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लखनऊ: शिक्षकों की नियुक्ति के साथ मिले 20 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट
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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में नए शिक्षकों की नियुक्ति की वजह से वित्तीय भार बढ़ा है तो दूसरी ओर संसाधनों के लिए करीब 20 करोड़ रुपये के रिसर्च प्रोजेक्ट भी मिले हैं। नैक निरीक्षण से पहले लविवि में हुई शिक्षकों की नियुक्ति के बाद अब इनकी एनओसी मिलने की शुरुआत हो गई है।
असल में लविवि ने जो शिक्षक नियुक्त किए हैं, उनके पास पूर्व के संस्थान में शोध प्रोजेक्ट थे। अब ये प्रोजेक्ट उन शिक्षकों के साथ ही लविवि को ट्रांसफर हो रहे हैं। यह प्रक्रिया इसी वित्तीय वर्ष में पूरी होनी है। इसकी वजह से लविवि के पास 20 करोड़ रुपये की राशि आएगी। लविवि में पिछले साल 81 नियमित और 74 संविदा शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। नैक की ग्रेडिंग में ए प्लस-प्लस ग्रेड मिलने में इसकी भी बड़ी भूमिका थी। इनमें से कई शिक्षकों के पास डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेकभनोलॉजी अज्ञैर इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड के प्रोजेक्ट थे।
नियम यह है कि ये प्रोजेक्ट शिक्षक के साथ ही ट्रांसफर हो जाते हैं। ऐसे में इन शिक्षकों के रिसर्च प्रोजेक्ट भी लविवि आ गए हैं। इनमें से करीब 10 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट की एनओसी मिल चुकी है। बाकी की प्रक्रिया चल रही है। लविवि को सरकार से वार्षिक अनुदान के रूप में सिर्फ 39 करोड़ रुपये सालाना की राशि ही मिलती है। इस लिहाज से 20 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट आने से लविवि के संसाधनों में बढ़ोतरी होगी।
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विद्यार्थियों को मिलेंगे बेहतर अवसर
ये रिसर्च प्रोजेक्ट फिजिक्स, केमिस्ट्री और इंजीनियरिंग विभागों में हैं। इनके आने से विवि को फायदा होगा और इस राशि से कई संसाधन खरीदे जाएंगे। वहीं विद्यार्थियों को उन प्रोेजेक्ट और रिसर्च लैब में काम करने का मौका मिलेगा। इनमें से कई शिक्षक ऐसे हैं जो कोरिया, अमेरिका और अन्य देशों में कार्यरत थे। इससे भी विद्यार्थियों को फायदा होगा। विद्यार्थी उस देश और नई तकनीक से परिचित होंगे।
शिक्षक-छात्र औसत में हुआ सुधार
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानकों के अनुसार, स्नातक स्तर पर विश्वविद्यालय में एक शिक्षक पर 25 छात्र और परास्नातक में एक शिक्षक पर 20 छात्रों का मानक होता है। पिछले साल तक लविवि में ओवरऑल औसत प्रति शिक्षक 38 छात्र का था। अब यह औसत एक शिक्षक पर 30 छात्रों का हो गया है।
कोट-
शेष पदों की चयन प्रक्रिया शुरू होगी
शिक्षकों को उनकी योग्यता के आधार पर ही चयन समिति ने चुना था। अच्छी बात यह है कि इनके रिसर्च प्रोजेक्ट भी लविवि के खाते में आएंगे। जल्द ही बचे हुए पदों की चयन प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। इससे यूजीसी का मानक पूरा होगा।
- प्रो. आलोक कुमार राय, कुलपति लविवि
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असल में लविवि ने जो शिक्षक नियुक्त किए हैं, उनके पास पूर्व के संस्थान में शोध प्रोजेक्ट थे। अब ये प्रोजेक्ट उन शिक्षकों के साथ ही लविवि को ट्रांसफर हो रहे हैं। यह प्रक्रिया इसी वित्तीय वर्ष में पूरी होनी है। इसकी वजह से लविवि के पास 20 करोड़ रुपये की राशि आएगी। लविवि में पिछले साल 81 नियमित और 74 संविदा शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। नैक की ग्रेडिंग में ए प्लस-प्लस ग्रेड मिलने में इसकी भी बड़ी भूमिका थी। इनमें से कई शिक्षकों के पास डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेकभनोलॉजी अज्ञैर इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड के प्रोजेक्ट थे।
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नियम यह है कि ये प्रोजेक्ट शिक्षक के साथ ही ट्रांसफर हो जाते हैं। ऐसे में इन शिक्षकों के रिसर्च प्रोजेक्ट भी लविवि आ गए हैं। इनमें से करीब 10 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट की एनओसी मिल चुकी है। बाकी की प्रक्रिया चल रही है। लविवि को सरकार से वार्षिक अनुदान के रूप में सिर्फ 39 करोड़ रुपये सालाना की राशि ही मिलती है। इस लिहाज से 20 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट आने से लविवि के संसाधनों में बढ़ोतरी होगी।
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विद्यार्थियों को मिलेंगे बेहतर अवसर
ये रिसर्च प्रोजेक्ट फिजिक्स, केमिस्ट्री और इंजीनियरिंग विभागों में हैं। इनके आने से विवि को फायदा होगा और इस राशि से कई संसाधन खरीदे जाएंगे। वहीं विद्यार्थियों को उन प्रोेजेक्ट और रिसर्च लैब में काम करने का मौका मिलेगा। इनमें से कई शिक्षक ऐसे हैं जो कोरिया, अमेरिका और अन्य देशों में कार्यरत थे। इससे भी विद्यार्थियों को फायदा होगा। विद्यार्थी उस देश और नई तकनीक से परिचित होंगे।
शिक्षक-छात्र औसत में हुआ सुधार
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानकों के अनुसार, स्नातक स्तर पर विश्वविद्यालय में एक शिक्षक पर 25 छात्र और परास्नातक में एक शिक्षक पर 20 छात्रों का मानक होता है। पिछले साल तक लविवि में ओवरऑल औसत प्रति शिक्षक 38 छात्र का था। अब यह औसत एक शिक्षक पर 30 छात्रों का हो गया है।
कोट-
शेष पदों की चयन प्रक्रिया शुरू होगी
शिक्षकों को उनकी योग्यता के आधार पर ही चयन समिति ने चुना था। अच्छी बात यह है कि इनके रिसर्च प्रोजेक्ट भी लविवि के खाते में आएंगे। जल्द ही बचे हुए पदों की चयन प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। इससे यूजीसी का मानक पूरा होगा।
- प्रो. आलोक कुमार राय, कुलपति लविवि