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उन्नाव में दुराचार पीड़िता के उत्पीड़न पर आयोग नाराज
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उन्नाव गैंगरेप पीड़िता की प्रताड़ना पर मानवाधिकार आयोग नाराज
राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में मांगा जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
लखनऊ। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उन्नाव गैंगरेप पीड़िता व उसके परिवार के खिलाफ एक आरोपी के आरोप पर मुकदमा दर्ज किए जाने पर नाराजगी जताई है। राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में रिपोर्ट तलब करते हुए मुख्य सचिव को खुद इस मामले को देखने के निर्देश दिए। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा है कि पीड़िता व उसके परिवार का और उत्पीड़न न हो।
आयोग ने समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों पर स्वत: संज्ञान लिया है। इनमें दुराचार पीड़िता ने आरोप लगाया है कि उसे व उसके परिवार के सदस्यों को राज्य सरकार की एजेंसियां प्रताड़ित कर रही हैं। इतना ही नहीं, भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर लगाए आरोप को वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। आयोग का कहना है कि अगर यह समाचार सही है तो यह मानवाधिकारों के हनन का गंभीर मामला है।
आयोग के नोटिस में कहा गया है कि यह राज्य सरकार का दायित्व है कि वह दुराचार पीड़िता व उसके परिवार के सदस्यों और गवाहों की सुरक्षा का ध्यान रखे। ऐसा प्रतीत होता है कि आयोग द्वारा पहले दिए गए निर्देशों पर सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया है।
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राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में मांगा जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
लखनऊ। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उन्नाव गैंगरेप पीड़िता व उसके परिवार के खिलाफ एक आरोपी के आरोप पर मुकदमा दर्ज किए जाने पर नाराजगी जताई है। राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में रिपोर्ट तलब करते हुए मुख्य सचिव को खुद इस मामले को देखने के निर्देश दिए। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा है कि पीड़िता व उसके परिवार का और उत्पीड़न न हो।
आयोग ने समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों पर स्वत: संज्ञान लिया है। इनमें दुराचार पीड़िता ने आरोप लगाया है कि उसे व उसके परिवार के सदस्यों को राज्य सरकार की एजेंसियां प्रताड़ित कर रही हैं। इतना ही नहीं, भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर लगाए आरोप को वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। आयोग का कहना है कि अगर यह समाचार सही है तो यह मानवाधिकारों के हनन का गंभीर मामला है।
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आयोग के नोटिस में कहा गया है कि यह राज्य सरकार का दायित्व है कि वह दुराचार पीड़िता व उसके परिवार के सदस्यों और गवाहों की सुरक्षा का ध्यान रखे। ऐसा प्रतीत होता है कि आयोग द्वारा पहले दिए गए निर्देशों पर सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया है।
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