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नो चाइल्ड लेबर अभियान में मुक्त कराए 2,340 बच्चे
Thu, 08 Oct 2020 09:30 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Thu, 08 Oct 2020 09:30 PM IST
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प्रदेश भर में पिछले महीने चले नो चाइल्ड लेबर अभियान में 2,340 बच्चों को मुक्त कराकर उनके परिवारीजनों के सुपुर्द किया गया। अभियान महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन की पहल पर चलाया गया था। संगठन की एडीजी नीरा रावत ने इस अभियान में सर्वश्रेष्ठ काम करने के लिए पांच जिलों फिरोजाबाद, हरदोई, बहराइच, महराजगंज व पीलीभीत की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के नोडल अधिकारियों व प्रभारियों को पांच-पांच हजार रुपये का पुरस्कार और टीम में शामिल अधिकारियों-कर्मचारियों व स्वयंसेवी संगठनों को प्रशस्ति पत्र देने की घोषणा की।
एडीजी ने बताया कि 01 से 30 सितंबर तक चले अभियान में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट, बाल कल्याण समिति, श्रम विभाग, चाइल्ड लाइन और एनजीओ ने बाजारों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, होटल-ढाबे, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और फैक्टरियों का निरीक्षण किया। इन जगहों पर काम करने वाले बच्चों को मुक्त कराकर जनपदीय बाल कल्याण समितियों के जरिये उनके अभिभावकों को सौंप दिया गया। मुक्त कराए गए बच्चों ने चाइल्ड लाइन और बाल कल्याण समितियों को कई चौंकाने वाली बातें बताई हैं।
किसी बच्चे को डरा-धमकाकर तो किसी को धोखा देकर या फिर बंधक बनाकर मजदूरी कराई जा रही थी। कई बच्चों से भीख मंगवाया जा रहा था। वहीं बच्चियों ने बताया कि उनमें से कुछ से घरेलू कामकाज तो कुछ से देह व्यापार कराए जाते थे।
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फिरोजाबाद से मुक्त कराए सर्वाधिक 152 बच्चे
एडीजी ने बताया कि फिरोजाबाद के शिकोहाबाद और मक्खनपुर इलाकों में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की टीमों ने 152 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया। इसके अलावा हरदोई जिले से 107 बालक और 05 बालिकाएं मुक्त कराई गईं। सभी बालिकाओं को उनके परिवारीजनों के सुपुर्द कर दिया गया है। बहराइच के रुपईडीहा, जरवल रोड, कोतवाली नगर, कोतवाली देहात और कैसरगंज समेत सात जगहों से 110 बाल श्रमिकों को आजाद कराया गया। वहीं, बच्चों से जबरन श्रम कराने के 30 अभियोग भी पंजीकृत किए गए। नेपाल से सटे महराजगंज जिले से 102 और पीलीभीत जिले से 92 बच्चों को मुक्त कराया गया।
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एडीजी ने बताया कि 01 से 30 सितंबर तक चले अभियान में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट, बाल कल्याण समिति, श्रम विभाग, चाइल्ड लाइन और एनजीओ ने बाजारों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, होटल-ढाबे, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और फैक्टरियों का निरीक्षण किया। इन जगहों पर काम करने वाले बच्चों को मुक्त कराकर जनपदीय बाल कल्याण समितियों के जरिये उनके अभिभावकों को सौंप दिया गया। मुक्त कराए गए बच्चों ने चाइल्ड लाइन और बाल कल्याण समितियों को कई चौंकाने वाली बातें बताई हैं।
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किसी बच्चे को डरा-धमकाकर तो किसी को धोखा देकर या फिर बंधक बनाकर मजदूरी कराई जा रही थी। कई बच्चों से भीख मंगवाया जा रहा था। वहीं बच्चियों ने बताया कि उनमें से कुछ से घरेलू कामकाज तो कुछ से देह व्यापार कराए जाते थे।
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फिरोजाबाद से मुक्त कराए सर्वाधिक 152 बच्चे
एडीजी ने बताया कि फिरोजाबाद के शिकोहाबाद और मक्खनपुर इलाकों में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की टीमों ने 152 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया। इसके अलावा हरदोई जिले से 107 बालक और 05 बालिकाएं मुक्त कराई गईं। सभी बालिकाओं को उनके परिवारीजनों के सुपुर्द कर दिया गया है। बहराइच के रुपईडीहा, जरवल रोड, कोतवाली नगर, कोतवाली देहात और कैसरगंज समेत सात जगहों से 110 बाल श्रमिकों को आजाद कराया गया। वहीं, बच्चों से जबरन श्रम कराने के 30 अभियोग भी पंजीकृत किए गए। नेपाल से सटे महराजगंज जिले से 102 और पीलीभीत जिले से 92 बच्चों को मुक्त कराया गया।