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योगी सरकार में 201 भ्रष्ट व नाकारा कर्मी जबरन रिटायर, 417 को कड़ा दंड, जल्द और की छंटनी
Thu, 04 Jul 2019 01:01 AM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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Published by: Amulya Rastogi
Updated Thu, 04 Jul 2019 01:01 AM IST
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योगी आदित्यानाथ
- फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश में भ्रष्ट व नाकारा कर्मियों को नौकरी से बाहर करने के लिए शुरू की गई स्क्रीनिंग का असर दिखने लगा है। योगी सरकार के दो साल के कार्यकाल में अब तक विभिन्न विभागों के ऐसे 201 कर्मियों को जबरन सेवानिवृत्ति दे दी गई जबकि 417 को कड़ा दंड दिया गया है। दंड पाने वालों की वेतनवृद्धि व पदोन्नति रोकने तथा पदावनत करने के साथ-साथ कड़ी चेतावनी दी गई है। कुछ और कर्मियों की छंटनी जल्द होने की संभावना है।
दरअसल प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भ्रष्ट-नाकारा अफसरों व कर्मचारियों को सिस्टम से बाहर करने के लिए 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की स्क्रीनिंग कर अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के निर्देश दिए थे। इसके तहत 31 मार्च, 2017 तक 50 साल की उम्र पार कर चुके सरकारी कर्मियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के लिए विभिन्न विभागों में स्क्रीनिंग कमेटी का गठन किया गया था। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार स्क्रीनिंग कमेटी की 31 मार्च, 2017 से 19 मार्च, 2018 के बीच की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई हुई।
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दरअसल प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भ्रष्ट-नाकारा अफसरों व कर्मचारियों को सिस्टम से बाहर करने के लिए 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की स्क्रीनिंग कर अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के निर्देश दिए थे। इसके तहत 31 मार्च, 2017 तक 50 साल की उम्र पार कर चुके सरकारी कर्मियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के लिए विभिन्न विभागों में स्क्रीनिंग कमेटी का गठन किया गया था। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार स्क्रीनिंग कमेटी की 31 मार्च, 2017 से 19 मार्च, 2018 के बीच की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई हुई।
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फिर से की जा रही स्क्रूटनी
मुख्यमंत्री ने एक बार फिर भ्रष्ट व नाकारा कर्मियों को सेवा से बाहर करने का फरमान जारी किया है। इस बार 31 मार्च 2019 को 50 साल की उम्र पूरी कर चुके कर्मियों की स्क्रीनिंग हो रही है। इसके लिए सभी विभागाध्यक्षों व जिलों से 3 जुलाई (बुधवार) तक स्क्रीनिंग रिपोर्ट मांगी गई है। इस महीने के अंत तक स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक के बाद फिर बड़ी संख्या में कार्रवाई संभव है।