कि गांव के ही बिस्मिल्लाह व उनके दो साथी शाम को छह बजे उसे खींच ले गए तथा सभी ने उससे दुष्कर्म किया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया तो पीड़िता ने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय के आदेश पर बिस्मिल्लाह व दो अन्य के खिलाफ 23 नवंबर 2013 को दुराचार का मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना के बाद पुलिस ने बिस्मिल्लाह को दुराचार का दोषी मानते हुए आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सत्र परीक्षण के दौरान सरकारी अधिवक्ता रवींद्र यादव व वसीउल हसन ने सात गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद एफटीसी प्रथम अशोक कुमार ने बिस्मिल्लाह को दुराचार करने का दोषी मानते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही उस पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर आरोपी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।
विज्ञापन
गौरा चौराहा थाना क्षेत्र की निवासी एक महिला 16 अगस्त 2013 को बाजार से घर जा रही थी। महिला ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया था कि गांव के ही बिस्मिल्लाह व उनके दो साथी शाम को छह बजे उसे खींच ले गए तथा सभी ने उससे दुष्कर्म किया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया तो पीड़िता ने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय के आदेश पर बिस्मिल्लाह व दो अन्य के खिलाफ 23 नवंबर 2013 को दुराचार का मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना के बाद पुलिस ने बिस्मिल्लाह को दुराचार का दोषी मानते हुए आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सत्र परीक्षण के दौरान सरकारी अधिवक्ता रवींद्र यादव व वसीउल हसन ने सात गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद एफटीसी प्रथम अशोक कुमार ने बिस्मिल्लाह को दुराचार करने का दोषी मानते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही उस पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर आरोपी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।
विज्ञापन