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UP: बाल स्वास्थ्य में लखनऊ सहित 20 जिले अति पिछड़ें, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की रिपोर्ट में खुली पोल

Fri, 11 Apr 2025 10:57 AM IST
ishwar ashish चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Fri, 11 Apr 2025 10:57 AM IST
सार

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि लखनऊ सहित प्रदेश के 20 जिले बाल स्वास्थ्य के मामले में अतिपिछड़े हैं। अब इसकी जिलेवार निगरानी बढ़ाई जाएगी।
 

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20 districts including Lucknow are very backward in child health
- फोटो : संवाद

विस्तार

बच्चों की सेहत सुधारने में लखनऊ सहित 20 जिलों की स्थिति बेहद खराब है। ये जिले बच्चों के स्वास्थ्य देखभाल से जुड़े मानकों पर खरा नहीं उतर रहे हैं। यह खुलासा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की रिपोर्ट में हुआ है। अब इन जिलों में नए सिरे से निगरानी बढ़ाई जा रही है। कोशिश है कि अगले तीन से छह माह में मानकों को सुधार कर संबंधित जिलों को असेवित श्रेणी से बाहर निकाला जाए।

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एनएचएम की ओर से प्रदेश में बाल स्वास्थ्य, टीकाकरण, परिवार नियोजन, मातृ कल्याण, राष्ट्रीय कार्यक्रम सहित विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। मिशन के कामकाज को लेकर किए गए सर्वे में हालात चौकाने वाले मिले हैं। अप्रैल 2024 से जनवरी 2025 तक के आंकड़ों के आधार पर बाल स्वास्थ्य की रिपोर्ट तैयार की गई।
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यह रिपोर्ट नवजात मृत्युदर, पांच साल की उम्र तक मृत्यु दर, बच्चों के वजन, नवजात की देखभाल, न्यू बॉर्न स्टेबलाइजेशन यूनिट की स्थिति आदि के मानकों पर तैयार की गई। रिपोर्ट में बाल स्वास्थ्य मामले में 20 जिले अति पिछड़े पाए गए हैं। इसमें लखनऊ, प्रतापगढ़, गाजियाबाद, अलीगढ़, आजमगढ़, श्रावस्ती, शाहजहांपुर, कानपुर देहात, फर्रुखाबाद, फिरोजाबाद, सहारनपुर, बरेली, मथुरा, शामली, गौतमबुद्धनगर, कन्नौज, बुलंदशहर, उन्नाव, गोरखपुर, कानपुर नगर शामिल हैं। अब इन जिलों में विशेष तौर पर निगरानी की जाएगी ताकि अगले छह माह में यहां के मानकों को भी सुधारा जा सके।

रायबरेली, सुल्तानपुर समेत 15 जिले सबसे अच्छे
जिलेवार प्रगति रिपोर्ट के आधार पर पूरे प्रदेश के चार हिस्से में बांटा गया है। जहां 20 जिलों की स्थिति सबसे खराब पाई गई है, वहीं 20 जिलों में सुधार हुआ है और 20 जिले सुधार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। 15 जिलों की स्थिति सबसे बेहतर है। इसमें रायबरेली, सुल्तानपुर, हाथरस, मऊ, बांदा, कुशीनगर, महोबा, इटावा, हमीरपुर, मिर्जापुर, झांसी, जौनपुर, ललितपुर, बागपत और हरदोई शामिल है।

बाल स्वास्थ्य एनएचएम डॉ. सूर्यांश ओझा का कहना है कि जिन जिलों में मानकों में कुछ कमियां हैं, उन्हें सुधारा जा रहा है। हर दिन की रिपोर्ट का आकलन किया जा रहा है। स्थलीय निरीक्षण और जिले की टीम को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। लखनऊ में पूरे प्रदेश के अति गंभीर बच्चे रेफर होकर आते हैं। गौतमबुद्धनगर, कानपुर और बरेली आदि जिलों में भी आसपास के मरीज आते हैं। इस वजह से वहां के ग्राफ खराब दिख रहे हैं, जिसे सुधारने की रणनीति बनाई जा रही है।

ग्राफ में गिरावट चिंताजनक

एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के उपाध्यक्ष डॉ. आशुतोष वर्मा का कहना है कि एनएचएम की ओर से बच्चों की सेहत सुधारने के लिए करोड़ों रुपये मिल रहे हैं। यह रिपोर्ट स्वास्थ्य सुधार की दिशा में उठाए जा रहे कदमों की हकीकत बयां कर रही है। लखनऊ में सामान्य अस्पताल नहीं, बल्कि चिकित्सा स्वास्थ्य और भरपूर बाल रोग विशेषज्ञ हैं। फिर भी बाल स्वास्थ्य के ग्राफ में गिरावट है तो यह चिंताजनक है। ये रिपोर्ट साबित कर रही है कि सरकारी अस्पतालों और संस्थानों में बच्चों की सेहत सुधार के लिए उठाए जा रहे कदम सिर्फ कागजों पर हैं।

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